Jantar Mantar Protest: CJP जंतर-मंतर में कैसे करती है काम , कौन लेता है फैसले?
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। आंदोलन के बीच सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। गुरुवार को सरकार की ओर से संगठन के नेताओं से बातचीत की पहल की गई।
हालांकि, CJP ने स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी औपचारिक वार्ता में तभी शामिल होगा, जब बातचीत किसी तटस्थ (न्यूट्रल) स्थान पर आयोजित की जाए।
संगठन का कहना है कि संवाद का माहौल निष्पक्ष और सभी पक्षों के लिए समान होना चाहिए। इसी वजह से CJP ने जंतर-मंतर के आसपास स्थित किसी न्यूट्रल वेन्यू, जैसे कॉन्स्टिट्यूशन क्लब या अन्य उपयुक्त स्थान पर बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया है।
न्यूट्रल वेन्यू पर बातचीत की मांग
CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि संगठन बातचीत से पीछे नहीं हट रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार समाधान चाहती है, तो उसे वार्ता के लिए ऐसा स्थान चुनना चाहिए, जहां दोनों पक्ष समान स्थिति में बैठकर चर्चा कर सकें।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर के आसपास कई ऐसे स्थान हैं, जहां बिना किसी व्यवधान के सकारात्मक बातचीत संभव है। संगठन का मानना है कि निष्पक्ष स्थान पर होने वाली बातचीत से समाधान की संभावनाएं अधिक मजबूत होंगी।
आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी
जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक शामिल हैं। प्रदर्शन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए संगठन ने अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की हैं। इसके कारण धरना स्थल पर अनुशासन और समन्वय बनाए रखने में मदद मिल रही है।
आंदोलन से जुड़े स्वयंसेवक लगातार यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से चलता रहे। इसी वजह से विभिन्न गतिविधियों के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं।
400 वॉलंटियर्स संभाल रहे हैं व्यवस्था
CJP के आंदोलन में लगभग 400 स्वयंसेवक (वॉलंटियर्स) सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ये स्वयंसेवक अलग-अलग जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।
कई वॉलंटियर ह्यूमन चेन बनाकर धरना स्थल के आसपास व्यवस्था बनाए रखते हैं, जिससे आने-जाने वालों को सुविधा मिलती है और भीड़ नियंत्रित रहती है।
इसके अलावा कुछ टीमें मंच संचालन, कुछ मीडिया समन्वय और अन्य समूह भीड़ प्रबंधन का कार्य संभाल रहे हैं। इस सुव्यवस्थित व्यवस्था के कारण आंदोलन व्यवस्थित रूप से संचालित हो रहा है।
8 सदस्यीय कोर टीम संभाल रही नेतृत्व
आंदोलन की पूरी रणनीति और संचालन आठ सदस्यीय कोर टीम के हाथों में है। यही टीम आंदोलन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेती है।
इस कोर टीम में शामिल सदस्य हैं, अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका, सौरभ दास, रतना सिंह, दीपक बलियान, आफरीन नवाज, वैष्णवी गौर, अमूल्य धवन। यही टीम आंदोलन की दिशा, कार्यक्रमों की रूपरेखा, सरकार से संवाद और भविष्य की रणनीति तय करती है।
अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ हैं सदस्य
CJP की कोर टीम की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसके सदस्य अलग-अलग पेशेवर पृष्ठभूमि से आते हैं। इससे संगठन को विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञता और अनुभव का लाभ मिलता है।
उदाहरण के तौर पर रतना सिंह पेशे से वकील हैं। वह कानूनी पत्रकारिता से भी जुड़ी रही हैं और वर्तमान में उच्च न्यायालय में वकालत कर रही हैं। उनके अनुभव का उपयोग संगठन कानूनी पहलुओं को समझने और रणनीति बनाने में करता है।
वहीं वैष्णवी गौर सार्वजनिक नीति (Public Policy) की विशेषज्ञ और शोधकर्ता हैं। नीति संबंधी मामलों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों का भी अनुभव
कोर टीम की सदस्य आफरीन नवाज ने एमबीए की पढ़ाई की है। वह उद्यमिता से जुड़ी रही हैं और विभिन्न जन आंदोलनों में भी सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं।
दूसरी ओर दीपक बलियान राजनीतिक विज्ञान के शोधार्थी हैं। वह पिछले लगभग आठ वर्षों से किसान आंदोलनों और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। उनके अनुभव का उपयोग संगठन आंदोलन की रणनीति तैयार करने में करता है।
रणनीतिक फैसलों में प्रमुख भूमिका
संगठन के अनुसार अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास आंदोलन की रणनीति तैयार करने और सरकार के साथ संवाद से जुड़े मामलों में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
सरकार से बातचीत, प्रेस ब्रीफिंग, आंदोलन के अगले चरण और विभिन्न कार्यक्रमों की घोषणा जैसे महत्वपूर्ण निर्णय इन्हीं सदस्यों की भागीदारी से लिए जाते हैं।
हालांकि अंतिम निर्णय पूरी कोर टीम की बैठक में सामूहिक रूप से तय किए जाते हैं।
सामूहिक नेतृत्व पर जोर
CJP का कहना है कि संगठन किसी एक व्यक्ति के नेतृत्व पर निर्भर नहीं है। इसके बजाय सामूहिक नेतृत्व की व्यवस्था अपनाई गई है, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सहभागी बनती है।
यही कारण है कि आंदोलन की रणनीति, प्रदर्शन का स्वरूप और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा के बाद सामूहिक सहमति से निर्णय लिए जाते हैं।
संवाद और समाधान पर संगठन का जोर
हालांकि आंदोलन जारी है, लेकिन संगठन लगातार यह भी कह रहा है कि यदि सरकार सकारात्मक पहल करती है तो बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जा सकता है।
CJP के नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी मांगों को सामने रखना ही नहीं, बल्कि रचनात्मक संवाद के जरिए उचित समाधान तक पहुंचना भी है। इसी वजह से उन्होंने न्यूट्रल वेन्यू पर वार्ता की मांग दोहराई है।
आगे की रणनीति पर नजर
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और संगठन के बीच बातचीत कब और किस स्थान पर होती है। यदि दोनों पक्ष किसी साझा मंच पर सहमत होते हैं, तो आंदोलन की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।
वहीं, संगठन की कोर टीम लगातार बैठकें कर आगे की रणनीति तैयार कर रही है। साथ ही स्वयंसेवकों के माध्यम से धरना स्थल की व्यवस्थाओं पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है।

