संतकबीरनगर में पंचायतों के विकास कार्यों में एक करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितता, 16 कर्मियों पर कार्रवाई

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रिपोर्ट- शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी

संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों के लिए आवंटित सरकारी धनराशि के उपयोग में वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। पंचायतीराज विभाग की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान जिले की 90 से अधिक ग्राम पंचायतों में एक करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय गड़बड़ी उजागर हुई है। इस मामले में जिलाधिकारी के निर्देश पर दो एडीओ समेत 14 पंचायत सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। संबंधित कर्मियों के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

विभागीय स्तर पर सामने आई इन अनियमितताओं के बाद पंचायतों में सरकारी धन के उपयोग और विकास कार्यों में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित कर्मियों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो नियमानुसार धनराशि की वसूली उनके वेतन से की जा सकती है।

राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि में गड़बड़ी

ग्राम पंचायतों को राज्य वित्त आयोग और केंद्रीय वित्त आयोग के माध्यम से विभिन्न विकास कार्यों के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। इस धन का इस्तेमाल गांवों में नाली निर्माण, खड़ंजा, सड़क, सामुदायिक शौचालय और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के विकास के लिए किया जाता है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए भी विभिन्न योजनाओं के तहत काम कराए जाते हैं।

हालांकि, संतकबीरनगर जिले में वर्ष 2016-17 के दौरान किए गए कार्यों और धनराशि के उपयोग से संबंधित ऑडिट में अनियमितताएं सामने आई हैं। इसके बाद पंचायतीराज विभाग ने संबंधित ग्राम पंचायतों और जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है।

गौरतलब है कि पंचायतों को मिलने वाली सरकारी धनराशि का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को गति देना और आम लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में धनराशि के उपयोग में गड़बड़ी सामने आने पर उसकी जांच और नियमानुसार वसूली की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कई ग्राम पंचायतों में हजारों से लाखों रुपये की वसूली का आदेश

ऑडिट में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में जिले के विभिन्न विकासखंडों की ग्राम पंचायतों से जुड़ी धनराशि की वसूली के आदेश जारी होने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, दुधारा ग्राम पंचायत में 45,380 रुपये, चोरहा में 44,980 रुपये, उपधी में 1,31,400 रुपये और कुसमैनी में 1,09,500 रुपये की वसूली का उल्लेख है।

इसी क्रम में गंगौर्ली में 21,900 रुपये तथा हड़हा में 97,766 रुपये की धनराशि की वसूली का आदेश जारी होने की जानकारी है। मेंहदावल विकासखंड की ग्राम पंचायत रक्सा में 80,168 रुपये, समदा में 35 हजार रुपये, डड़ियाकला में 85,862 रुपये और टड़वा में 16 हजार रुपये की वसूली का विवरण सामने आया है।

वहीं, चिर्कनियाडीह ग्राम पंचायत के संबंध में 2,40,900 रुपये और 86,808 रुपये की अलग-अलग धनराशियों का उल्लेख किया गया है। इन आंकड़ों के आधार पर संबंधित ग्राम पंचायतों में वित्तीय अभिलेखों और खर्च के विवरण की जांच का महत्व और बढ़ गया है।

बेलहरकला की ग्राम पंचायतों में बड़ी धनराशि का मामला

बेलहरकला विकासखंड की कुछ ग्राम पंचायतों में वसूली के लिए दर्ज धनराशि अपेक्षाकृत अधिक बताई गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, कुबड़िया ग्राम पंचायत में 7.72 लाख रुपये, बेलवा ठकुराई में 3.81 लाख रुपये, बरडांड़ पिपरी में 28.43 लाख रुपये और बूढ़ी बेलहर में 2,21,650 रुपये की वसूली का आदेश जारी होने की जानकारी है।

इसके अतिरिक्त हैंसर बाजार, पौली, बघौली, खलीलाबाद, नाथनगर और सांथा विकासखंड की ग्राम पंचायतों में भी वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित मामले सामने आए हैं।

हालांकि, इन अलग-अलग ग्राम पंचायतों में दर्ज वसूली की धनराशियों और पूरे जिले में बताई गई कुल अनियमितता के बीच विस्तृत मिलान का ब्योरा उपलब्ध नहीं है। इसलिए अंतिम वसूली की राशि और प्रत्येक मामले की स्थिति संबंधित विभागीय अभिलेखों तथा कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

दो एडीओ समेत 16 कर्मियों पर कार्रवाई की तैयारी

इस मामले में हैंसर बाजार ब्लॉक के एडीओ पंचायत आनंद मोहन और बेलहरकला की एडीओ-आरडी सुनीता मिश्रा समेत कुल 16 कर्मियों के खिलाफ वसूली संबंधी कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। इनमें 14 पंचायत सचिव शामिल हैं।

उपलब्ध विवरण में अश्वनी कुमार गौतम, आनंद कुमार, बब्लू निषाद, अवधेश अग्रहरि, अनिल सिंह, रजनी सिंह, अल्का पाण्डेय और पवन पाण्डेय समेत अन्य पंचायत सचिवों के नाम शामिल हैं।

प्रशासन की ओर से संबंधित कर्मियों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। ऐसे में आगे की कार्रवाई उनके जवाब, विभागीय जांच और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर की जाएगी। फिलहाल नोटिस जारी होने को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता; संबंधित कर्मियों का पक्ष और विभागीय प्रक्रिया पूरी होना भी महत्वपूर्ण है।

जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर वेतन से होगी वसूली

प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी अरुण कुमार के अनुसार, जिलाधिकारी के निर्देश पर संबंधित कर्मचारियों को पत्र जारी कर जवाब मांगा गया है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त मद में दुरुपयोग की गई धनराशि की नियमानुसार वसूली वेतन से की जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शासकीय कार्यों में वित्तीय अनियमितता को गंभीरता से लिया जाता है। इसलिए संबंधित कर्मियों से जवाब प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पंचायतों में वित्तीय पारदर्शिता पर प्रशासन की नजर

संतकबीरनगर में सामने आया यह मामला ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। सरकारी धनराशि का सही उपयोग सुनिश्चित करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा संबंध ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों से है।

 

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