कानपुर में ‘हमारा बाज़ार सीजन-5’ का हुआ आयोजन, दिव्यांग विद्यार्थियों के हुनर को मिला मंच

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रिपोर्ट – हनुमंत सिंह 

कानपुर: दिव्यांग विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचान दिलाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कानपुर में ‘हमारा बाज़ार सीजन-5’ का आयोजन किया गया। ‘आशाएं, द स्पैस्टिक्स सेंटर’ की ओर से बाल भवन में 15 और 16 अक्टूबर को आयोजित इस वार्षिक कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। साथ ही, लोगों को दिव्यांगजनों की रचनात्मक क्षमता, मेहनत और हुनर से परिचित होने का अवसर मिला।

इस आयोजन में फिक्की फ्लो ने भी सहयोग किया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से दिव्यांग विद्यार्थियों को अपनी क्षमताएं प्रदर्शित करने, समाज से जुड़ने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देना भी था। बाजार में दिवाली से जुड़े उत्पादों के साथ-साथ दैनिक उपयोग और सजावट की कई वस्तुएं प्रदर्शित की गईं।

37 वर्षों से दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए काम कर रही संस्था

‘आशाएं, द स्पैस्टिक्स सेंटर’ पिछले 37 वर्षों से दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य कर रही है। संस्था की ओर से आयोजित ‘हमारा बाज़ार’ इसी प्रयास का हिस्सा है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता दिखाने और उनके बनाए उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।

कार्यक्रम का आयोजन डॉ. सुनील तनेजा, अध्यक्ष, और सुचित्रा सिंह, सचिव, की देखरेख में किया गया। विद्यार्थियों ने अपने वोकेशनल ट्रेनर्स और वॉलंटियर्स के सहयोग से विभिन्न उत्पाद तैयार किए। इन उत्पादों को बाजार में प्रदर्शित कर लोगों के सामने उनकी मेहनत और कौशल को प्रस्तुत किया गया।

दरअसल, व्यावसायिक प्रशिक्षण दिव्यांग विद्यार्थियों को अपने हुनर को विकसित करने और उसका व्यावहारिक उपयोग सीखने में मदद करता है। ऐसे आयोजनों के जरिए उन्हें अपने काम को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। इसके अलावा, लोगों को भी यह समझने का मौका मिलता है कि उचित प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और अवसर मिलने पर दिव्यांग विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमता प्रदर्शित कर सकते हैं।

दिवाली के दीये, मोमबत्तियां और हस्तनिर्मित उत्पाद बने आकर्षण

‘हमारा बाज़ार सीजन-5’ में विद्यार्थियों की ओर से तैयार किए गए कई तरह के उत्पाद प्रदर्शित किए गए। दिवाली को ध्यान में रखते हुए बाजार में दीये और मोमबत्तियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अलावा, पौधे, साड़ियां, शू बैग, कपड़े के नैपकिन, एक्सेसरीज और अन्य रचनात्मक वस्तुएं भी लोगों के लिए उपलब्ध रहीं।

इन उत्पादों की खासियत यह रही कि इन्हें विद्यार्थियों ने अपने प्रशिक्षकों और स्वयंसेवकों की मदद से तैयार किया था। इस तरह बाजार ने विद्यार्थियों को अपने कौशल का प्रदर्शन करने के साथ-साथ अपने काम को लोगों तक पहुंचाने का अवसर भी दिया।

त्योहारों के दौरान हस्तनिर्मित वस्तुओं की मांग को देखते हुए ऐसे आयोजन विशेष महत्व रखते हैं। एक ओर लोगों को सजावट और उपयोग से जुड़ी अलग-अलग वस्तुएं मिलती हैं, वहीं दूसरी ओर इन उत्पादों को बनाने वाले विद्यार्थियों को अपने हुनर के लिए प्रोत्साहन मिलता है। इससे समावेशी भागीदारी और कौशल आधारित आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का संदेश भी सामने आता है।

खाने-पीने और खेलों के स्टॉल भी लगाए गए

कार्यक्रम को लोगों के लिए अधिक रोचक बनाने के उद्देश्य से खाने-पीने और खेलों के स्टॉल भी लगाए गए। इससे बाजार में आने वाले लोगों को खरीदारी के साथ मनोरंजन का अवसर मिला।

इस प्रकार, ‘हमारा बाज़ार’ को केवल उत्पादों की प्रदर्शनी के रूप में नहीं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी के मंच के तौर पर भी प्रस्तुत किया गया। यहां आने वाले लोग विद्यार्थियों के बनाए उत्पाद देख सकते थे और उनके प्रयासों को प्रोत्साहित कर सकते थे।

ऐसे कार्यक्रम समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद बढ़ाने में मदद करते हैं। विशेष रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए यह अनुभव महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और व्यापक समुदाय के साथ जुड़ने का अवसर मिलता है।

सामान्य स्कूलों के विद्यार्थियों को भी किया गया आमंत्रित

कार्यक्रम के दौरान फिक्की फ्लो की चेयरपर्सन अंकिता गर्ग ने बताया कि आयोजन में सामान्य स्कूलों के विद्यार्थियों को भी आमंत्रित किया गया। इसका उद्देश्य बच्चों के बीच आपसी संवाद बढ़ाना, दिव्यांगजनों के प्रति जागरूकता विकसित करना और समावेशी समाज की भावना को मजबूत करना था।

इस पहल के जरिए विद्यार्थियों को एक-दूसरे के अनुभवों और क्षमताओं को समझने का अवसर मिला। जब अलग-अलग पृष्ठभूमि के बच्चे एक ही मंच पर संवाद करते हैं, तो आपसी समझ और सहयोग की भावना को बढ़ावा मिल सकता है।

इसके साथ ही, ऐसे आयोजन समाज में समान अवसरों के महत्व को भी रेखांकित करते हैं। दिव्यांगजनों को केवल सहायता की जरूरत वाले व्यक्ति के रूप में देखने के बजाय उनकी प्रतिभा, कौशल और योगदान को पहचानना समावेशी समाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

कानपुरवासियों के सहयोग के लिए संस्था ने जताया आभार

‘आशाएं’ संस्था ने आयोजन में सहयोग और प्रोत्साहन देने के लिए कानपुरवासियों का आभार व्यक्त किया। संस्था के अनुसार, लोगों के निरंतर सहयोग से दिव्यांग विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं।

संस्था का कहना है कि ‘हमारा बाज़ार’ केवल खरीदारी का मंच नहीं है, बल्कि यह दिव्यांग विद्यार्थियों के हुनर को पहचान दिलाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की सार्थक पहल है।

कुल मिलाकर, कानपुर के बाल भवन में आयोजित ‘हमारा बाज़ार सीजन-5’ ने दिव्यांग विद्यार्थियों की रचनात्मकता और कौशल को सामने लाने का अवसर प्रदान किया। हस्तनिर्मित उत्पादों, मनोरंजक स्टॉलों और जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से इस आयोजन ने आत्मनिर्भरता, सामाजिक सहभागिता और समावेशी सोच का संदेश दिया।

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