संतकबीरनगर: तरयापार विद्यालय में साइबर जागरूकता कार्यक्रम, छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को बताए ऑनलाइन ठगी से बचाव के तरीके
रिपोर्ट -शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी
संतकबीरनगर, 22 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में साइबर अपराधों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से पुलिस की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार को पूर्व माध्यमिक कम्पोजिट विद्यालय तरयापार, नाथनगर, महुली में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं और शिक्षकगण को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों, ऑनलाइन ठगी से बचने के उपायों तथा शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
यह कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर श्री संदीप कुमार मीना के निर्देशन में साइबर क्राइम थाना जनपद संतकबीरनगर की टीम द्वारा आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना तथा उन्हें साइबर अपराधियों की चालों से बचने के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना था।
साइबर अपराधों के प्रति जागरूक हुए छात्र-छात्राएं
कार्यक्रम में पुलिस टीम ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को बताया कि वर्तमान समय में इंटरनेट, स्मार्टफोन और ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। पढ़ाई से लेकर बैंकिंग, खरीदारी और विभिन्न सरकारी सेवाओं तक डिजिटल माध्यमों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हालांकि, इन सुविधाओं के साथ साइबर अपराध का खतरा भी बढ़ा है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति के लिए डिजिटल सुरक्षा के नियमों को समझना और उनका पालन करना जरूरी है।
पुलिसकर्मियों ने बताया कि साइबर अपराधी अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाने का प्रयास करते हैं। कई बार वे फोन कॉल, संदेश, फर्जी लिंक या अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए लोगों से व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन ठगी के मामलों में लोगों को भ्रमित करके उनसे आर्थिक नुकसान भी कराया जा सकता है।
इसलिए विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि वे इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहें और किसी भी अनजान व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। विशेष रूप से ऑनलाइन मिलने वाले आकर्षक प्रस्तावों और संदिग्ध संदेशों की सत्यता जांचे बिना उन पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।
निजी जानकारी साझा करने से बचने की दी सलाह
साइबर जागरूकता कार्यक्रम के दौरान पुलिस टीम ने डिजिटल माध्यमों पर व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के महत्व को भी समझाया। विद्यार्थियों और शिक्षकों को बताया गया कि अपनी गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखना साइबर अपराध से बचाव का एक महत्वपूर्ण उपाय है।
पुलिस ने लोगों को सलाह दी कि वे अपना ओटीपी, बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी, एटीएम या कार्ड का पिन तथा पासवर्ड किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या किसी अन्य प्रतिष्ठित संस्था का प्रतिनिधि बनकर फोन करता है और गोपनीय जानकारी मांगता है, तो पहले उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए।
इसके साथ ही किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध वेबसाइट पर जानकारी भरने और बिना जांच-पड़ताल के मोबाइल में कोई ऐप डाउनलोड करने से भी बचना चाहिए। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय भी सावधानी बरतना जरूरी है। विद्यार्थियों को अपनी निजी तस्वीरें, संपर्क विवरण और अन्य संवेदनशील जानकारियां सार्वजनिक रूप से साझा करने से पहले संभावित जोखिमों पर विचार करना चाहिए।
साइबर ठगी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें शिकायत
कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने के सही माध्यमों की जानकारी देना भी था। पुलिस टीम ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे घबराने के बजाय तुरंत उचित कदम उठाने चाहिए।
साइबर अपराध से संबंधित वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, पीड़ित व्यक्ति भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करा सकता है।
पुलिस ने समझाया कि ऐसी घटनाओं में जल्द शिकायत करना महत्वपूर्ण है। इसलिए ठगी की जानकारी मिलते ही संबंधित बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को सूचित करने के साथ साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करना चाहिए। शिकायत से संबंधित संदेश, लेन-देन का विवरण, संदिग्ध मोबाइल नंबर और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने से भी शिकायत की जांच में मदद मिल सकती है।
हालांकि, किसी भी शिकायत के संबंध में कार्रवाई तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाती है। इसलिए पीड़ित को सही जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए और आवश्यक सहयोग देना चाहिए।
विद्यार्थियों के लिए डिजिटल सुरक्षा का महत्व
विद्यालयों में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बच्चे और किशोर कम उम्र से ही मोबाइल फोन, इंटरनेट तथा सोशल मीडिया का उपयोग करने लगे हैं। ऐसे में उन्हें डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के तरीके बताना जरूरी है।
यदि विद्यार्थियों को शुरुआत से ही मजबूत पासवर्ड बनाने, संदिग्ध लिंक पहचानने, निजी जानकारी सुरक्षित रखने और ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायत करने के बारे में जानकारी दी जाए, तो वे भविष्य में अधिक जिम्मेदारी के साथ इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसी तरह, शिक्षक भी विद्यार्थियों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विद्यालय में इस तरह के कार्यक्रमों से बच्चों को न केवल साइबर अपराधों के बारे में जानकारी मिलती है, बल्कि किसी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर सहायता प्राप्त करने का तरीका भी समझ में आता है।
पुलिस टीम ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
पूर्व माध्यमिक कम्पोजिट विद्यालय तरयापार, नाथनगर, महुली में आयोजित इस कार्यक्रम में साइबर क्राइम थाना संतकबीरनगर की पुलिस टीम ने सहभागिता की। कार्यक्रम में उपनिरीक्षक रमेश यादव, मुख्य आरक्षी अमृता सिंह और आरक्षी धीरेन्द्र कुमार शामिल रहे।
पुलिस टीम ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकगण को साइबर अपराधों के विभिन्न तरीकों, उनसे बचाव के उपायों और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। साथ ही, किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि के प्रति सतर्क रहने और साइबर अपराध होने पर तत्काल शिकायत करने का संदेश दिया।
कुल मिलाकर, विद्यालय में आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम डिजिटल सुरक्षा के प्रति विद्यार्थियों और शिक्षकों को सजग बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना, गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखना और साइबर ठगी होने पर तुरंत शिकायत करना ही डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के प्रमुख उपाय हैं।

