बस्ती पहुंचे कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर, प्रदर्शन और पंचायत चुनाव पर दिया बड़ा बयान

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रिपोर्ट – राकेश गिरि

बस्ती : उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर मंगलवार को बस्ती पहुंचे। यहां उन्होंने तेलियाजोत स्थित भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी की माता की श्रद्धांजलि सभा में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर मीडिया से बातचीत की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के प्रदर्शन को लेकर दिए गए बयान, पंचायत चुनाव और दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों पर राजभर ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल करते समय कानून और व्यवस्था का ध्यान रखना भी आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक प्रदर्शन को अराजकता की श्रेणी में रखना उचित नहीं है। हालांकि, यदि किसी आंदोलन की आड़ में अव्यवस्था फैलाने या कानून का उल्लंघन करने की कोशिश की जाती है, तो उसे सही नहीं ठहराया जा सकता।

प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा, लेकिन कानून का पालन जरूरी

बस्ती में मीडिया से बातचीत के दौरान ओम प्रकाश राजभर ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस विचार का समर्थन किया, जिसमें हर प्रदर्शन को अराजकता नहीं मानने की बात कही गई थी। राजभर के अनुसार, लोकतंत्र में लोगों को अपनी समस्याएं रखने, मांगों को उठाने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार प्राप्त है।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध-प्रदर्शन के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाई जा सकती है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों को संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। किसी भी आंदोलन का उद्देश्य समस्याओं का समाधान तलाशना होना चाहिए, न कि ऐसी परिस्थितियां पैदा करना जिनसे आम नागरिकों को परेशानी हो।

मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अराजक गतिविधियों के बीच अंतर समझना आवश्यक है। उनके मुताबिक, जब तक आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सामने रखता है, तब तक उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। वहीं, कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों को उचित नहीं माना जा सकता।

पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट के निर्देशों का दिया हवाला

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पंचायत चुनाव के संबंध में हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन किया गया है और पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन भी किया गया है।

राजभर के इस बयान को पंचायत चुनाव से जुड़े प्रशासनिक और संवैधानिक पहलुओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पंचायत चुनाव में आरक्षण और पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व जैसे विषयों पर आयोग की भूमिका अहम होती है। ऐसे में सरकार की ओर से न्यायालय के निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

हालांकि, चुनाव की तारीखों, आरक्षण की अंतिम स्थिति और अन्य प्रक्रियागत निर्णयों को लेकर मंत्री ने इस बातचीत में कोई विस्तृत समय-सारिणी नहीं बताई। इसलिए चुनाव से संबंधित आगे की स्थिति के लिए सरकार और संबंधित निर्वाचन प्राधिकरण की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

दिल्ली के विरोध-प्रदर्शनों पर भी बोले राजभर

दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के संबंध में प्रतिक्रिया देते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि शुरुआत में जब छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, तब तक स्थिति सामान्य थी। लेकिन, उनके अनुसार, जब प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और चुनाव आयोग से इस्तीफे की मांग उठने लगी, तो आंदोलन ने राजनीतिक रूप लेना शुरू कर दिया।

राजभर ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों की ओर से देश को बांग्लादेश बनाने जैसी बातें कही जा रही हैं। उन्होंने ऐसे बयानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन किसी भी राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन को देश की व्यवस्था के प्रति जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

मंत्री ने प्रदर्शनकारियों पर देश विरोधी भाषण देने और अराजकता फैलाने का आरोप भी लगाया। हालांकि, ये आरोप उनके द्वारा मीडिया से बातचीत के दौरान व्यक्त किए गए विचार हैं। संबंधित प्रदर्शनों के आयोजकों या अन्य पक्षों की प्रतिक्रिया इस बातचीत में सामने नहीं आई।

संविधान और कानून को बताया सर्वोपरि

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां संविधान और कानून सर्वोपरि हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और देश के प्रति प्रेम की भावना पर जोर देते हुए कहा कि राष्ट्र की मजबूती और सुरक्षा सभी नागरिकों के हित में है।

उन्होंने कहा कि देश की व्यवस्था संविधान के आधार पर चलती है और कानून के सामने सभी को निर्धारित नियमों का पालन करना चाहिए। उनके मुताबिक, कोई भी व्यक्ति कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के दायरे में रहकर ही काम करना चाहिए।

राजभर ने यह भी कहा कि देश में शांति, सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी बात कहने का अवसर मिलता है, लेकिन इसके साथ ही सार्वजनिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान भी जरूरी है।

राजनीतिक मुद्दों पर बयान से चर्चा तेज

बस्ती दौरे के दौरान कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर की टिप्पणियों ने प्रदर्शन, पंचायत चुनाव और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया। एक ओर उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लोकतंत्र का हिस्सा बताया, वहीं दूसरी ओर आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका पर चिंता जताई।

पंचायत चुनाव को लेकर उन्होंने सरकार की कार्रवाई को न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप बताया। वहीं, दिल्ली के विरोध-प्रदर्शनों पर उनकी टिप्पणी राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रही।

कुल मिलाकर, राजभर ने अपने बयान में लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ संवैधानिक मर्यादाओं और कानून के पालन पर जोर दिया। बस्ती में मीडिया से हुई इस बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता से जुड़े विषयों पर जिम्मेदारी के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए।