तरगांव-मोमिनपुर रोड पर हरे आम के पेड़ों की कटाई से उठे सवाल, जांच में जुटा वन विभाग

WhatsApp Image 2026-10-22 at 3.56.17 PM

रिपोर्टर – शुभम साहू

घाटमपुर : तरगांव से मोमिनपुर जाने वाले मार्ग पर खेत के किनारे खड़े हरे आम के पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। पेड़ों की कटाई की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। इस घटना के बाद क्षेत्र में वन विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, अभी तक पेड़ों की कटाई अवैध होने या किसी व्यक्ति की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

तरगांव-मोमिनपुर मार्ग पर पेड़ों की कटाई का मामला

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, तरगांव से मोमिनपुर जाने वाले मार्ग पर खेत के किनारे खड़े हरे आम के पेड़ों को काटे जाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि पेड़ों की कटाई की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित विभाग को इसकी सूचना दी गई। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और परिस्थितियों का जायजा लिया।

मामले में मुख्य रूप से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पेड़ों की कटाई किन परिस्थितियों में की गई। साथ ही, खेत के मालिक और कटाई में शामिल लोगों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। इसके अतिरिक्त, यह भी जांच का विषय है कि पेड़ों को काटने के लिए नियमानुसार अनुमति ली गई थी या नहीं।

यदि पेड़ों की कटाई बिना आवश्यक अनुमति के की गई है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई का सवाल उठ सकता है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी।

वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

हरे पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि क्षेत्र में पेड़ों की सुरक्षा के लिए नियमित निगरानी और समय पर कार्रवाई जरूरी है। उनका कहना है कि यदि पेड़ों की कटाई जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नजर नहीं रखी गई, तो पर्यावरण संरक्षण के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।

दरअसल, पेड़ पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे वायु की गुणवत्ता बनाए रखने, स्थानीय जैव विविधता को सहारा देने और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में हरे पेड़ों की कटाई से जुड़े मामलों की गंभीरता से जांच करना आवश्यक है।

हालांकि, किसी भी मामले में केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं है। इसलिए जरूरी है कि संबंधित विभाग सभी तथ्यों की जांच करे और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करे।

ग्रामीणों ने प्रभावी निगरानी की उठाई जरूरत

इस घटना को लेकर ग्रामीणों के बीच नाराजगी की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में हरे पेड़ों की कटाई पर नियंत्रण रखने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, पेड़ों की कटाई से संबंधित नियमों और अनुमति की प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

ग्रामीणों की चिंता केवल आम के पेड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर भी है। उनका मानना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों की पड़ताल की जाए, तो पेड़ों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है।

वहीं, इस मामले में वन विभाग की टीम जांच-पड़ताल में जुटी हुई है। जांच के दौरान पेड़ों की संख्या, उनकी कटाई की परिस्थितियों और संबंधित अनुमति से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई जानी है। इन तथ्यों के आधार पर ही यह निर्धारित किया जा सकेगा कि नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

फिलहाल, तरगांव-मोमिनपुर मार्ग पर हरे आम के पेड़ों की कटाई से जुड़े मामले में वन विभाग की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभागीय जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पेड़ों की कटाई किसके निर्देश पर हुई, इसके पीछे क्या कारण थे और क्या इसके लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई थी।

इसके साथ ही, यह भी देखना होगा कि यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी या अवैध कटाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अब क्षेत्र के लोगों की नजर वन विभाग की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

You may have missed