अमेठी में किसानों की छह सूत्रीय मांगों को लेकर भाकियू अराजनैतिक का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
रिपोर्ट – अंजनी मिश्रा
अमेठी। किसानों की समस्याओं, खेती की बढ़ती लागत और फसलों के उचित मूल्य की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने शुक्रवार को अमेठी तहसील परिसर में प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों ने किसानों के हितों से जुड़ी छह सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए उपजिलाधिकारी पंकज मिश्रा के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजा। इसमें गेहूं और गन्ने का लाभकारी मूल्य निर्धारित करने, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने और खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं।
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के जिलाध्यक्ष हरीश उर्फ चुन्नू सिंह की ओर से सौंपे गए मांगपत्र में कहा गया कि किसानों को खेती के दौरान लगातार बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा है। डीजल, खाद, बीज, सिंचाई और कृषि मजदूरी पर होने वाला खर्च बढ़ने से खेती करना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना आवश्यक है, ताकि वे अपनी लागत निकालने के साथ परिवार की जरूरतों को भी पूरा कर सकें।
गेहूं का समर्थन मूल्य 5,000 रुपये करने की मांग
किसानों की आय और कृषि लागत को ध्यान में रखते हुए भाकियू अराजनैतिक ने गेहूं का समर्थन मूल्य पांच हजार रुपये निर्धारित करने की मांग की। संगठन का कहना है कि खेती में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इसलिए फसलों के मूल्य निर्धारण में उत्पादन लागत और किसानों की आर्थिक स्थिति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इसके साथ ही यूनियन ने गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने की मांग भी उठाई। संगठन के अनुसार, गन्ना उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना जरूरी है। इससे किसानों को आर्थिक राहत मिलने के साथ कृषि कार्यों को जारी रखने में भी मदद मिलेगी। यूनियन ने सरकार से इन मांगों पर गंभीरता से विचार कर किसानों के हित में आवश्यक कदम उठाने की अपील की।
प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग
ज्ञापन में बेमौसम बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने बताया कि धान, मक्का, मूंग सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने से किसानों की आमदनी प्रभावित होती है। ऐसे में प्रभावित किसानों की स्थिति का आकलन करने के लिए संबंधित क्षेत्रों में सर्वे कराया जाना चाहिए।
भाकियू अराजनैतिक ने मांग की कि फसल क्षति का निष्पक्ष सर्वे कराकर पात्र किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। इससे नुकसान झेल रहे किसानों को आर्थिक सहायता मिल सकेगी और वे अगली फसल की तैयारी कर पाएंगे। संगठन ने प्रशासन से यह सुनिश्चित करने की अपील की कि राहत का लाभ वास्तविक रूप से प्रभावित किसानों तक पहुंचे।
गुणवत्तापूर्ण बीज और आलू के उचित मूल्य की मांग
किसानों की समस्याओं में बीज की गुणवत्ता और फसलों के बाजार मूल्य को भी शामिल किया गया। यूनियन ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने की मांग की। संगठन के मुताबिक, खेती में अच्छे बीजों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज नहीं मिलते हैं, तो उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसलिए कृषि विभाग और संबंधित एजेंसियों के माध्यम से बीज की उपलब्धता तथा गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा आलू उत्पादक किसानों की समस्याओं को उठाते हुए आलू का उचित मूल्य निर्धारित करने की मांग की गई। संगठन ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए। यदि बाजार में आलू की कीमतों में गिरावट के कारण किसानों को उचित दाम नहीं मिलते हैं, तो जरूरत के अनुसार सरकारी खरीद की व्यवस्था शुरू की जानी चाहिए। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में सहायता मिल सकती है और उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी।
बटाईदार किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने की मांग
ज्ञापन में बटाई और मौखिक समझौते के आधार पर खेती करने वाले किसानों की समस्याओं को भी उठाया गया। संगठन ने मांग की कि ऐसे किसानों को भी पात्रता के अनुसार सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। कई किसान दूसरे की जमीन पर बटाई या आपसी मौखिक समझौते के तहत खेती करते हैं। ऐसे में भूमि के स्वामित्व से जुड़ी औपचारिकताओं के कारण उन्हें सरकारी सहायता प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
यूनियन ने सरकार से इस विषय पर उचित व्यवस्था बनाने की मांग की, ताकि वास्तविक रूप से खेती करने वाले पात्र किसानों को योजनाओं से वंचित न रहना पड़े। संगठन के अनुसार, कृषि से जुड़े निर्णयों और सहायता योजनाओं में उन किसानों की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है, जो स्वयं जमीन के मालिक नहीं हैं, लेकिन खेती की लागत और जोखिम उठाते हैं।
यूरिया-डीएपी की उपलब्धता और कालाबाजारी पर रोक
किसानों को खाद की उपलब्धता से जुड़ी परेशानियों को देखते हुए भाकियू अराजनैतिक ने यूरिया और डीएपी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की। संगठन ने कहा कि खेती के विभिन्न चरणों में खाद की जरूरत होती है। ऐसे में किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध नहीं होने से कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
इसके साथ ही यूनियन ने खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने की मांग की। संगठन का कहना है कि किसानों को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। संबंधित अधिकारियों को आपूर्ति व्यवस्था पर नजर रखते हुए अनियमितताओं की शिकायतों पर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि किसानों को खाद के लिए परेशान न होना पड़े।
मुख्यमंत्री से किसानों की समस्याओं के समाधान की अपील
अमेठी तहसील परिसर में प्रदर्शन के दौरान भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने किसानों से जुड़ी इन छह प्रमुख मांगों को सरकार तक पहुंचाया। उपजिलाधिकारी पंकज मिश्रा के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए ज्ञापन में संगठन ने मांगों पर गंभीरता से विचार करने और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की अपील की।
किसानों के लिए उचित समर्थन मूल्य, फसल नुकसान पर मुआवजा, गुणवत्तापूर्ण बीज, आलू की सरकारी खरीद की जरूरत, बटाईदारों को योजनाओं का लाभ तथा खाद की पर्याप्त उपलब्धता जैसे मुद्दे कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। अब इन मांगों पर सरकार और संबंधित विभागों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर किसानों की नजर रहेगी।

