मेरठ में दरोगा पर 4.50 लाख रुपये की रिश्वत का आरोप, डीआईजी के निर्देश पर जांच तेज – पढ़िए जरूर

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रिपोर्ट – मनीष पाराशर 

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस विभाग से जुड़ा कथित रिश्वतखोरी का मामला सामने आने के बाद महकमे में हलचल तेज हो गई है। लिसाड़ी गेट थाने में तैनात एक दरोगा पर 4.50 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह रकम सीधे संबंधित पुलिसकर्मी को देने के बजाय ऑनलाइन माध्यम से मेरठ ट्रैवलर्स के मालिक शादाब राव के बैंक खाते में ट्रांसफर कराई गई थी। हालांकि, इस मामले में रिश्वत के आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मामले की शिकायत पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) कलानिधि नैथानी तक पहुंचने के बाद अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी। इसके तहत एसपी सिटी विनायक भौंसले और सीओ कोतवाली संग्राम सिंह ने लिसाड़ी गेट थाने पहुंचकर मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की। वहीं, ऑनलाइन लेनदेन से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए मेरठ ट्रैवलर्स के संचालक से भी पूछताछ की गई।

डीआईजी तक पहुंची शिकायत, अधिकारियों ने शुरू की जांच

मिली जानकारी के अनुसार, एक शिकायतकर्ता ने डीआईजी कलानिधि नैथानी से मुलाकात कर लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि लिसाड़ी गेट थाने में तैनात एक दरोगा ने कथित तौर पर सांठगांठ करके उससे 4.50 लाख रुपये लिए। शिकायतकर्ता के मुताबिक, यह रकम मेरठ ट्रैवलर्स के मालिक शादाब राव के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कराई गई थी।

शिकायत सामने आने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। इसके बाद जांच के निर्देश दिए गए, ताकि आरोपों की सत्यता का पता लगाया जा सके। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संबंधित बैंक खाते में रकम किस उद्देश्य से भेजी गई और क्या इस लेनदेन का आरोपी दरोगा से कोई संबंध है।

हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से साक्ष्य उपलब्ध हैं। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं होगा।

एसपी सिटी और सीओ कोतवाली पहुंचे लिसाड़ी गेट थाना

डीआईजी के निर्देश के बाद एसपी सिटी विनायक भौंसले और सीओ कोतवाली संग्राम सिंह पुलिस बल के साथ अचानक लिसाड़ी गेट थाने पहुंचे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने थाने में करीब छह घंटे तक रुककर मामले से संबंधित तथ्यों की जांच की।

इस दौरान शिकायत में बताए गए घटनाक्रम, कथित लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को समझने का प्रयास किया गया। अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश की कि शिकायतकर्ता की ओर से बताई गई धनराशि किन परिस्थितियों में ट्रांसफर की गई थी।

इसके अलावा, ऑनलाइन लेनदेन और उससे संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल पर भी ध्यान दिया गया। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि रकम का हस्तांतरण किसी सामान्य कारोबारी लेनदेन का हिस्सा था या उसका संबंध शिकायत में लगाए गए आरोपों से है।

मेरठ ट्रैवलर्स के मालिक से करीब दो घंटे पूछताछ

जांच के सिलसिले में सीओ कोतवाली संग्राम सिंह मेरठ ट्रैवलर्स के प्रतिष्ठान पहुंचे। वहां उन्होंने संचालक शादाब राव से करीब दो घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान बैंक खाते में हुए ऑनलाइन ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेजों, बैंक स्टेटमेंट और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई गई।

पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने लेनदेन की परिस्थितियों और उससे जुड़े तथ्यों को समझने का प्रयास किया। जांच में बैंक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि इनके माध्यम से रकम के हस्तांतरण की तारीख, धनराशि और संबंधित खातों की जानकारी का सत्यापन किया जा सकता है।

हालांकि, पूछताछ किए जाने का अर्थ अपने आप में किसी व्यक्ति की संलिप्तता साबित होना नहीं है। मामले में शादाब राव की भूमिका और कथित रिश्वत से किसी भी संभावित संबंध का निर्धारण जांच के निष्कर्षों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

सीओ कोतवाली ने की पूछताछ की पुष्टि

मामले को लेकर सीओ कोतवाली संग्राम सिंह ने बताया कि ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े प्रकरण में शादाब राव से पूछताछ की गई है। इस दौरान कुछ जरूरी रिकॉर्ड भी खंगाले गए हैं।

वहीं, जब उनसे यह पूछा गया कि क्या जांच में भ्रष्टाचार से जुड़े पुख्ता साक्ष्य मिले हैं, तो उन्होंने फिलहाल कोई अंतिम निष्कर्ष देने से परहेज किया। उनका कहना था कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

इससे संकेत मिलता है कि पुलिस अभी उपलब्ध दस्तावेजों और बयानों का मिलान कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य होंगे अहम

इस मामले में कथित ऑनलाइन लेनदेन की जांच सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन विवरण, संबंधित व्यक्तियों के बयान और अन्य डिजिटल साक्ष्य यह स्पष्ट करने में मदद कर सकते हैं कि रकम किस परिस्थिति में और किस उद्देश्य से ट्रांसफर की गई थी।

इसके साथ ही, शिकायतकर्ता के आरोपों का उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का आकलन करके नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

दूसरी ओर, यदि आरोपों की पुष्टि करने वाले पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते हैं, तो जांच के निष्कर्ष उसी के अनुरूप निर्धारित होंगे। फिलहाल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

जांच रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी आगे की कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, एसपी सिटी विनायक भौंसले जांच के दौरान सामने आए तथ्यों, बयानों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर डीआईजी को सौंपेंगे। इसके बाद रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सकता है।

यदि जांच में संबंधित दरोगा के खिलाफ रिश्वत लेने के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर उसके संबंध में भी साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

फिलहाल मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने से जुड़े इस कथित रिश्वत प्रकरण में जांच जारी है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि 4.50 लाख रुपये के कथित लेनदेन के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं।

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