उत्तराखंड के स्कूलों में AI शिक्षा लागू करने की मांग, डॉ. राजशेखर जोशी बोले- भविष्य के लिए छात्रों को अभी से करें तैयार

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रिपोर्ट- हरीश देवली 

देहरादूनः उत्तराखंड में स्कूली शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुझाव सामने आया है। पूर्व सेतु आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजशेखर जोशी ने प्रदेश के सभी विद्यालयों के पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) को तत्काल शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि दुनिया तेजी से डिजिटल और तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में यदि छात्रों को प्रारंभिक स्तर से ही AI की शिक्षा दी जाए, तो वे भविष्य की चुनौतियों और रोजगार के अवसरों के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकेंगे।

उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक बनाना होगा। यही कारण है कि उत्तराखंड को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए स्कूल स्तर से ही AI आधारित शिक्षा को अनिवार्य किया जाना चाहिए।

तकनीकी युग की जरूरत बन चुका है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

डॉ. राजशेखर जोशी ने कहा कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल एक नई तकनीक नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था, उद्योग, चिकित्सा, कृषि, शिक्षा और प्रशासन का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। दुनिया के कई विकसित देशों में स्कूली शिक्षा के दौरान ही छात्रों को AI और डिजिटल तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि उत्तराखंड समय रहते इस दिशा में कदम उठाता है, तो राज्य के विद्यार्थी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होंगे। इसके अलावा वे भविष्य में उभरने वाले नए रोजगार क्षेत्रों में भी बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे।

स्कूल स्तर से मिले व्यावहारिक प्रशिक्षण

डॉ. जोशी का मानना है कि केवल सैद्धांतिक जानकारी पर्याप्त नहीं होगी। विद्यार्थियों को AI की व्यावहारिक शिक्षा भी दी जानी चाहिए ताकि वे तकनीक को समझने के साथ-साथ उसका उपयोग भी सीख सकें।

उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यालयों में आधुनिक कंप्यूटर लैब विकसित की जाएं, शिक्षकों को AI संबंधी प्रशिक्षण दिया जाए तथा छात्रों को प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा के माध्यम से तकनीकी नवाचार के लिए प्रेरित किया जाए। इससे बच्चों की सीखने की क्षमता में भी सुधार होगा और वे वास्तविक समस्याओं के समाधान विकसित करने की दिशा में सोच सकेंगे।

तार्किक और तकनीकी क्षमता होगी मजबूत

डॉ. राजशेखर जोशी ने कहा कि AI शिक्षा छात्रों में केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं बढ़ाएगी, बल्कि उनकी तार्किक क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच, समस्या समाधान कौशल और रचनात्मकता को भी मजबूत करेगी।

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में लगभग हर क्षेत्र में डिजिटल तकनीकों का उपयोग बढ़ेगा। ऐसे में जिन छात्रों के पास AI और डिजिटल टूल्स की समझ होगी, वे अन्य छात्रों की तुलना में अधिक सक्षम साबित होंगे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप हो सकता है बड़ा कदम

उन्होंने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP) का उद्देश्य भी छात्रों को कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है। यदि उत्तराखंड सरकार AI को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाती है, तो यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप होगा।

साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि AI शिक्षा को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के विद्यालय समान रूप से इसका लाभ उठा सकें।

डिजिटल उत्तराखंड की दिशा में मिलेगी नई गति

डॉ. जोशी के अनुसार, AI शिक्षा केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे पूरे राज्य की डिजिटल क्षमता मजबूत होगी। यदि स्कूलों से ही तकनीकी रूप से दक्ष छात्र तैयार होंगे, तो भविष्य में स्टार्टअप, रिसर्च, इनोवेशन और डिजिटल उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ मानव संसाधन के क्षेत्र में भी समृद्ध है। यदि युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाए, तो राज्य डिजिटल इनोवेशन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

रोजगार और स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित कौशल भविष्य के रोजगार बाजार की सबसे बड़ी आवश्यकता बनने जा रहा है। ऐसे में यदि छात्रों को विद्यालय स्तर से ही AI का ज्ञान प्राप्त होगा, तो वे उच्च शिक्षा और रोजगार दोनों क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

इसके अलावा AI आधारित स्टार्टअप, डेटा एनालिटिक्स, रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में भी युवाओं के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है।

सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील

डॉ. राजशेखर जोशी ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि उत्तराखंड के सभी विद्यालयों के पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शीघ्र शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। उनका कहना है कि भविष्य की शिक्षा वही होगी, जो छात्रों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाएगी।

उन्होंने विश्वास जताया कि यदि समय रहते यह पहल की जाती है, तो उत्तराखंड देश के उन राज्यों में शामिल हो सकता है जो आधुनिक शिक्षा, डिजिटल नवाचार और तकनीकी कौशल विकास के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेंगे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज केवल एक तकनीकी विषय नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं का आधार बन चुका है। ऐसे में उत्तराखंड के विद्यालयों में AI शिक्षा को शामिल करने की मांग शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुझाव के रूप में देखी जा रही है। यदि इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाते हैं, तो राज्य के छात्र भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अधिक सक्षम बन सकते हैं और उत्तराखंड डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।

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