हरदोई: 25 साल तक लापता रहे होरीलाल की संदिग्ध मौत, जमीन विवाद में हत्या की आशंका

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रिपोर्ट – संजीव आनंद

हरदोई (उत्तर प्रदेश): हरदोई जिले के कछौना कोतवाली क्षेत्र के कलौली निवासी होरीलाल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। करीब 25 साल तक लापता रहने के बाद जमीन के बैनामे के कारण चर्चा में आए होरीलाल की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनकी पत्नी ने जमीन विवाद को लेकर हत्या की आशंका जताई है और पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि, अभी तक हत्या की आशंका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस के अनुसार, मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

हत्या के मामले में मिली थी आजीवन कारावास की सजा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, होरीलाल को हत्या के एक मामले में न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वर्ष 2000 में पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद वह कुछ समय तक अपने घर पर रहे। इसके बाद अचानक लापता हो गए। परिवार के सदस्यों ने उनकी तलाश की, लेकिन लंबे समय तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

समय बीतने के साथ परिवार की उम्मीदें भी कमजोर पड़ती गईं। करीब 25 वर्षों तक होरीलाल का कोई पता नहीं चलने के कारण परिजनों ने उन्हें मृत मान लिया था। इस दौरान परिवार ने कई महत्वपूर्ण घटनाओं का सामना किया, लेकिन होरीलाल के बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

होरीलाल के लापता होने के बाद भी परिवार का जीवन आगे बढ़ता रहा। वर्ष 2005 में उनके बेटे अनुराग की शादी हुई। हालांकि, वर्ष 2022 में चंडीगढ़ में अनुराग की भी मृत्यु हो गई। परिवार के लिए यह एक बड़ा आघात था।

ऐसे में वर्षों तक लापता रहे होरीलाल के जीवित होने की जानकारी सामने आना और उसके कुछ समय बाद उनकी मौत की सूचना मिलना पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना देता है। अब परिवार यह जानना चाहता है कि इतने वर्षों तक होरीलाल कहां रहे और उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।

जुलाई 2026 में जमीन के बैनामे से सामने आया मामला

इस प्रकरण में नया मोड़ जुलाई 2026 में आया, जब जानकारी मिली कि होरीलाल ने कटियामऊ निवासी रामश्री, पत्नी परशुराम, के नाम जमीन का बैनामा किया है। इस जानकारी के सामने आने के बाद परिजनों को उनके जीवित होने का पता चला।

जमीन के बैनामे की जानकारी मिलने के बाद परिवार ने जमीन के दाखिल-खारिज के खिलाफ संडीला तहसील में आपत्ति दर्ज कराई। बताया जा रहा है कि यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। हालांकि, जमीन के बैनामे से जुड़े सभी तथ्यों और दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

यही जमीन विवाद अब होरीलाल की संदिग्ध मौत के मामले में महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। उनकी पत्नी का मानना है कि वर्षों तक लापता रहने के बाद जमीन के बैनामे की जानकारी सामने आना और फिर अचानक उनकी मौत की सूचना मिलना जांच का विषय है। हालांकि, केवल इन घटनाओं के क्रम के आधार पर हत्या या किसी व्यक्ति की संलिप्तता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

15 अक्टूबर को पत्नी को मिली मौत की सूचना

होरीलाल की पत्नी के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 को गांव के एक व्यक्ति ने फोन करके उन्हें होरीलाल की तबीयत खराब होने की जानकारी दी। इस सूचना के कुछ ही देर बाद एक अन्य फोन कॉल के जरिए उनकी मौत की खबर मिली।

उन्हें बताया गया कि होरीलाल का शव लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर से एंबुलेंस के जरिए घर लाया जा रहा है। अचानक मिली इस सूचना से परिवार के सामने कई सवाल खड़े हो गए।

पत्नी ने जमीन विवाद को देखते हुए आशंका जताई कि होरीलाल की मौत के पीछे कोई साजिश हो सकती है। उन्होंने पुलिस से मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच की जाए, संबंधित लोगों से पूछताछ हो और मौत से जुड़ी परिस्थितियों को स्पष्ट किया जाए।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होंगे मौत के कारण

मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि होरीलाल की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि उनकी तबीयत कब और किन परिस्थितियों में बिगड़ी, उन्हें ट्रॉमा सेंटर कब ले जाया गया और मौत से पहले क्या घटनाक्रम रहा। इसके साथ ही जमीन के बैनामे, दाखिल-खारिज पर दर्ज आपत्ति और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।

फिलहाल पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। जब तक जांच में ठोस तथ्य सामने नहीं आते, तब तक हत्या की आशंका को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

25 साल बाद सामने आए मामले ने खड़े किए सवाल

होरीलाल की संदिग्ध मौत का मामला कई कारणों से चर्चा में है। पहला, उनका वर्ष 2000 में पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद लापता हो जाना। दूसरा, जुलाई 2026 में जमीन के बैनामे से उनके जीवित होने की जानकारी सामने आना। तीसरा, इसके बाद 15 अक्टूबर को उनकी मौत की सूचना मिलना।

इन घटनाओं के बीच संभावित संबंधों की जांच करना जरूरी है, ताकि परिवार को सच्चाई का पता चल सके। साथ ही, जमीन विवाद से जुड़े दस्तावेजों और मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

फिलहाल होरीलाल की पत्नी ने न्याय की मांग करते हुए पुलिस से निष्पक्ष जांच की अपील की है। अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।