रांची में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन समाप्त, सरकार ने प्रमुख मांगें मानीं
Digital UP News Desk
रांची: झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से चल रहा छात्रों का आंदोलन बुधवार को एक अहम मोड़ पर पहुंच गया। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच ने अपने आंदोलन को समाप्त करने का ऐलान किया। मंच के छात्र नेताओं के मुताबिक, राज्य सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है। इसके बाद छात्र नेताओं ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की।
हालांकि, आंदोलन खत्म होने की घोषणा के साथ ही प्रदर्शन स्थल पर छात्रों के बीच मतभेद भी देखने को मिले। एक गुट ने जहां सरकार के फैसलों को छात्र हित में बताते हुए अपना सत्याग्रह समाप्त कर दिया, वहीं दूसरे गुट के छात्र आगे की रणनीति को लेकर बैठक करते रहे। ऐसे में फिलहाल यह स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि सभी प्रदर्शनकारी आंदोलन से पीछे हट गए हैं या कुछ छात्र अपनी मांगों को लेकर आगे भी सक्रिय रहेंगे।
25 जुलाई से चल रहा था अनिश्चितकालीन सत्याग्रह
जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं के खिलाफ अभ्यर्थी न्याय मंच की ओर से 25 जुलाई से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू किया गया था। छात्रों का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है, क्योंकि हजारों अभ्यर्थी वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं।
आंदोलन के दौरान छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा समेत कई मांगें उठाईं। इसके अलावा छात्रों की ओर से परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने की भी मांग की जाती रही।
लगातार चले सत्याग्रह के बाद सरकार की ओर से उठाए गए कदमों को मंच ने सकारात्मक माना। इसी आधार पर बुधवार को मंच ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया।
रामावतार महतो ने की आंदोलन खत्म करने की घोषणा
आंदोलन समाप्त करने की घोषणा मंच के छात्र नेता रामावतार महतो ने की। उन्होंने कहा कि सरकार ने मंच की सभी प्रमुख मांगों को मान लिया है। इसलिए अब छात्र हित को ध्यान में रखते हुए आंदोलन को समाप्त किया जा रहा है।
रामावतार महतो ने सरकार की ओर से लिए गए फैसलों को छात्रों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में उठाए गए कदम से अभ्यर्थियों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
उन्होंने सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति भी आभार जताया। मंच की ओर से कहा गया कि सरकार के फैसलों से छात्रों के बीच यह भरोसा पैदा हुआ है कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है।
छात्रों के बीच सामने आया मतभेद
हालांकि, एक मंच द्वारा आंदोलन समाप्त करने की घोषणा के बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में मौजूद छात्रों के बीच मतभेद भी सामने आए। दूसरे गुट से जुड़े छात्र आंदोलन स्थल पर बैठक करते रहे और अपनी आगे की रणनीति पर चर्चा की।
इस गुट के छात्रों का कहना था कि आंदोलन को लेकर अंतिम निर्णय सभी अभ्यर्थियों की सहमति से होना चाहिए। इसलिए उन्होंने तत्काल आंदोलन समाप्त करने के बजाय पहले आपस में चर्चा करने का रास्ता अपनाया। दोपहर तक छात्रों के बीच बैठक और विचार-विमर्श का दौर जारी रहा।
ऐसे में आंदोलन के भविष्य को लेकर फिलहाल दो तरह की तस्वीर सामने आई है। एक ओर जहां जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच ने अपना सत्याग्रह समाप्त कर दिया है, वहीं दूसरी ओर दूसरे गुट के छात्र सरकार के फैसलों का मूल्यांकन कर आगे की रणनीति तय कर रहे हैं।
परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों की सबसे बड़ी चिंता परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ी रही है। सरकारी नौकरियों के लिए आयोजित होने वाली परीक्षाओं में बड़ी संख्या में युवा भाग लेते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की कथित अनियमितता का सीधा असर अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है।
छात्रों का तर्क रहा है कि परीक्षा प्रक्रिया में यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही, दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा भी जरूरी है।
यही वजह है कि जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में रहा। अब सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बाद आंदोलन के एक गुट ने इसे समाप्त करने का फैसला किया है।
सरकार के फैसले को छात्र हित में बताया
आंदोलन समाप्त करने वाले मंच ने सरकार के फैसलों को छात्र हित में महत्वपूर्ण बताया है। मंच के अनुसार, सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
इसके साथ ही छात्रों का यह भी मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार और संबंधित परीक्षा संस्थाओं की बड़ी जिम्मेदारी है। क्योंकि किसी भी परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी अपनी तैयारी, समय और संसाधनों का बड़ा हिस्सा इसमें लगाते हैं।
इसलिए परीक्षा से जुड़ी शिकायतों का समय पर समाधान और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। इससे न केवल अभ्यर्थियों का भरोसा कायम रहेगा, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था भी मजबूत होगी।
दूसरे गुट के फैसले पर बनी निगाहें
अब सबसे ज्यादा नजर दूसरे गुट के छात्रों के अगले फैसले पर है। स्टेडियम में बैठक कर रहे छात्र अपनी मांगों और सरकार के फैसलों पर चर्चा कर रहे हैं। संकेत मिले हैं कि जल्द ही उनकी ओर से भी आंदोलन को लेकर कोई घोषणा की जा सकती है।
यदि दूसरा गुट भी आंदोलन समाप्त करने का फैसला करता है तो जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्रों का प्रदर्शन पूरी तरह खत्म हो सकता है। वहीं, यदि कुछ मांगों को लेकर असहमति बनी रहती है तो आंदोलन का कोई नया स्वरूप भी सामने आ सकता है।
फिलहाल, एक गुट द्वारा आंदोलन समाप्त किए जाने के बाद छात्रों के लंबे संघर्ष को विराम मिलता दिखाई दे रहा है। साथ ही, सरकार के फैसलों के क्रियान्वयन पर भी अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों की नजर बनी रहेगी।
आगे क्या होगा?
आंदोलन समाप्त होने के बाद अब छात्रों की उम्मीद सरकार के फैसलों के प्रभावी क्रियान्वयन पर टिकी है। मंच की ओर से जिन मांगों को छात्र हित में महत्वपूर्ण बताया गया है, उनके पालन से ही अभ्यर्थियों के बीच विश्वास और मजबूत होगा।
वहीं, परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों पर आगे होने वाली कार्रवाई भी महत्वपूर्ण होगी। छात्रों की मांग रही है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश न रहे और सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले।
कुल मिलाकर, रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच के आंदोलन का एक चरण समाप्त हो गया है। मंच ने सरकार द्वारा प्रमुख मांगें माने जाने को आंदोलन की सफलता बताया है। हालांकि, दूसरे गुट की बैठक और उसके संभावित फैसले के कारण पूरे आंदोलन की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। आने वाले समय में सरकार के फैसलों के क्रियान्वयन और दूसरे छात्र गुट की घोषणा से स्थिति और स्पष्ट होगी।

