कानपुर देहात में जनगणना-2027 के दूसरे चरण का प्रशिक्षण शुरू, डीएम कपिल सिंह ने दिए जरूरी निर्देश

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रिपोर्ट – विशाल मिश्रा 

कानपुर देहात: भारत की जनगणना-2027 के द्वितीय चरण के तहत जनसंख्या गणना के लिए नियुक्त प्रगणकों और सुपरवाइजरों का प्रशिक्षण कार्यक्रम 22 अक्टूबर को प्रभात इंजीनियरिंग कॉलेज, बारा, अकबरपुर में शुरू हुआ। जिलाधिकारी कपिल सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने जनगणना को महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व बताते हुए कहा कि शुद्ध और विश्वसनीय आंकड़े देश की विकास योजनाओं तथा जनकल्याणकारी नीतियों का आधार होते हैं।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जनगणना में लगे सभी कार्मिक पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। साथ ही, प्रत्येक परिवार और व्यक्ति की जानकारी का सही संकलन सुनिश्चित किया जाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार या व्यक्ति गणना से छूटने न पाए।

जनगणना के आंकड़े विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण

कार्यक्रम में जिलाधिकारी कपिल सिंह ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े एकत्र करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि देश की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय स्थिति को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके आधार पर शासन की नीतियों, जनकल्याणकारी योजनाओं, संसाधनों के वितरण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से संबंधित निर्णय लेने में मदद मिलती है।

उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि वे प्रशिक्षण के प्रत्येक बिंदु को गंभीरता से समझें। घर-घर जाकर नागरिकों से विनम्रता के साथ संवाद करें और आवश्यक जानकारी प्राप्त करते समय उनकी निजता, गरिमा तथा भावनाओं का सम्मान करें।

इसके अलावा, जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति, परिवार या समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार नहीं होना चाहिए। नागरिकों से प्राप्त जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना भी आवश्यक है। इसका उपयोग निर्धारित जनगणना संबंधी उद्देश्यों के लिए ही किया जाना चाहिए।

मोबाइल एप्लीकेशन और आंकड़ों के सत्यापन पर जोर

जिलाधिकारी ने प्रगणकों और सुपरवाइजरों को निर्देश दिया कि निर्धारित प्रपत्र सावधानीपूर्वक भरें और मोबाइल एप्लीकेशन में जानकारी दर्ज करते समय प्रत्येक प्रविष्टि का सत्यापन करें। यदि किसी प्रकार की त्रुटि या समस्या सामने आती है, तो तत्काल सुपरवाइजर अथवा संबंधित अधिकारी से मार्गदर्शन प्राप्त करें।

उन्होंने कहा कि जनगणना कार्य में समयसीमा का पालन, आंकड़ों की शुद्धता और तकनीकी व्यवस्थाओं का सही उपयोग सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। वहीं, बुजुर्गों, दिव्यांग व्यक्तियों, प्रवासी परिवारों और अन्य संवेदनशील परिस्थितियों में रहने वाले नागरिकों से जानकारी प्राप्त करते समय विशेष धैर्य और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।

सीडीओ विधान जायसवाल ने प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने की अपील की

मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल ने कहा कि जनगणना जैसे व्यापक राष्ट्रीय कार्य की सफलता मैदानी स्तर पर काम करने वाले प्रगणकों और सुपरवाइजरों की दक्षता, अनुशासन और सटीकता पर निर्भर करती है।

उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से अपील की कि वे प्रशिक्षण को केवल औपचारिकता न समझें, बल्कि सभी प्रक्रियाओं को अच्छी तरह सीखें। यदि किसी विषय पर कोई शंका है, तो उसका समाधान प्रशिक्षण के दौरान ही कर लें।

सीडीओ ने यह भी निर्देश दिया कि प्रत्येक प्रगणक अपने आवंटित क्षेत्र का पूर्व भ्रमण करे। इससे आवासीय क्षेत्रों, संस्थानों, दूरस्थ बस्तियों और संभावित कठिनाइयों की जानकारी पहले से मिल सकेगी। इसके साथ ही सुपरवाइजरों को अपने अधीनस्थ कार्मिकों के संपर्क में रहने, कार्य की नियमित समीक्षा करने और समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया।

एडीएम ने बताया जनगणना का प्रशासनिक महत्व

अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) दुष्यंत कुमार मौर्य ने कहा कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े देश की सामाजिक, आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भौगोलिक स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने बताया कि इन आंकड़ों का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आधारभूत सुविधाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्राथमिकताएं निर्धारित करने में किया जाता है। इसलिए प्रत्येक घर और परिवार का समुचित समावेशन आवश्यक है।

उन्होंने प्रगणकों को निर्देश दिया कि किसी भी जानकारी को अनुमान के आधार पर दर्ज न करें। सभी कार्मिक निर्धारित दिशा-निर्देशों, प्रशिक्षण पुस्तिका और तकनीकी प्रोटोकॉल का पालन करें। साथ ही, नागरिकों के सवालों और आशंकाओं का शांतिपूर्वक तथा तथ्यात्मक तरीके से समाधान करें, जिससे जनगणना प्रक्रिया के प्रति विश्वास मजबूत हो सके।

14 बैचों में होगा प्रशिक्षण, जानें जनगणना की तारीखें

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, जनगणना-2027 के द्वितीय चरण के लिए प्रशिक्षण 22 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 तक कुल 14 बैचों में आयोजित किया जाएगा। प्रत्येक बैच में 200 प्रगणकों और सुपरवाइजरों को प्रशिक्षण दिए जाने का कार्यक्रम है।

जनगणना से जुड़ी महत्वपूर्ण तारीखें इस प्रकार हैं:

  • प्रशिक्षण कार्यक्रम: 22 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 तक।
  • स्व-गणना: 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक।
  • जनसंख्या गणना: 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक।

प्रशिक्षण के दौरान कार्मिकों को क्षेत्रवार कार्य विभाजन, मकान सूचीकरण, परिवारों की पहचान, निर्धारित प्रपत्र भरने, मोबाइल एप्लीकेशन के संचालन और डिजिटल आंकड़ों के सत्यापन की जानकारी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त, स्व-गणना और जनसंख्या गणना के विभिन्न चरणों को भी समझाया जा रहा है।

मास्टर ट्रेनर व्यावहारिक उदाहरणों, प्रश्नोत्तर सत्रों और तकनीकी अभ्यास के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों की समझ विकसित कर रहे हैं। साथ ही, बंद या खाली मकानों, किरायेदारों, प्रवासी परिवारों और दूरस्थ क्षेत्रों में गणना से जुड़ी संभावित चुनौतियों पर भी चर्चा की जा रही है।

प्रशिक्षण व्यवस्था की नियमित निगरानी के निर्देश

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षण कार्यक्रम की नियमित निगरानी करने और सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से पूरी करने के निर्देश दिए। इनमें प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति, बैठने की व्यवस्था, तकनीकी संसाधन, प्रशिक्षण सामग्री, पेयजल, प्रकाश और अन्य जरूरी सुविधाएं शामिल हैं।

इसके अलावा, प्रशिक्षण की प्रगति का रिकॉर्ड रखने, कार्मिकों की शंकाओं का समाधान करने और अधिकारियों तथा मैदानी कर्मचारियों के बीच प्रभावी संचार व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल, अपर जिलाधिकारी दुष्यंत कुमार मौर्य, उपजिलाधिकारी अकबरपुर, तहसीलदार अकबरपुर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, मास्टर ट्रेनर, प्रगणक और सुपरवाइजर मौजूद रहे।

प्रशिक्षण सत्र में नोडल मास्टर ट्रेनर वर्तिका गुप्ता तथा फील्ड ट्रेनर मनीष दीक्षित, अतुल श्रीवास्तव, रविंद्र सिंह, विराट पाठक, मनोज कुमार, सुजीत साहू, मोहित कुमार, राहुल सहित अन्य प्रशिक्षक अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

राष्ट्रीय दायित्व को जिम्मेदारी से पूरा करने की अपील

कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने सभी प्रगणकों और सुपरवाइजरों से जनगणना को राष्ट्रीय सेवा का महत्वपूर्ण अवसर मानकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि निष्पक्षता, पारदर्शिता, नागरिकों के सम्मान और आंकड़ों की शुद्धता के साथ कार्य करने से जनगणना-2027 को व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाया जा सकेगा।

इस प्रकार, कानपुर देहात में शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी जनसंख्या गणना की तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब प्रशिक्षित कार्मिकों की जिम्मेदारी होगी कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए जनगणना कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करें।

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