अमेठी के भावलपुर मौहरिया में विशाल नेत्र शिविर, 225 मरीजों की जांच; 18 में मिले मोतियाबिंद के लक्षण
रिपोर्ट – अंजनी मिश्रा
अमेठी। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के संग्रामपुर ब्लॉक अंतर्गत भावलपुर मौहरिया गांव में जरूरतमंद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशाल नेत्र शिविर का आयोजन किया गया। सती महारानी जनकल्याण समिति के तत्वावधान में अमेठी आई हॉस्पिटल के सहयोग से आयोजित इस शिविर में कुल 225 मरीजों की आंखों की जांच की गई। इस दौरान चिकित्सकों ने मरीजों को आवश्यक परामर्श और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया। वहीं, जांच के दौरान 18 मरीजों में मोतियाबिंद के लक्षण पाए गए, जिन्हें आगे की जांच और ऑपरेशन के लिए अमेठी आई हॉस्पिटल रेफर किया गया।
ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर से उन लोगों को लाभ मिला, जिन्हें आंखों की जांच और उपचार के लिए दूर जाना पड़ता है। शिविर का उद्देश्य लोगों को समय पर नेत्र संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक करना और जरूरतमंद मरीजों को उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में मदद करना रहा।
225 मरीजों की आंखों की जांच, 18 मरीजों को किया गया रेफर
भावलपुर मौहरिया गांव में आयोजित नेत्र शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पहुंचकर अपनी आंखों की जांच कराई। चिकित्सकीय टीम ने मरीजों की आंखों की स्थिति का परीक्षण किया और जरूरत के अनुसार उन्हें परामर्श दिया। साथ ही, जिन मरीजों को प्राथमिक उपचार की आवश्यकता थी, उन्हें आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
शिविर के दौरान 18 मरीजों में मोतियाबिंद के लक्षण सामने आने की जानकारी दी गई। ऐसे मरीजों को बेहतर उपचार और आगे की चिकित्सकीय प्रक्रिया के लिए अमेठी आई हॉस्पिटल भेजने की सलाह दी गई। हालांकि, मोतियाबिंद की पुष्टि और ऑपरेशन का निर्णय विस्तृत चिकित्सकीय जांच के बाद ही किया जाएगा।
गौरतलब है कि आंखों से जुड़ी समस्याओं की समय पर पहचान करना बेहद महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से बुजुर्गों और उन लोगों के लिए नियमित नेत्र जांच उपयोगी होती है, जिन्हें धुंधला दिखाई देने, पढ़ने में परेशानी होने या दैनिक गतिविधियों में दिक्कत महसूस होती है। ऐसे में ग्रामीण स्तर पर आयोजित स्वास्थ्य शिविर लोगों को समय रहते चिकित्सकीय सलाह प्राप्त करने का अवसर देते हैं।
अनंत विक्रम सिंह और शांभवी सिंह रहे मौजूद
इस कार्यक्रम में सती महारानी जनकल्याण समिति की अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक महारानी गरिमा सिंह के पुत्र अनंत विक्रम सिंह और उनकी पत्नी शांभवी सिंह मौजूद रहे। दोनों ने शिविर की गतिविधियों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के प्रयास पर जोर दिया।
इस अवसर पर अनंत विक्रम सिंह ने कहा कि अमेठी उनकी जड़ों और संस्कारों की धरती है। यहां के लोगों के साथ उनका जुड़ाव हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि सती महारानी जनकल्याण समिति के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने और जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के महत्व पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, समाज के जरूरतमंद वर्ग तक सहायता पहुंचाना और लोगों को बुनियादी सुविधाओं का लाभ दिलाना जनकल्याण से जुड़े प्रयासों का अहम हिस्सा है।
शांभवी सिंह ने बताया जनसेवा का महत्व
शिविर के दौरान शांभवी सिंह ने जरूरतमंदों की सहायता और समय पर उपचार उपलब्ध कराने को जनसेवा का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर उपचार मिलना और उसके चेहरे पर राहत की मुस्कान आना ही जनसेवा की सच्ची सार्थकता है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए समाज के विभिन्न वर्गों को आगे आना चाहिए। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ऐसे लोगों के लिए चिकित्सा शिविर उपयोगी साबित हो सकते हैं, जिन्हें आर्थिक या अन्य कारणों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने में कठिनाई होती है।
इसके अलावा, इस प्रकार के आयोजन लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक होते हैं। समय पर जांच से आंखों से जुड़ी समस्याओं की पहचान की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों तक पहुंचाने में मदद मिलती है।
जनसमस्या समाधान गोष्ठी में उठे आवास, पेंशन और बिजली के मुद्दे
नेत्र शिविर के साथ ही जनसमस्या समाधान गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। इसमें ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा हुई। गोष्ठी के दौरान आवास, पेंशन और बिजली से संबंधित मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। संबंधित समस्याओं को समझते हुए उनके समाधान के लिए प्रयास करने पर जोर दिया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में आवास, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं आम नागरिकों के दैनिक जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं। इसलिए इन विषयों पर चर्चा के लिए आयोजित गोष्ठियां लोगों को अपनी समस्याएं सामने रखने का अवसर प्रदान करती हैं। हालांकि, समस्याओं के वास्तविक निस्तारण के लिए संबंधित विभागों तक शिकायत पहुंचाना और उनकी प्रगति पर नजर रखना भी आवश्यक होता है।
इस पहल के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ स्थानीय जनसमस्याओं पर भी ध्यान देने का प्रयास किया गया। इससे कार्यक्रम का दायरा केवल नेत्र जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीणों की दूसरी जरूरतों पर चर्चा का अवसर भी मिला।
क्षेत्र के गणमान्य लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में प्रधान प्रतिनिधि सुभाष कन्नौजिया सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। शिविर के आयोजन में स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी देखने को मिली। आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ना और जरूरतमंद मरीजों को आगे के उपचार के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध कराना रहा।
कुल मिलाकर, भावलपुर मौहरिया में आयोजित विशाल नेत्र शिविर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। 225 मरीजों की जांच और 18 मरीजों को मोतियाबिंद के संभावित लक्षणों के आधार पर रेफर किए जाने से समय पर नेत्र परीक्षण की उपयोगिता सामने आई। वहीं, जनसमस्या समाधान गोष्ठी के माध्यम से आवास, पेंशन और बिजली जैसे स्थानीय मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
ऐसे आयोजनों की निरंतरता से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद लोगों को उचित चिकित्सा परामर्श तक पहुंचाने में सहायता मिल सकती है। इसके लिए जरूरी है कि जांच के बाद रेफर किए गए मरीज आगे का उपचार भी समय पर प्राप्त करें और स्थानीय समस्याओं के समाधान के प्रयासों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाए।

