धाता में मां दुर्गा विसर्जन के दौरान उमड़ा जनसैलाब, जयकारों से गूंजा पूरा क्षेत्र
रिपोर्ट- अशोक सिंह
धाता, फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद के धाता विकासखंड क्षेत्र में शारदीय नवरात्रि के समापन के बाद मंगलवार को मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ किया गया। इस अवसर पर गांवों और कस्बों में निकाले गए विसर्जन जुलूसों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों की गूंज, माता रानी के जयकारों और भक्तिमय गीतों से पूरा क्षेत्र धर्ममय नजर आया। नौ दिनों तक चले नवरात्रि महोत्सव के समापन पर भक्तों ने नम आंखों से मां दुर्गा को विदाई दी और अगले वर्ष पुनः आगमन की प्रार्थना की।
नौ दिनों तक पंडालों में हुई पूजा-अर्चना और आरती
शारदीय नवरात्रि के अवसर पर धाता विकासखंड के विभिन्न गांवों और कस्बों में मां दुर्गा के आकर्षक पंडाल सजाए गए थे। नवरात्रि के पहले दिन से ही इन पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। प्रतिदिन सुबह और शाम विधि-विधान से पूजा-अर्चना, आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। इसके साथ ही कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से धार्मिक परंपराओं और आस्था का संदेश दिया गया।
पूरे नौ दिनों तक क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। भक्त परिवार के साथ माता रानी के दर्शन करने पहुंचे और सुख-समृद्धि, शांति तथा खुशहाली की कामना की। वहीं, पूजा समितियों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने नवरात्रि आयोजन को सफल बनाने में अपनी भागीदारी निभाई।
विसर्जन जुलूस में शामिल हुए बड़ी संख्या में श्रद्धालु
दशहरा के अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए विभिन्न गांवों और कस्बों में जुलूस निकाले गए। इस दौरान श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की धुन पर भक्ति गीत गाते हुए आगे बढ़े। मां दुर्गा के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। जुलूस में महिलाओं, पुरुषों और युवाओं के साथ अन्य श्रद्धालुओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विसर्जन यात्रा के दौरान जगह-जगह लोगों ने मां दुर्गा की प्रतिमाओं के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं के चेहरों पर जहां माता रानी के प्रति गहरी आस्था और उत्साह दिखाई दिया, वहीं विदाई के समय भावुकता भी देखने को मिली।
दरअसल, नवरात्रि के नौ दिन भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखते हैं। इन दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। ऐसे में प्रतिमा विसर्जन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भक्तों के लिए मां के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने और अगले वर्ष फिर से उनके आगमन की कामना करने का अवसर भी होता है।
नम आंखों से मां दुर्गा को दी विदाई
प्रतिमा विसर्जन के समय श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। भक्तों ने माता रानी से जीवन में सुख, शांति और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना की। साथ ही, अगले वर्ष नवरात्रि के अवसर पर फिर से मां दुर्गा की स्थापना कर पूजा-अर्चना करने का संकल्प व्यक्त किया।
नवरात्रि के दौरान पंडालों में बनी रौनक और भक्तिमय वातावरण के बाद विसर्जन के साथ ही क्षेत्र में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों का समापन हो गया। हालांकि, श्रद्धालुओं के मन में मां दुर्गा के प्रति आस्था और भक्ति का भाव बना रहा।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर कराया गया भू-विसर्जन
मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा को भी ध्यान में रखा गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रशासन की ओर से निर्धारित स्थानों पर विसर्जन की व्यवस्था की गई थी। चिन्हित स्थलों पर गड्ढे तैयार कराकर प्रतिमाओं का भू-विसर्जन कराया गया, ताकि पारंपरिक धार्मिक आयोजन के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी निभाई जा सके।
इसके अतिरिक्त, पुलिस और प्रशासन की निगरानी में विसर्जन की प्रक्रिया पूरी कराई गई। निर्धारित स्थलों पर विसर्जन की व्यवस्था का उद्देश्य धार्मिक आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराना और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं का ध्यान रखना था।
पर्यावरण के अनुकूल विसर्जन की व्यवस्था धार्मिक आयोजनों में स्वच्छता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व को भी रेखांकित करती है। ऐसे आयोजनों में श्रद्धालुओं की भागीदारी के साथ प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
भक्तिमय माहौल के बीच नवरात्रि महोत्सव का समापन
धाता क्षेत्र में मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ नौ दिनों तक चले शारदीय नवरात्रि महोत्सव का समापन हो गया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह, भक्ति और धार्मिक आस्था देखने को मिली। विसर्जन जुलूसों में उमड़ी भीड़ ने क्षेत्र में नवरात्रि के प्रति लोगों की गहरी श्रद्धा को दर्शाया।

