सोने-चांदी के निर्यातकों को झटका, सरकार ने घटाईं ड्यूटी ड्रॉबैक दरें; जानिए ताजा नई दरें
रिपोर्ट – अनुग्रह देवी
नई दिल्ली: सोने-चांदी के आभूषणों और चांदी से बनी कुछ वस्तुओं का निर्यात करने वाले कारोबारियों के लिए केंद्र सरकार ने ड्यूटी ड्रॉबैक की दरों में कटौती की है। वित्त मंत्रालय ने 15 अक्टूबर 2026 को अधिसूचना जारी कर तीन टैरिफ आइटम की दरों में संशोधन किया। इसके बाद सोने के आभूषणों पर मिलने वाला ड्यूटी ड्रॉबैक 1,851.99 से घटकर 1,794.11 प्रति ग्राम रह गया है। वहीं, चांदी के आभूषणों और चांदी की अन्य निर्धारित वस्तुओं के लिए दर 29,501.09 से घटाकर 26,859.02 प्रति किलोग्राम कर दी गई है।
इस बदलाव का सीधा असर संबंधित उत्पादों के पात्र निर्यातकों को मिलने वाले ड्यूटी ड्रॉबैक लाभ पर पड़ेगा। हालांकि, इसका वास्तविक आर्थिक प्रभाव निर्यातक के उत्पाद, लागत, कारोबार और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
तीन टैरिफ आइटम की दरों में संशोधन
वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की ओर से जारी अधिसूचना संख्या 85/2026-कस्टम्स (एनटी) के तहत ड्यूटी ड्रॉबैक की दरों में बदलाव किया गया है। संशोधन सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क ड्यूटी ड्रॉबैक नियम, 2017 के प्रावधानों के तहत किया गया है।
नई दरों का विवरण इस प्रकार है:
| उत्पाद | पुरानी दर | नई दर |
|---|---|---|
| सोने के आभूषण | 1,851.99 प्रति ग्राम | 1,794.11 प्रति ग्राम |
| चांदी के आभूषण | 29,501.09 प्रति किलोग्राम | 26,859.02 प्रति किलोग्राम |
| चांदी की अन्य निर्धारित वस्तुएं | 29,501.09 प्रति किलोग्राम | 26,859.02 प्रति किलोग्राम |
इस संशोधन के बाद सोने के आभूषणों की दर में 57.88 प्रति ग्राम की कमी हुई है। दूसरी ओर, चांदी के आभूषणों और संबंधित वस्तुओं की दर में 2,642.07 प्रति किलोग्राम की कटौती की गई है। प्रतिशत के लिहाज से सोने की दर में लगभग 3.1 प्रतिशत और चांदी की दरों में लगभग 9 प्रतिशत की कमी है।
क्या होता है ड्यूटी ड्रॉबैक?
ड्यूटी ड्रॉबैक निर्यात से जुड़ी एक व्यवस्था है, जिसके तहत पात्र निर्यातकों को निर्यात किए जाने वाले उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कुछ आयातित इनपुट पर चुकाए गए निर्धारित शुल्कों की वापसी मिल सकती है। इसका उद्देश्य निर्यात उत्पादों पर शुल्कों के बोझ को कम करना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने में मदद करना है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई कारोबारी निर्यात के लिए आभूषण तैयार करता है और उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले पात्र इनपुट पर निर्धारित शुल्क चुकाता है, तो लागू नियमों और दरों के अनुसार उसे ड्यूटी ड्रॉबैक मिल सकता है। हालांकि, इसकी पात्रता उत्पाद की श्रेणी, टैरिफ आइटम और संबंधित नियमों पर निर्भर करती है।
इसलिए ड्यूटी ड्रॉबैक की दर घटने का अर्थ यह है कि संबंधित श्रेणी में पात्र निर्यातक को निर्धारित दर के आधार पर पहले की तुलना में कम लाभ मिल सकता है। यह व्यवस्था सामान्य निर्यात प्रोत्साहन से जुड़ी है; इसे सीधे तौर पर आभूषणों पर लगने वाले निर्यात शुल्क में बढ़ोतरी समझना सही नहीं होगा।
जुलाई में बढ़ाई गई थीं दरें
इस बदलाव से पहले सरकार ने जुलाई 2026 में सोने-चांदी के आभूषणों और चांदी की कुछ वस्तुओं की ड्यूटी ड्रॉबैक दरों में बढ़ोतरी की थी। उस समय सोने के आभूषणों की दर 773.17 प्रति ग्राम से बढ़ाकर 1,851.99 प्रति ग्राम की गई थी। इसी तरह, चांदी के आभूषणों और संबंधित वस्तुओं की दर 14,990.66 प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 29,501.09 प्रति किलोग्राम की गई थी।
अब अक्टूबर में इन दरों को फिर संशोधित किया गया है। इससे स्पष्ट है कि संबंधित श्रेणियों में ड्यूटी ड्रॉबैक की दरों में इस वर्ष बदलाव हुए हैं। हालांकि, इन संशोधनों का अंतिम असर निर्यातकों पर कितना पड़ेगा, यह उनके कारोबार और लागू दरों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
निर्यातकों की लागत और लाभ पर क्या होगा असर?
ड्यूटी ड्रॉबैक की दरें घटने से सोने-चांदी के आभूषणों के पात्र निर्यातकों को पहले के मुकाबले कम शुल्क-वापसी मिल सकती है। ऐसे में कारोबारियों को अपनी लागत, मूल्य निर्धारण और निर्यात से होने वाले लाभ का दोबारा आकलन करना पड़ सकता है।
विशेष रूप से उन कारोबारियों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है, जिनके निर्यात कारोबार में सोने के आभूषण, चांदी के आभूषण या चांदी से बनी निर्धारित वस्तुओं की हिस्सेदारी अधिक है। फिर भी, किसी कारोबारी की वास्तविक लागत या लाभ पर कितना असर होगा, इसका अनुमान केवल नई दरों के आधार पर नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए उत्पादन लागत, कच्चे माल की कीमत, विदेशी खरीदारों के साथ तय मूल्य और अन्य खर्चों को भी ध्यान में रखना होगा।
अधिसूचना के बाद कारोबारियों की नजर नई दरों पर
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के बाद संबंधित निर्यातकों के लिए संशोधित दरों को समझना और अपने निर्यात दस्तावेजों में सही टैरिफ श्रेणी लागू करना महत्वपूर्ण होगा। कारोबारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनके उत्पाद संबंधित टैरिफ आइटम के अंतर्गत आते हैं और ड्यूटी ड्रॉबैक का दावा लागू नियमों के अनुरूप किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार ने सोने के आभूषणों, चांदी के आभूषणों और चांदी की अन्य निर्धारित वस्तुओं से जुड़े तीन टैरिफ आइटम की ड्यूटी ड्रॉबैक दरों में कटौती की है। इससे इन श्रेणियों के पात्र निर्यातकों को मिलने वाली शुल्क-वापसी कम होगी। अब कारोबारियों की नजर इस बात पर रहेगी कि संशोधित दरों का उनके निर्यात कारोबार, लागत और प्रतिस्पर्धात्मकता पर कितना प्रभाव पड़ता है।

