अधिवक्ताओं की सुरक्षा और कल्याण को लेकर जिला बार एसोसिएशन ने उठाई आवाज
रिपोर्ट – राम चन्द्र सैनी
फतेहपुर: जिले में अधिवक्ताओं की सुरक्षा, अधिकारों और कल्याण से जुड़ी मांगों को लेकर जिला बार एसोसिएशन ने आवाज बुलंद की है। एसोसिएशन की ओर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपकर अधिवक्ताओं की समस्याओं के समाधान की मांग की गई। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगों पर शासन स्तर से शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने तक अधिवक्ता प्रत्येक बुधवार को हड़ताल पर रहेंगे। इस घोषणा के बाद अधिवक्ताओं की सुरक्षा और उनकी अन्य मांगें एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं।
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बाबू सिंह यादव और महामंत्री अनुराग नारायण मिश्र के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने यह ज्ञापन सौंपा। यह कदम प्रांतीय आह्वान और एसोसिएशन की आम सभा में लिए गए निर्णय के अनुसार उठाया गया। अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में विरोध दर्ज कराते हुए शासन से आवश्यक कदम उठाने की अपील की।
अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू करने की मांग
ज्ञापन में अधिवक्ताओं की सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। बार एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश में जल्द से जल्द अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू करने की मांग की। एसोसिएशन का कहना है कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन सुरक्षित वातावरण में करने का अवसर मिलना चाहिए।
अधिवक्ताओं के अनुसार, सुरक्षा से संबंधित प्रभावी कानूनी व्यवस्था होने से उनके अधिकारों की रक्षा करने में मदद मिलेगी। इसलिए राज्य सरकार को इस दिशा में गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। ज्ञापन में अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा पर भी जोर दिया गया।
कल्याण राशि पांच लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की मांग
जिला बार एसोसिएशन ने अधिवक्ता कल्याण से जुड़ी आर्थिक सहायता में वृद्धि की मांग भी उठाई। ज्ञापन के मुताबिक, वर्तमान में निर्धारित पांच लाख रुपये की कल्याण राशि को बढ़ाकर 25 लाख रुपये किया जाना चाहिए। एसोसिएशन का मानना है कि अधिवक्ताओं और उनके परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए कल्याणकारी सहायता को अधिक प्रभावी बनाया जाना आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त, नए अधिवक्ताओं के लिए प्रोत्साहन भत्ता उपलब्ध कराने की मांग की गई। एसोसिएशन ने कहा कि पेशे की शुरुआत करने वाले युवा अधिवक्ताओं को आर्थिक सहयोग मिलने से उन्हें अपने कार्य को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
वहीं, 70 वर्ष की आयु पूरी कर चुके अधिवक्ताओं के लिए मानक भत्ता उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई है। अधिवक्ताओं ने शासन से आग्रह किया कि अनुभवी और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर उचित निर्णय लिया जाए।
न्यायिक परिसरों में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था पर जोर
अधिवक्ताओं ने न्यायिक परिसरों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग भी रखी। ज्ञापन में कहा गया है कि न्यायालयों में कार्यरत अधिवक्ताओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए उनके बैठने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
इसके लिए न्यायिक परिसरों में नए निर्माण और मौजूदा भवनों के पुनर्निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया गया। एसोसिएशन ने मांग की कि इन कार्यों के लिए प्रांतीय बजट में विशेष प्रावधान किया जाए, ताकि अधिवक्ताओं को कामकाज के दौरान आवश्यक सुविधाएं मिल सकें।
दरअसल, न्यायिक परिसरों में पर्याप्त स्थान और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होना अधिवक्ताओं के साथ-साथ न्यायालय आने वाले वादकारियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में इन व्यवस्थाओं में सुधार से न्यायिक कार्यों के संचालन को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है।
अधिवक्ता अधिनियम में संशोधन से पहले विचार-विमर्श की मांग
ज्ञापन में अधिवक्ता अधिनियम में प्रस्तावित किसी भी संशोधन को लेकर भी अपनी बात रखी गई। जिला बार एसोसिएशन ने मांग की कि अधिवक्ता अधिनियम में किसी प्रकार का बदलाव करने से पहले अधिवक्ता संघों से विचार-विमर्श किया जाए।
एसोसिएशन का कहना है कि अधिवक्ताओं से जुड़े कानूनों में बदलाव करते समय संबंधित संगठनों के सुझावों और व्यावहारिक अनुभवों को महत्व दिया जाना चाहिए। इससे कानून में संशोधन की प्रक्रिया में संबंधित पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
न्यायिक क्षेत्राधिकार को लेकर भी उठाया मुद्दा
अधिवक्ताओं ने यू.पी. एक्ट 16 सन् 2021 से संबंधित न्यायिक क्षेत्राधिकार के मुद्दे को भी ज्ञापन में शामिल किया। एसोसिएशन ने मांग की कि संबंधित प्रावधान के तहत न्यायिक क्षेत्राधिकार को प्रशासनिक न्यायालय से वापस लेकर पूर्व व्यवस्था के अनुसार दीवानी न्यायालय में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
इस मांग के माध्यम से अधिवक्ताओं ने न्यायिक व्यवस्था से जुड़े अधिकार क्षेत्र के विषय पर अपनी आपत्ति और अपेक्षाएं शासन के सामने रखीं। अब इस संबंध में शासन स्तर पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर संबंधित अधिवक्ताओं की नजर रहेगी।
वरिष्ठ पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर शामिल
मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला बार एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और अन्य अधिवक्ताओं की सहभागिता रही। ज्ञापन पर सतीश शर्मा, छाया देवी, अविनाश कुमार सिंह, गणेश प्रसाद तिवारी, सुनील कुमार गुप्ता, हंसराज सिंह, अमित सिंह, वागीश कुमार श्रीवास्तव और शिव प्रकाश मिश्रा सहित दर्जनों अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर शामिल रहे।
अधिवक्ताओं ने शासन से मांग की कि सुरक्षा, कल्याण राशि, युवा अधिवक्ताओं को आर्थिक सहायता, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के भत्ते और न्यायिक परिसरों में सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर जल्द कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मांगों पर कार्रवाई नहीं होने तक प्रत्येक बुधवार हड़ताल
जिला बार एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर प्रत्येक बुधवार को हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी है। एसोसिएशन के अनुसार, मांगों के समाधान के लिए शासन स्तर पर त्वरित कार्रवाई आवश्यक है। अब आगे की स्थिति शासन की प्रतिक्रिया और मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
अधिवक्ताओं की ओर से उठाए गए इन मुद्दों में सुरक्षा, आर्थिक सहायता और न्यायिक बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। ऐसे में संबंधित मांगों पर निर्णय होने से अधिवक्ताओं के कार्यक्षेत्र और कल्याण से जुड़ी व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, जिला बार एसोसिएशन ने अपनी मांगें शासन तक पहुंचा दी हैं और उनके समाधान की अपेक्षा जताई है।

