डायरिया में ओआरएस सबसे बड़ा बचाव, यूपी में करीब आधे बच्चों को नहीं मिल रहा घोल
रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा
कानपुर: डायरिया यानी दस्त की समस्या बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है। हालांकि, समय पर ओआरएस और जिंक का इस्तेमाल कर डायरिया से होने वाली जटिलताओं और निर्जलीकरण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विश्व ओआरएस सप्ताह के अवसर पर एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स कानपुर की ओर से जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में प्रेस वार्ता आयोजित की गई।
प्रेस वार्ता में चिकित्सकों ने डायरिया के दौरान ओआरएस के महत्व, बच्चों में निर्जलीकरण से बचाव और अनावश्यक दवाओं के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी। इस दौरान विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चे को दस्त होने पर घबराने के बजाय सबसे पहले ओआरएस देना शुरू करें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
डायरिया में समय पर ओआरएस देना बेहद जरूरी
एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. जे.के. गुप्ता ने कहा कि डायरिया आज भी बच्चों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि इसका सबसे सरल, सुरक्षित और प्रभावी उपचार ओआरएस तथा जिंक है।
उन्होंने कहा कि दस्त के दौरान शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी हो सकती है। यही स्थिति आगे चलकर निर्जलीकरण का कारण बनती है। इसलिए, समय पर ओआरएस देना बेहद महत्वपूर्ण है।
डॉ. गुप्ता के अनुसार, समय पर ओआरएस और जिंक देने से बड़ी संख्या में बच्चों को गंभीर स्थिति से बचाया जा सकता है। साथ ही, अनावश्यक अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता को भी कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अभिभावकों को डायरिया को हल्के में नहीं लेना चाहिए। हालांकि, हर मामले में घबराने की जरूरत भी नहीं है। सही समय पर प्राथमिक देखभाल और चिकित्सकीय सलाह से बच्चे की स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।
दुनिया में हर साल लाखों लोगों की डायरिया से मौत
प्रेस वार्ता में पूर्व बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ए.के. आर्या ने डायरिया से जुड़े वैश्विक और राष्ट्रीय आंकड़ों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्व स्तर पर हर वर्ष डायरिया से लगभग 12 लाख लोगों की मृत्यु होती है। इनमें पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की संख्या भी बड़ी है।
उन्होंने कहा कि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में डायरिया मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। भारत में भी हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग डायरिया और उससे होने वाले निर्जलीकरण के कारण प्रभावित होते हैं।
डॉ. आर्या ने बताया कि देश में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की कुल मृत्यु में एक महत्वपूर्ण हिस्सा डायरिया और उससे होने वाले डिहाइड्रेशन से जुड़ा है। ऐसे में, बीमारी के दौरान समय पर उपचार और सही देखभाल बेहद आवश्यक है।
बिना सलाह एंटीबायोटिक देने से बचें
चिकित्सकों ने अभिभावकों को बिना चिकित्सकीय सलाह के बच्चों को एंटीबायोटिक या दस्त रोकने वाली दवाएं देने से बचने की सलाह दी। डॉ. ए.के. आर्या ने कहा कि कई बार अभिभावक बच्चे को दस्त होने पर तुरंत एंटीबायोटिक दवा शुरू कर देते हैं।
हालांकि, अधिकांश तीव्र दस्त के मामलों में एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती। अनावश्यक दवाओं के इस्तेमाल से बच्चों पर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं और भविष्य में दवाओं के प्रति प्रतिरोध की समस्या बढ़ सकती है।
इसलिए, उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चे को कोई भी दवा देने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। विशेष रूप से छोटे बच्चों के मामले में स्वयं से दवा देना नुकसानदायक हो सकता है।
यूपी में करीब आधे बच्चों को नहीं मिलता ओआरएस
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र गौतम ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य समुदाय ने वर्ष 2030 तक डायरिया से पीड़ित कम से कम 70 प्रतिशत बच्चों तक ओआरएस पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत में डायरिया से पीड़ित 60.6 प्रतिशत बच्चों को ओआरएस दिया जाता है। वहीं, उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 50.7 प्रतिशत है।
इसका अर्थ है कि प्रदेश में डायरिया से पीड़ित लगभग आधे बच्चों को ओआरएस नहीं मिल पाता। चिकित्सकों ने इसे जनजागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर पर महत्वपूर्ण चुनौती बताया।
डॉ. गौतम ने कहा कि ओआरएस आसानी से उपलब्ध होने के बावजूद कई परिवार इसके सही इस्तेमाल से अनजान हैं। इसलिए, जागरूकता अभियान चलाकर अभिभावकों को इसके महत्व की जानकारी देना जरूरी है।
ओआरएस के साथ जिंक का इस्तेमाल भी जरूरी
चिकित्सकों ने बताया कि डायरिया के दौरान ओआरएस के साथ जिंक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में डायरिया से पीड़ित बच्चों में ओआरएस के साथ जिंक देने का आंकड़ा अभी अपेक्षाकृत कम है।
उत्तर प्रदेश में भी बड़ी संख्या में बच्चों को डायरिया के दौरान जिंक नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों ने कहा कि चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जिंक का सेवन बच्चे की रिकवरी में सहायक हो सकता है।
डॉ. अमितेश यादव ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चे को दस्त होने पर तुरंत ओआरएस देना शुरू करें। चिकित्सक की सलाह के अनुसार जिंक की दवा दें और बच्चे को स्तनपान तथा सामान्य भोजन जारी रखें।
उन्होंने कहा कि डायरिया के दौरान बच्चे को भोजन पूरी तरह बंद नहीं करना चाहिए। यदि निर्जलीकरण के लक्षण दिखाई दें या बच्चे की स्थिति बिगड़ती नजर आए, तो तुरंत अस्पताल या चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
बच्चे को स्तनपान और सामान्य भोजन जारी रखें
चिकित्सकों ने बताया कि डायरिया के दौरान कई अभिभावक बच्चे को खाना देना बंद कर देते हैं। हालांकि, ऐसा करने से बच्चे को कमजोरी हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे को उसकी स्थिति के अनुसार स्तनपान और सामान्य भोजन जारी रखना चाहिए। साथ ही, ओआरएस देकर शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की कमी को पूरा करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
हालांकि, बच्चे की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार उपचार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए, गंभीर लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
25 से 31 जुलाई तक चलेगा जागरूकता अभियान
एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स कानपुर की ओर से 25 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक पूरे शहर में विश्व ओआरएस सप्ताह मनाया जाएगा। इस दौरान विभिन्न स्तरों पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
अभियान के तहत अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, विद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर ओआरएस जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके अलावा, ओआरएस कॉर्नर, जनजागरण अभियान और जनसंपर्क कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।
चिकित्सकों और केमिस्टों के साथ बैठकें आयोजित कर डायरिया के दौरान ओआरएस और जिंक के महत्व की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, पोस्टर और चित्रकला प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों और आम लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।
जनजागरूकता से कम हो सकती हैं डायरिया की जटिलताएं
चिकित्सकों का कहना है कि डायरिया से होने वाली गंभीर जटिलताओं को काफी हद तक जागरूकता और समय पर देखभाल से रोका जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि अभिभावक बीमारी के शुरुआती लक्षणों को समझें और समय पर सही कदम उठाएं।
ओआरएस का सही इस्तेमाल, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जिंक, पर्याप्त पोषण और जरूरत पड़ने पर समय पर अस्पताल पहुंचना महत्वपूर्ण है।
कुल मिलाकर, विश्व ओआरएस सप्ताह के अवसर पर एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स कानपुर ने डायरिया से बचाव और उपचार को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान शुरू करने की तैयारी की है। चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि बच्चे को दस्त होने पर ओआरएस देना प्राथमिक और महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या दस्त रोकने वाली दवाएं देने से बचना चाहिए। 25 से 31 जुलाई तक चलने वाले अभियान के माध्यम से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अभिभावकों और आम लोगों को डायरिया से बचाव के उपायों की जानकारी दी जाएगी।

