कानपुर में संयुक्त मंडलीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026 का आयोजन, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर
रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा
कानपुर: चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर परिसर में चित्रकूटधाम, कानपुर और झांसी मंडल की संयुक्त मंडलीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026 का आयोजन किया गया। गोष्ठी में किसानों को रबी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने, कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करने और बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त करने के उपायों की जानकारी दी गई। इस दौरान गौ-आधारित प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल और कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ उठाने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव, कृषि एम.के. शन्मुगा सुन्दरम ने की। वहीं, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कल्याणपुर विधायक नीलिमा कटियार और कानपुर नगर की महापौर प्रमिला पाण्डेय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। गोष्ठी का शुभारंभ कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए किसानों को किया प्रेरित
गोष्ठी को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों से कृषि उत्पादन की गुणवत्ता सुधारने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि उत्पादों का बेहतर बाजार मूल्य दिलाने के लिए उत्पादन की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए गौ-आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक और असंतुलित प्रयोग को कम करने पर जोर दिया। साथ ही किसानों को प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार, खेती में उपलब्ध संसाधनों का उचित इस्तेमाल और कृषि संबंधी तकनीकी जानकारी किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
इसके अलावा, उन्होंने प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता के संबंध में जानकारी देते हुए किसानों से कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसान बीज, कृषि यंत्र, डीएपी और अन्य कृषि निवेशों से संबंधित योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।
दलहन और तिलहन की फसलों के लिए 10 लाख से अधिक मिनीकिट
कृषि मंत्री ने किसानों को सरकार की ओर से संचालित कृषि योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा इस वर्ष तिलहनी और दलहनी फसलों के 10 लाख से अधिक मिनीकिट किसानों को निःशुल्क वितरित किए जा रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य किसानों को इन फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना और कृषि उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों को समर्थन देना है। तिलहन और दलहन फसलें कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। इसलिए इनके उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज और तकनीकी जानकारी पहुंचाना उपयोगी है।
वहीं, कृषि मंत्री ने कृषि यंत्रों, बीज, डीएपी और अन्य कृषि निवेशों से संबंधित योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया का उल्लेख किया। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे संबंधित विभागों से पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और आवेदन की शर्तों की जानकारी प्राप्त करके योजनाओं का लाभ उठाएं।
150 स्टॉल के माध्यम से मिली कृषि तकनीकों की जानकारी
संयुक्त मंडलीय रबी उत्पादकता गोष्ठी के साथ आयोजित कृषि मेले में किसानों को विभिन्न विभागों और संस्थानों की सेवाओं से परिचित कराने के लिए कुल 150 स्टॉल लगाए गए। इनमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से जुड़े संस्थानों ने भाग लिया।
मेले में कृषि विभाग के बीज, कृषि रक्षा, मृदा परीक्षण और मृदा संरक्षण से संबंधित स्टॉल शामिल रहे। इसके अलावा रेशम, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, लघु सिंचाई, इफको, कृभको, किसान कॉल सेंटर और पशुपालन से संबंधित स्टॉल भी लगाए गए।
इन स्टॉलों के माध्यम से किसानों को कृषि से जुड़ी योजनाओं, तकनीकी सुविधाओं और उपलब्ध सेवाओं की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। इसके साथ ही, किसानों को संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर अपनी जरूरतों और खेती से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करने का अवसर भी मिला।
तीन मंडलों के किसानों ने किया प्रतिभाग
इस गोष्ठी में कानपुर, चित्रकूटधाम और झांसी मंडलों के विभिन्न जनपदों से आए किसानों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को रबी फसलों की खेती, कृषि निवेशों के उपयोग और उत्पादन की गुणवत्ता से जुड़े विषयों पर तकनीकी जानकारी दी गई।
ऐसे आयोजनों का उद्देश्य कृषि विभाग, कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच संवाद को बढ़ावा देना है। इससे किसानों को नई तकनीकों और विभागीय योजनाओं के बारे में जानकारी मिलती है। साथ ही, खेती से संबंधित समस्याओं को अधिकारियों और विशेषज्ञों के सामने रखने का अवसर भी मिलता है।
रबी सीजन में समय पर बुवाई, उपयुक्त बीजों का चयन, मिट्टी की जरूरत के अनुसार उर्वरकों का इस्तेमाल और फसलों की देखभाल जैसे विषय महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में तकनीकी जानकारी किसानों को बेहतर कृषि प्रबंधन की दिशा में मदद कर सकती है।
कृषि और प्रशासनिक विभागों के अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता और गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के प्रबंध निदेशक आशुतोष मिश्र, कृषि निदेशक टी.एम. त्रिपाठी और बीज प्रमाणीकरण संस्था की निदेशक डॉ. कनीज फातिमा ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
इस दौरान अपर आयुक्त एवं निबंधक, सहकारिता, उत्तर प्रदेश; अपर कृषि निदेशक (प्रसार), उत्तर प्रदेश; कानपुर मंडल के आयुक्त के. विजयेन्द्र पांडियन और झांसी मंडल के मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा संयुक्त कृषि निदेशक, कानपुर मंडल धर्मेन्द्र कुमार और कानपुर नगर के उप कृषि निदेशक डॉ. आर.एस. वर्मा समेत 13 जनपदों के मुख्य विकास अधिकारियों तथा कृषि और संबंधित विभागों के राज्य स्तरीय, मंडलीय एवं जनपद स्तरीय अधिकारियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
टिकाऊ खेती और बेहतर उत्पादकता पर रहा फोकस
संयुक्त मंडलीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026 में कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता सुधारने और किसानों को योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया। प्राकृतिक खेती, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, बीजों की उपलब्धता और कृषि तकनीकों की जानकारी कार्यक्रम के प्रमुख विषय रहे।
कुल मिलाकर, कानपुर में आयोजित इस गोष्ठी ने तीन मंडलों के किसानों को कृषि विशेषज्ञों, विभागीय अधिकारियों और विभिन्न संस्थानों से जुड़ने का अवसर दिया। अब किसानों के लिए जरूरी है कि वे प्राप्त तकनीकी जानकारी को अपनी खेती की परिस्थितियों के अनुसार अपनाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से पहले उनकी पात्रता एवं शर्तों की पुष्टि करें। इससे रबी सीजन में बेहतर कृषि प्रबंधन और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहन मिल सकता है।

