बदायूं में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे बड़े सवाल, एंबुलेंस नहीं मिलने पर मरीज को ठेली पर ले जाने का वीडियो हो रहा वायरल – जरूर पढ़ें
रिपोर्ट – विपिन यादव
बदायूं: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। थाना कोतवाली क्षेत्र के शहबाजपुर में एक मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों को कथित तौर पर ठेली का सहारा लेना पड़ा। आरोप है कि 108 एंबुलेंस सेवा पर कई बार फोन करने के बावजूद एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची। इसके बाद मजबूर परिजन मरीज को ठेली पर लादकर जिला अस्पताल ले गए।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने की बात सामने आई है। वीडियो को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, एंबुलेंस को फोन किए जाने, उसके मौके पर नहीं पहुंचने और घटना की परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
बदायूं में मरीज को ठेली पर अस्पताल ले जाने का मामला
जानकारी के अनुसार, शहबाजपुर इलाके में एक मरीज को उपचार की आवश्यकता थी। परिजनों ने मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क करने का प्रयास किया। आरोप है कि कई बार कॉल करने के बाद भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। ऐसे में मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों ने ठेली का इंतजाम किया और उसी पर मरीज को लादकर जिला अस्पताल की ओर रवाना हो गए।
आमतौर पर आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सेवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में यह सुविधा मरीजों के लिए समय पर उपचार पाने का प्रमुख माध्यम होती है। ऐसे में यदि किसी जरूरतमंद को एंबुलेंस नहीं मिलती है, तो उसे वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ सकता है। शहबाजपुर की बताई जा रही इस घटना ने इसी व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से उठे सवाल
घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने की बात कही जा रही है। वीडियो सामने आने के बाद लोग स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति को लेकर सवाल उठा रहे हैं। चर्चा का मुख्य विषय यह है कि यदि मरीज के परिजनों ने वास्तव में कई बार 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया था, तो उन्हें समय पर सहायता क्यों नहीं मिल सकी।
हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के आधार पर घटना के सभी पहलुओं को स्वतः प्रमाणित नहीं माना जा सकता। यह जानना भी जरूरी है कि कॉल किस समय किए गए, एंबुलेंस सेवा को सूचना मिली या नहीं, संबंधित क्षेत्र में उस समय वाहन उपलब्ध था या नहीं और मरीज को अस्पताल पहुंचाने में कितनी देर हुई। इन तथ्यों की पुष्टि होने के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों के बीच व्यवस्था पर सवाल
सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा आपातकालीन सेवाओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया जाता रहा है। इसके बावजूद, यदि किसी मरीज को एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिलती और परिजनों को उसे ठेली पर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।
दरअसल, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य जरूरत के समय मरीज तक जल्द सहायता पहुंचाना है। ऐसे मामलों में केवल एंबुलेंस सेवा का संचालन पर्याप्त नहीं होता, बल्कि कॉल रिसीव करने, मरीज की स्थिति समझने, नजदीकी उपलब्ध वाहन की जानकारी लेने और समय पर उसे संबंधित स्थान पर भेजने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है।
इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों और घनी आबादी वाले इलाकों में एंबुलेंस की उपलब्धता, वाहनों की तैनाती और कॉल पर प्रतिक्रिया की निगरानी भी आवश्यक है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही होती है, तो उसका असर सीधे मरीज और उसके परिवार पर पड़ सकता है। इसलिए ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी मानी जाती है।
108 एंबुलेंस सेवा की भूमिका और जवाबदेही
108 एंबुलेंस सेवा आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए संचालित की जाती है। सड़क दुर्घटना, अचानक तबीयत बिगड़ने या अन्य चिकित्सकीय आपात स्थितियों में यह सेवा लोगों के लिए मददगार साबित हो सकती है। ऐसे में किसी मरीज के परिजनों की ओर से बार-बार कॉल करने के बावजूद एंबुलेंस नहीं मिलने का आरोप गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
इस मामले में संबंधित अधिकारियों के लिए यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि घटना के समय शहबाजपुर क्षेत्र में एंबुलेंस की उपलब्धता क्या थी। साथ ही, यदि कॉल रिकॉर्ड मौजूद हैं, तो उनकी जांच करके यह पता लगाया जा सकता है कि कॉल कब किए गए और उन पर क्या कार्रवाई हुई। यदि सेवा में किसी प्रकार की कमी या लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करने के साथ आवश्यक सुधार भी किए जाने चाहिए।
हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी अधिकारी या कर्मचारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि एंबुलेंस सेवा में देरी हुई, वाहन उपलब्ध नहीं था या मामला किसी अन्य कारण से जुड़ा था।
स्वास्थ्य विभाग से जांच और जवाब की अपेक्षा
बदायूं के शहबाजपुर में सामने आए इस मामले ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर एक अहम सवाल खड़ा किया है। मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों को कथित तौर पर ठेली का सहारा लेना पड़ा, जबकि उन्होंने 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क करने का प्रयास किया था।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वास्थ्य विभाग और एंबुलेंस सेवा से जुड़े जिम्मेदार अधिकारी मामले का संज्ञान लेते हैं या नहीं। घटना की परिस्थितियों, एंबुलेंस कॉल के रिकॉर्ड और संबंधित क्षेत्र में वाहन की उपलब्धता की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
निष्कर्षतः, मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए इस घटना की निष्पक्ष जांच, तथ्यों की पुष्टि और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक कदम उठाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी मरीज और उसके परिजनों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

