बांदा: स्कूल के बाहर रोजाना लगने वाला जाम बना बड़ी चुनौती, स्थायी लोक अदालत पहुंचा मामला
रिपोर्टः शैलेन्द्र शानू वर्मा
बांदाः उत्तर प्रदेश के बांदा शहर में स्थित सेंट मेरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के बाहर प्रतिदिन लगने वाला भीषण ट्रैफिक जाम अब केवल स्थानीय असुविधा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और स्कूल परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने लगा है। वर्षों से चली आ रही इस समस्या के समाधान की मांग करते हुए अब पांच नागरिकों ने स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया है। शिकायत में जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, शिक्षा विभाग, परिवहन विभाग और स्कूल प्रबंधन को पक्षकार बनाया गया है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब स्कूलों के आसपास सुरक्षित यातायात व्यवस्था और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि समस्या नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है। इसके बावजूद प्रभावी और स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए।
रोजाना छुट्टी के समय लग जाता है लंबा जाम
स्थानीय लोगों के अनुसार सेंट मेरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छुट्टी के समय मुख्य मार्ग पर वाहनों का दबाव अचानक बढ़ जाता है। बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को लेने के लिए निजी वाहनों से पहुंचते हैं, जिससे सड़क पर लंबी कतारें लग जाती हैं। परिणामस्वरूप कुछ ही मिनटों में पूरा मार्ग जाम की चपेट में आ जाता है।
इस दौरान केवल स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि आम नागरिक, एंबुलेंस, व्यापारिक वाहन और अन्य राहगीर भी प्रभावित होते हैं। कई बार लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी देर हो जाती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह स्थिति लगभग प्रतिदिन देखने को मिलती है।
स्थायी लोक अदालत में दायर हुआ शिकायत वाद
समस्या के स्थायी समाधान की मांग करते हुए पांच नागरिकों ने स्थायी लोक अदालत में शिकायत वाद दायर किया है। शिकायत में जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, यातायात पुलिस, शिक्षा विभाग, परिवहन विभाग तथा स्कूल प्रबंधन को पक्षकार बनाया गया है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित विभागों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि समय रहते समुचित ट्रैफिक प्रबंधन किया जाता, तो वर्तमान स्थिति से बचा जा सकता था।
जाम के बीच विवाद और मारपीट का मामला भी आया सामने
हाल ही में स्कूल के बाहर जाम के दौरान बच्चों को लेने पहुंचे दो परिवारों के बीच विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों के बीच मारपीट की घटना हुई, जिसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि यातायात व्यवस्था व्यवस्थित होती और वाहनों की आवाजाही नियंत्रित रहती, तो इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना काफी कम रहती। उनका मानना है कि अव्यवस्थित ट्रैफिक कई बार तनावपूर्ण माहौल भी पैदा कर देता है।
बारिश के दौरान बच्चों के फंसने का भी किया गया उल्लेख
शिकायत वाद में 21 जून 2026 की घटना का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार उस दिन बारिश के बीच भारी जाम लग गया था, जिसके कारण कई बच्चे लंबे समय तक वाहनों में फंसे रहे। बताया गया कि कुछ बच्चों की तबीयत भी प्रभावित हुई थी।
उनका कहना है कि इस घटना के बाद उम्मीद थी कि प्रशासन और संबंधित विभाग स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे, लेकिन स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ।
स्कूल प्रबंधन पर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं ने केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर भी प्रश्न उठाए हैं। उनका आरोप है कि स्कूल परिसर के बाहर अभिभावकों के वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था विकसित नहीं की गई है। इसके साथ ही सुरक्षित और सुव्यवस्थित पिक-अप एवं ड्रॉप व्यवस्था का भी अभाव बताया गया है।
उनका कहना है कि यदि स्कूल स्तर पर वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए प्रभावी योजना बनाई जाए, तो सड़क पर बनने वाली अव्यवस्था को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है समस्या
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह समस्या केवल सेंट मेरी स्कूल तक सीमित नहीं है। शहर के कई प्रमुख विद्यालयों के बाहर छुट्टी के समय इसी प्रकार का ट्रैफिक दबाव देखने को मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहर के तेजी से बढ़ते यातायात और स्कूलों के आसपास सीमित सड़क क्षमता को देखते हुए व्यापक ट्रैफिक प्रबंधन योजना की आवश्यकता है। यदि सभी प्रमुख विद्यालयों के लिए अलग-अलग यातायात योजना तैयार की जाए, तो जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
समग्र ट्रैफिक प्रबंधन योजना की उठी मांग
नागरिकों ने मांग की है कि जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभाग संयुक्त रूप से स्कूलों के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान तैयार करें। इसके तहत छुट्टी के समय अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, वन-वे व्यवस्था, पार्किंग स्थल का निर्धारण, अभिभावकों के लिए अलग पिक-अप जोन तथा ट्रैफिक स्वयंसेवकों की व्यवस्था जैसे कदमों पर विचार किया जा सकता है।
इसके अलावा स्कूल प्रबंधन और प्रशासन के बीच नियमित समन्वय स्थापित करने की भी आवश्यकता बताई गई है, ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा और आम नागरिकों की सुविधा दोनों सुनिश्चित की जा सकें।
अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं लोगों की निगाहें
चूंकि मामला अब स्थायी लोक अदालत तक पहुंच चुका है, इसलिए स्थानीय नागरिकों की नजरें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते हैं, तो भविष्य में यातायात संबंधी समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
साथ ही नागरिकों का यह भी मानना है कि विद्यालयों के आसपास सुरक्षित और सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। ऐसे में प्रशासन, पुलिस, शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल करना समय की आवश्यकता है।
बांदा में सेंट मेरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के बाहर रोजाना लगने वाला जाम अब एक गंभीर शहरी प्रबंधन चुनौती के रूप में सामने आया है। स्थायी लोक अदालत में शिकायत दर्ज होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि संबंधित विभाग इस मुद्दे पर समग्र दृष्टिकोण अपनाते हुए ठोस और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कार्य करेंगे। यदि समय रहते प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन लागू किया जाता है, तो न केवल विद्यार्थियों और अभिभावकों को राहत मिलेगी, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था भी अधिक सुचारु बन सकेगी।

