बस्ती के पास श्मशान घाट निर्माण का विरोध, जमीन पर स्थापित है हनुमान जी की मूर्ति; ग्रामीणों ने SDM से लगाई गुहार

WhatsApp Image 2026-10-22 at 3.38.04 PM

रिपोर्ट –  शुभम साहू

घाटमपुर:  कानपुर नगर के साढ़ थाना क्षेत्र के तिवारीपुर गांव में प्रस्तावित श्मशान घाट के निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने बस्ती के पास श्मशान घाट बनाए जाने पर आपत्ति जताते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस 16 बिस्वा ग्राम समाज की जमीन पर श्मशान घाट बनाने का प्रयास किया जा रहा है, वहां हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है और स्थानीय लोग नियमित रूप से पूजा-पाठ करते हैं। ऐसे में इस स्थान पर श्मशान घाट का निर्माण कराना धार्मिक आस्था और ग्रामीणों की सुविधाओं से जुड़ा विषय बन गया है।

इस संबंध में ग्रामीण जय नारायण पुत्र सिद्धगोपाल ने उपजिलाधिकारी (SDM) नर्वल को प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच कराने और निर्माण के लिए वैकल्पिक स्थान निर्धारित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि गांव में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो और सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान किया जा सके।

हनुमान जी की मूर्ति वाले स्थल को लेकर ग्रामीणों की आपत्ति

ग्रामीणों के अनुसार, तिवारीपुर गांव में जिस जमीन पर श्मशान घाट बनाने की योजना है, वहां हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। इस स्थान पर ग्रामीण पूजा-अर्चना करते हैं और इसे अपनी धार्मिक आस्था से जुड़ा स्थल मानते हैं। ऐसे में यहां श्मशान घाट का निर्माण प्रस्तावित किए जाने से लोगों में असंतोष है।

ग्रामीण जय नारायण ने एसडीएम नर्वल को दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा है कि बस्ती के नजदीक और पूजा स्थल के पास श्मशान घाट बनाना उचित नहीं होगा। उनका तर्क है कि इससे धार्मिक गतिविधियों में बाधा उत्पन्न हो सकती है। साथ ही, आसपास रहने वाले लोगों को भी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि, इस मामले में प्रशासन का पक्ष और निर्माण की आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है। इसलिए ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर उठाए गए सवालों की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।

गांव से दूर नदी की तरफ निर्माण कराने की मांग

ग्रामीणों ने श्मशान घाट के निर्माण का विरोध करते हुए इसे किसी उपयुक्त वैकल्पिक स्थान पर बनाए जाने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि गांव से दूर नदी की तरफ पर्याप्त जमीन उपलब्ध है, जहां श्मशान घाट का निर्माण कराया जा सकता है।

ग्रामीणों के मुताबिक, यदि निर्माण के लिए ऐसा स्थान चुना जाता है, जो बस्ती और पूजा स्थल से पर्याप्त दूरी पर हो, तो स्थानीय लोगों को होने वाली संभावित परेशानियों को कम किया जा सकता है। इसके अलावा, उचित स्थान के चयन से गांव में आपसी मतभेद और विवाद की आशंका भी कम होगी।

इसी आधार पर ग्रामीणों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि निर्माण स्थल का दोबारा निरीक्षण कराया जाए। उनका कहना है कि किसी भी सार्वजनिक सुविधा का निर्माण करते समय स्थानीय परिस्थितियों, उपलब्ध भूमि, आबादी की स्थिति और लोगों की आपत्तियों पर विचार करना जरूरी है।

आपत्तियों के बावजूद निर्माण के प्रयास का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उनकी आपत्तियों के बावजूद संबंधित जमीन पर श्मशान घाट के निर्माण का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस मामले में उनकी बात सुने बिना आगे बढ़ना उचित नहीं है। हालांकि, निर्माण कार्य से संबंधित इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन मौके पर राजस्व और संबंधित विभागों की टीम भेजकर जमीन की स्थिति का आकलन कराए। इसके साथ ही, यह भी जांच की जाए कि ग्राम समाज की जमीन का निर्धारित उपयोग क्या है और प्रस्तावित निर्माण के लिए स्थान का चयन किन आधारों पर किया गया है।

यदि जांच के दौरान वैकल्पिक स्थान उपयुक्त पाया जाता है, तो ग्रामीण चाहते हैं कि श्मशान घाट का निर्माण नदी की तरफ कराया जाए। वहीं, हनुमान जी की मूर्ति वाले स्थान को पूजा स्थल के रूप में सुरक्षित रखने की मांग भी उठाई गई है।

SDM नर्वल से निष्पक्ष जांच की गुहार

इस पूरे मामले में ग्रामीणों ने एसडीएम नर्वल से हस्तक्षेप कर उचित निर्णय लेने की अपील की है। प्रार्थना पत्र के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि मौके पर जांच कराई जाए और सभी संबंधित पक्षों की बात सुनने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे सार्वजनिक आवश्यकता भी पूरी हो और धार्मिक आस्था से जुड़े स्थल का सम्मान भी बना रहे। इसके लिए जमीन के अभिलेखों की जांच, मौके का निरीक्षण और स्थानीय लोगों की आपत्तियों पर विचार करना महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल, तिवारीपुर गांव में प्रस्तावित श्मशान घाट को लेकर ग्रामीणों की आपत्ति और वैकल्पिक स्थान की मांग सामने आई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन शिकायत पर क्या कदम उठाता है और निर्माण स्थल को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।

You may have missed