कानपुर में खुरपका-मुंहपका से बचाव के लिए विशेष अभियान शुरू, 5.26 लाख पशुओं का होगा टीकाकरण
रिपोर्ट – सुहैल अंसारी
कानपुर: पशुओं को खुरपका-मुंहपका यानी फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) जैसी संक्रामक बीमारी से बचाने के लिए कानपुर नगर में विशेष टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया है। बुधवार को विकास भवन परिसर से मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन ने हरी झंडी दिखाकर 36 टीकाकरण टीमों को रवाना किया। यह अभियान जिले के सभी 10 विकासखंडों के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में भी चलाया जाएगा।
अभियान के तहत पशु चिकित्सा विभाग की टीमें गांव-गांव और वार्डों में पहुंचकर पशुओं का पंजीकरण, टैगिंग और टीकाकरण करेंगी। जनपद में कुल 5,26,370 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे अभियान में सहयोग करें और अपने सभी पात्र पशुओं का समय से टीकाकरण अवश्य कराएं।
8 सितंबर तक चलेगा विशेष टीकाकरण अभियान
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराग सिंह के अनुसार, विशेष टीकाकरण अभियान 22 जुलाई से 8 सितंबर 2026 तक संचालित किया जाएगा। इस दौरान टीकाकरण दल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पहुंचेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक पात्र पशुओं को बीमारी से सुरक्षा प्रदान करना है। इसके लिए विभागीय टीमें घर-घर जाकर पशुओं की जानकारी जुटाएंगी। साथ ही, जिन पशुओं का अभी तक पंजीकरण नहीं हुआ है, उनका रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा।
विभाग ने ग्राम पंचायतों, नगर पालिका परिषदों और नगर निगम से भी अभियान के प्रचार-प्रसार में सहयोग करने की अपील की है। इसके माध्यम से पशुपालकों को टीकाकरण के महत्व की जानकारी दी जाएगी और उन्हें अपने पशुओं को टीका लगवाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
36 टीमें गांवों और वार्डों में करेंगी काम
अभियान के लिए कुल 36 टीकाकरण टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें जिले के सभी 10 विकासखंडों के गांवों तथा शहरी क्षेत्रों के वार्डों में पहुंचकर निर्धारित लक्ष्य के अनुसार टीकाकरण करेंगी।
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन ने अभियान के शुभारंभ के दौरान कहा कि खुरपका-मुंहपका अत्यंत संक्रामक बीमारी है। इसलिए समय पर टीकाकरण पशुओं को इससे बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि वे टीकाकरण टीमों का सहयोग करें और अपने सभी पात्र पशुओं को अभियान के दौरान टीका जरूर लगवाएं।
उन्होंने कहा कि पशुपालकों की सहभागिता से ही अभियान को सफल बनाया जा सकता है। इसलिए किसी भी पशु को टीकाकरण से वंचित न रहने देने के लिए विभागीय टीमों के साथ समन्वय आवश्यक है।
क्या है खुरपका-मुंहपका रोग?
अपर निदेशक ग्रेड-2, कानपुर मंडल ने बताया कि खुरपका-मुंहपका एक वायरल बीमारी है। यह मुख्य रूप से खुर वाले पशुओं को प्रभावित करती है। गाय, भैंस, बैल, बछड़े, बकरी, भेड़ और सूकर जैसे पशु इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।
बीमारी के दौरान पशुओं में तेज बुखार, अत्यधिक लार गिरना और मुंह व खुरों के आसपास छाले जैसी समस्याएं देखी जा सकती हैं। इसके अलावा, दूध देने वाले पशुओं में दूध उत्पादन कम हो सकता है। गर्भित पशुओं में भी स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होने की आशंका रहती है।
इस बीमारी का सीधा प्रभाव पशुपालकों की आय पर पड़ता है। पशु के बीमार होने पर दूध उत्पादन में कमी, उपचार का खर्च और पशु की कार्यक्षमता प्रभावित होने से आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसलिए बीमारी की रोकथाम के लिए नियमित टीकाकरण को महत्वपूर्ण माना गया है।
समय पर टीकाकरण से बीमारी पर नियंत्रण
पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खुरपका-मुंहपका से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी है। समय पर टीका लगने से पशुओं में बीमारी के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से जिले में व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।
अधिकारियों ने पशुपालकों से अपील की है कि वे टीकाकरण को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें। जब विभागीय टीम उनके गांव या वार्ड में पहुंचे, तो अपने पशुओं को टीका लगवाने में सहयोग करें।
इसके साथ ही पशुपालकों से यह भी कहा गया है कि वे अपने पशुओं की सही जानकारी टीकाकरण टीम को उपलब्ध कराएं। इससे विभाग को जिले में पशुओं का बेहतर रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलेगी।
बिना टैग वाले पशुओं की होगी टैगिंग
अभियान के दौरान उन पशुओं की टैगिंग भी की जाएगी, जिनके कानों में अभी तक टैग नहीं लगे हैं। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराग सिंह ने पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं की टैगिंग अवश्य कराएं।
टैगिंग के बाद पशुओं का पंजीकरण भारत पशुधन ऐप पर किया जाएगा। इसके लिए पशुपालकों को अपना मोबाइल नंबर और ओटीपी टीकाकरण टीम को उपलब्ध कराना होगा। इस प्रक्रिया के माध्यम से पशुओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
डिजिटल रिकॉर्ड से पशुओं की पहचान और विभागीय योजनाओं की निगरानी में सुविधा होगी। साथ ही, पशुपालकों को पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने में भी सहायता मिल सकती है।
पशुपालकों से मोबाइल और ओटीपी उपलब्ध कराने की अपील
विभाग ने कहा है कि पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पशुपालकों को अपना मोबाइल नंबर उपलब्ध कराना होगा। इसके बाद प्राप्त ओटीपी के माध्यम से पशु का डिजिटल पंजीकरण किया जाएगा।
अधिकारियों ने पशुपालकों से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया में विभागीय टीमों का सहयोग करें। पशुओं की सही जानकारी उपलब्ध होने से टीकाकरण अभियान की निगरानी और भविष्य की योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकेगा।
हालांकि, पशुपालकों को अपनी व्यक्तिगत बैंकिंग या वित्तीय जानकारी किसी अनधिकृत व्यक्ति के साथ साझा न करने की सलाह भी दी जाती है। टीकाकरण और पशु पंजीकरण से जुड़ी जानकारी केवल अधिकृत विभागीय टीम को ही उपलब्ध करानी चाहिए।
ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों से सहयोग की अपील
अभियान की सफलता के लिए ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभाग ने ग्राम पंचायतों, नगर पालिका परिषदों और नगर निगम से अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने की अपील की है।
स्थानीय स्तर पर प्रचार के माध्यम से पशुपालकों को टीकाकरण की तारीख, टीमों की उपलब्धता और अभियान के उद्देश्य की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा, सामूहिक रूप से पशुओं का टीकाकरण कराने के लिए भी लोगों को प्रेरित किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि यदि सभी पात्र पशुओं का समयबद्ध तरीके से टीकाकरण हो जाता है, तो बीमारी के प्रसार को रोकने में काफी मदद मिल सकती है।
अभियान के शुभारंभ पर अधिकारी रहे मौजूद
विशेष टीकाकरण अभियान के शुभारंभ के अवसर पर अपर निदेशक ग्रेड-2, कानपुर मंडल, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराग सिंह, संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी और टीकाकरण दलों के सदस्य उपस्थित रहे।
अधिकारियों ने टीमों को अभियान के दौरान निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही, पशुपालकों के साथ समन्वय बनाकर अधिक से अधिक पशुओं का टीकाकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
कानपुर नगर में शुरू हुआ यह विशेष अभियान 8 सितंबर तक चलेगा। विभाग का लक्ष्य है कि जिले के 5.26 लाख से अधिक पात्र पशुओं को टीकाकरण का लाभ मिले। इसके लिए 36 टीमें लगातार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में काम करेंगी।
कुल मिलाकर, खुरपका-मुंहपका जैसी संक्रामक बीमारी से पशुओं की सुरक्षा के लिए टीकाकरण को सबसे महत्वपूर्ण उपाय माना जा रहा है। इसलिए पशुपालकों की सक्रिय भागीदारी अभियान की सफलता में अहम भूमिका निभाएगी। विभाग ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने पशुओं का समय से टीकाकरण कराएं, बिना टैग वाले पशुओं की टैगिंग कराएं और पशु स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या की जानकारी नजदीकी पशु चिकित्सा विभाग को दें।

