लखीमपुर खीरी: सरकारी स्कूल की किताबें कबाड़ी को बेचने का वीडियो वायरल, शिक्षा विभाग पर उठे सवाल
रिपोर्ट: शरद अवस्थी
विद्यालय के कमरे में किताबें तौलता दिखाई दिया कबाड़ी
जानकारी के अनुसार, उच्च प्राथमिक विद्यालय रंगीला नगर में सरकारी पुस्तकों को कबाड़ी के हाथों बेचे जाने का आरोप लगाया जा रहा है। सामने आए वीडियो में विद्यालय के कमरे के अंदर एक व्यक्ति तराजू और बाट के साथ किताबों को तौलता नजर आ रहा है। इस दृश्य ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की शिक्षा के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली पुस्तकों के रखरखाव और उनके उचित इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की पढ़ाई को सुचारु बनाने के उद्देश्य से पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। इन पुस्तकों का मकसद बच्चों को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा प्राप्त करने में मदद करना है। ऐसे में यदि विद्यालय में मौजूद सरकारी किताबों को नियमों के विपरीत कबाड़ी को बेचा गया है, तो यह जांच का विषय है।
हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रही पुस्तकों की वास्तविक स्थिति, उनकी संख्या, उन्हें कबाड़ी तक पहुंचाने की परिस्थितियों और बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह निर्धारित किया जा सकेगा कि पुस्तकों को किस उद्देश्य से तौला जा रहा था और क्या किसी नियम का उल्लंघन हुआ है।
बच्चों की पढ़ाई के लिए आई किताबें कबाड़ी तक कैसे पहुंचीं?
इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि विद्यालय में रखी गई सरकारी पुस्तकों को कबाड़ी के पास ले जाने की नौबत क्यों आई। क्या ये किताबें पुरानी या अनुपयोगी घोषित की गई थीं? क्या इनका नियमानुसार निस्तारण किया जा रहा था? या फिर पुस्तकों को बेचने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया?
इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है। यदि पुस्तकें पुरानी, क्षतिग्रस्त अथवा अनुपयोगी थीं, तो उनके निस्तारण से जुड़े नियमों और अभिलेखों की जांच की जानी चाहिए। वहीं, यदि पढ़ाई के योग्य पुस्तकों को बिना अनुमति बेचने का प्रयास किया गया है, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसके अलावा, यह भी पता लगाया जाना आवश्यक है कि विद्यालय में उपलब्ध पुस्तकों का स्टॉक रजिस्टर क्या कहता है और किताबों के वितरण तथा निस्तारण से संबंधित रिकॉर्ड में क्या दर्ज है। इन दस्तावेजों के आधार पर मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
पहले पलिया ब्लॉक में भी सामने आया था मामला
लखीमपुर खीरी जिले में सरकारी किताबों से जुड़ा यह मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि इससे पहले पलिया ब्लॉक में भी इसी तरह का मामला सामने आने की बात कही गई थी। ऐसे में रंगीला नगर विद्यालय से जुड़ा ताजा प्रकरण सामने आने के बाद सरकारी विद्यालयों में पुस्तकों के प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, दोनों मामलों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, लगातार ऐसे आरोप सामने आने पर शिक्षा विभाग के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह संबंधित विद्यालयों के रिकॉर्ड की जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई गई शैक्षणिक सामग्री का उचित उपयोग हो रहा है।
यदि जांच में एक से अधिक विद्यालयों में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो विभाग को व्यापक स्तर पर पुस्तकों के भंडारण, वितरण और निस्तारण की व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। इससे भविष्य में ऐसी शिकायतों को रोकने में मदद मिल सकती है।
शिक्षा विभाग की जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
वीडियो सामने आने के बाद अब शिक्षा विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। विभागीय अधिकारियों को मामले का संज्ञान लेकर विद्यालय में उपलब्ध पुस्तकों के रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित पुस्तकों को किसकी अनुमति से तौला जा रहा था और क्या इस प्रक्रिया के लिए कोई आधिकारिक आदेश जारी किया गया था।
इसके अतिरिक्त, विद्यालय के जिम्मेदार कर्मचारियों से जानकारी लेकर वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि की परिस्थितियों का सत्यापन किया जाना चाहिए। यदि पुस्तकों के निस्तारण में निर्धारित नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
दूसरी ओर, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। पारदर्शी जांच के जरिए तथ्यों को सामने लाना और उसके आधार पर निर्णय लेना ही इस मामले में उचित कदम होगा।
सरकारी किताबों की सुरक्षा और जवाबदेही जरूरी
सरकारी विद्यालयों में उपलब्ध कराई जाने वाली पाठ्यपुस्तकें विद्यार्थियों की शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए इनका सही समय पर वितरण, उचित रखरखाव और नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित करना विद्यालय प्रशासन तथा संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।
यदि किसी विद्यालय में पुस्तकें अनुपयोगी हो जाती हैं, तो उनके निस्तारण की प्रक्रिया भी निर्धारित नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। वहीं, पढ़ाई के योग्य पुस्तकों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के बजाय कहीं और भेजे जाने की शिकायत मिलने पर उसकी गंभीरता से जांच की जानी चाहिए।
फिलहाल, उच्च प्राथमिक विद्यालय रंगीला नगर का वीडियो सामने आने के बाद मामले में कई सवाल अनुत्तरित हैं। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस प्रकरण की जांच कब शुरू करता है, पुस्तकों के संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

