कानपुर में घाव भरने की प्रक्रिया में प्रतिरक्षा कोशिकाओं की भूमिका पर शैक्षणिक सेमिनार आयोजित

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रिपोर्ट- सुहैल अंसारी

कानपुर। दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर के जंतु विज्ञान विभाग की ओर से ए.एन.डी. कॉलेज, कानपुर के सहयोग से घाव भरने की प्रक्रिया में प्रतिरक्षा कोशिकाओं की भूमिका विषय पर शैक्षणिक सेमिनार का आयोजन किया गया। दोनों संस्थानों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को प्रतिरक्षा विज्ञान, ऊतक पुनर्जनन और आधुनिक जैविक अनुसंधान के नवीन पहलुओं से परिचित कराना था। सेमिनार में विशेषज्ञों ने घाव भरने की प्राकृतिक प्रक्रिया में प्रतिरक्षा कोशिकाओं के महत्व को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया।

दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता प्रो. राकेश कुमार माझी, Department of Biosciences and Bioengineering, IIT Kanpur, दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज की प्राचार्या प्रो. वंदना निगम, निदेशक प्रो. अर्चना वर्मा और ए.एन.डी. कॉलेज की प्रभारी प्रो. संगीता अवस्थी सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित करके किया। इसके बाद माँ सरस्वती की वंदना के साथ शैक्षणिक कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई।

इस अवसर पर जंतु विज्ञान विभाग की प्रभारी प्रो. अंजली श्रीवास्तव, मुख्य प्रॉक्टर, आईक्यूएसी समन्वयक, नैक समन्वयक, कार्यालय अधीक्षक तथा अन्य शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग और शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने की भावना भी प्रमुख रूप से दिखाई दी।

वैज्ञानिक सोच विकसित करने में सहायक हैं ऐसे आयोजन

सेमिनार के प्रारंभ में दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज की प्राचार्या प्रो. वंदना निगम ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य वक्ता और उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ-साथ अनुसंधान के प्रति रुचि बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को विषय की व्यावहारिक समझ प्रदान करना और उनमें नए प्रश्नों के उत्तर तलाशने की जिज्ञासा विकसित करना भी है। इसलिए विशेषज्ञों के व्याख्यान विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त ज्ञान से आगे बढ़कर आधुनिक शोध की दिशा समझने का अवसर देते हैं।

इसी क्रम में महाविद्यालय की निदेशक प्रो. अर्चना वर्मा ने भी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल और शैक्षणिक क्षमता के विकास में अकादमिक गतिविधियों के महत्व को रेखांकित किया। उनके अनुसार, विशेषज्ञों के साथ संवाद और विषय आधारित सेमिनार विद्यार्थियों को नवीन वैज्ञानिक अवधारणाओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं।

घाव भरने में न्यूट्रोफिल और मैक्रोफेज की अहम भूमिका

जंतु विज्ञान विभाग की प्रभारी प्रो. अंजली श्रीवास्तव ने सेमिनार की विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए बताया कि घाव भरना शरीर की एक जटिल जैविक प्रक्रिया है। इसमें प्रतिरक्षा तंत्र की सक्रिय भागीदारी होती है। प्रतिरक्षा कोशिकाएँ न केवल संक्रमण से बचाव करती हैं, बल्कि क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत और उनके पुनर्निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इसके बाद मुख्य वक्ता प्रो. राकेश कुमार माझी ने विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि न्यूट्रोफिल और मैक्रोफेज जैसी प्रतिरक्षा कोशिकाएँ घाव भरने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। न्यूट्रोफिल संक्रमण के खिलाफ शुरुआती सुरक्षा प्रदान करने में मदद करते हैं। वहीं, मैक्रोफेज क्षतिग्रस्त कोशिकाओं और अवशेषों को हटाने, सूजन को नियंत्रित करने तथा ऊतकों की मरम्मत से जुड़ी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में सहायक होते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि घाव भरने की प्रक्रिया केवल त्वचा या अन्य ऊतकों के बाहरी रूप से जुड़ जाने तक सीमित नहीं होती। इसके बजाय, इसमें कई जैविक प्रक्रियाएँ एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर काम करती हैं। प्रतिरक्षा कोशिकाओं की उचित सक्रियता और उनके कार्यों का संतुलन ऊतकों की मरम्मत के लिए आवश्यक होता है।

प्रो. माझी ने प्रतिरक्षा तंत्र और ऊतक पुनर्जनन के बीच संबंधों को समझाते हुए इस विषय की चिकित्सा विज्ञान तथा आधुनिक जैविक अनुसंधान में उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला। उनका व्याख्यान छात्राओं के लिए ज्ञानवर्धक रहा। इससे उन्हें प्रतिरक्षा कोशिकाओं के कार्यों और घाव भरने की प्रक्रिया के वैज्ञानिक आधार को समझने का अवसर मिला।

आधुनिक जैविक अनुसंधान से परिचित हुईं छात्राएं

सेमिनार का प्रमुख उद्देश्य छात्राओं को प्रतिरक्षा विज्ञान और आधुनिक जैविक अनुसंधान के नवीन पहलुओं से परिचित कराना था। इसके साथ ही उनमें वैज्ञानिक जिज्ञासा, तार्किक चिंतन और शोधपरक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना भी कार्यक्रम की प्राथमिकताओं में शामिल रहा।

विषय विशेषज्ञ द्वारा सरल और वैज्ञानिक तरीके से दी गई जानकारी ने छात्राओं को शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली और ऊतक मरम्मत की प्रक्रियाओं को समझने में सहायता प्रदान की। साथ ही, इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को भविष्य में उच्च शिक्षा, शोध और जैविक विज्ञान से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

कार्यक्रम में लगभग 80 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। इसके अतिरिक्त महाविद्यालय की सभी प्रवक्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। दोनों संस्थानों के शिक्षकों की सहभागिता ने इस शैक्षणिक आयोजन को उपयोगी और सहयोगात्मक स्वरूप प्रदान किया।

शिक्षकों और कर्मचारियों का रहा महत्वपूर्ण योगदान

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. कंचन मित्तल ने किया। वहीं, आयोजन सचिव डॉ. शालिनी शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य वक्ता, अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

सेमिनार के सफल आयोजन में कार्यालय अधीक्षक श्री कृष्णेंद्र कुमार का विशेष योगदान रहा। इसके अलावा दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज के जंतु विज्ञान विभाग की प्रो. सुनीता आर्या, डॉ. अमिता श्रीवास्तव, डॉ. इशिता पांडे और डॉ. रचना सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ए.एन.डी. कॉलेज की प्रभारी प्रो. संगीता अवस्थी तथा वहां के समस्त प्रवक्ताओं का भी सहयोग रहा। विभाग के शिक्षणोत्तर कर्मचारियों ने भी आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।

 

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