संतकबीरनगर: साइबर ठगी के 3 पीड़ितों को पुलिस ने वापस दिलाए ₹30,544, साइबर क्रैक अभियान के तहत कार्रवाई

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रिपोर्ट- शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी

संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में साइबर अपराध के पीड़ितों को राहत दिलाने के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में चलाए जा रहे साइबर क्रैक अभियान के तहत थाना बखिरा पुलिस ने साइबर ठगी के तीन मामलों में पीड़ितों को कुल 30,544.03 रुपये की धनराशि वापस कराई है। यह रकम संबंधित पीड़ितों के बैंक खातों में वापस कराई गई है। पुलिस की इस कार्रवाई से साइबर धोखाधड़ी का सामना कर चुके तीन लोगों को आर्थिक राहत मिली है।

पुलिस के अनुसार, साइबर हेल्प डेस्क थाना बखिरा की टीम ने संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए बैंकिंग प्रक्रिया और एमआरएम पोर्टल के माध्यम से धनराशि वापस कराने में सफलता प्राप्त की। इसके साथ ही अन्य पीड़ितों की शेष धनराशि वापस कराने के लिए भी संबंधित बैंकों और वित्तीय संस्थाओं से समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

रिश्तेदार बनकर महिला से की गई थी साइबर ठगी

पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, पहला मामला सुफिया खातून पत्नी वाजिद अली, निवासी दुर्गजोत से संबंधित है। शिकायत के अनुसार, 1 जनवरी 2026 को एक व्यक्ति ने रिश्तेदार बनकर उनसे संपर्क किया और साइबर धोखाधड़ी के जरिए 35,000 रुपये की ठगी कर ली।

मामले की शिकायत मिलने के बाद साइबर हेल्प डेस्क ने आवश्यक कार्रवाई की। इसके परिणामस्वरूप पीड़िता की 22,258.85 रुपये की धनराशि वापस कराने में सफलता मिली। हालांकि, ठगी गई कुल रकम और वापस कराई गई राशि के बीच अंतर है। शेष धनराशि की वापसी के संबंध में आगे की कार्रवाई संबंधित प्रक्रिया के अनुसार की जा सकती है।

यह मामला एक बार फिर बताता है कि साइबर ठग परिचित या रिश्तेदार बनकर लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए किसी भी व्यक्ति के नाम पर पैसे भेजने से पहले उसकी पहचान और अनुरोध की पुष्टि करना जरूरी है।

पैसा दोगुना करने का लालच देकर ठगी

दूसरा मामला अनिल कुमार यादव पुत्र रामकरन, निवासी खरवनिया से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, उन्हें पैसा दोगुना करने का लालच देकर 1,08,500 रुपये की साइबर धोखाधड़ी की गई थी। इस प्रकरण में पुलिस की कार्रवाई के बाद पीड़ित की 1,486.18 रुपये की धनराशि वापस कराई गई।

साइबर अपराध के मामलों में ठग अक्सर कम समय में अधिक मुनाफा कमाने, निवेश पर असाधारण लाभ देने या रकम दोगुनी करने जैसे दावे करते हैं। ऐसे प्रस्तावों के माध्यम से लोगों को पैसे ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसलिए किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना आवश्यक है।

इसके अलावा, किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में रकम भेजने या व्यक्तिगत बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचना चाहिए। यदि कोई योजना निश्चित और असामान्य रूप से अधिक मुनाफे का दावा करती है, तो उसकी जांच किए बिना उस पर भरोसा करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।

ट्रेडिंग के नाम पर 80 हजार रुपये की धोखाधड़ी

तीसरा मामला प्रभुनाथ यादव पुत्र रामकरन यादव, निवासी बखिरा का है। पुलिस के अनुसार, 12 जून 2024 को एक अज्ञात व्यक्ति ने ट्रेडिंग के नाम पर उन्हें लालच दिया, जिसके बाद 80,000 रुपये ट्रांसफर किए गए। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद 6,799 रुपये की धनराशि वापस कराई गई।

आजकल ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से बचने के लिए विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निवेश करने से पहले उसके बारे में जानकारी जुटानी चाहिए। साथ ही, अनजान व्यक्तियों के कहने पर किसी खाते में पैसे भेजने या संदिग्ध लिंक के माध्यम से निवेश करने से बचना चाहिए।

बैंकिंग प्रक्रिया के जरिए वापस कराई गई रकम

थाना बखिरा पुलिस के मुताबिक, तीनों मामलों में कुल 30,544.03 रुपये की धनराशि संबंधित पीड़ितों के बैंक खातों में वापस कराई गई है। इसके लिए एमआरएम पोर्टल और बैंकिंग प्रक्रिया के माध्यम से कार्रवाई की गई।

पुलिस का कहना है कि जिन मामलों में पूरी रकम वापस नहीं हो सकी है, उनमें शेष धनराशि की वापसी के लिए संबंधित बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। हालांकि, शेष रकम की वापसी कब तक होगी, इस संबंध में कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है।

इस कार्रवाई में थाना बखिरा के थानाध्यक्ष दिलीप कुमार सिंह, साइबर हेल्प डेस्क प्रभारी उपनिरीक्षक राजेश कुमार, आरक्षी चन्द्रभान सिंह, आरक्षी ओमनाथ दुबे, महिला आरक्षी सुमन कुमारी और महिला आरक्षी अवन्तिका की भूमिका रही।

साइबर ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत

संतकबीरनगर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति साइबर धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो उसे बिना देर किए शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल किया जा सकता है।

पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे अपनी ओटीपी (OTP), यूपीआई पिन (UPI PIN), एटीएम पिन (ATM PIN), सीवीवी (CVV) और बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। इसके अलावा, अनजान नंबरों से आने वाले संदेशों और संदिग्ध लिंक से सावधान रहें।

किसी व्यक्ति के रिश्तेदार, बैंक अधिकारी, निवेश सलाहकार या अन्य परिचित के नाम पर संपर्क किए जाने पर भी उसकी पहचान की पुष्टि करना जरूरी है। पैसे भेजने से पहले संबंधित व्यक्ति से किसी विश्वसनीय माध्यम से संपर्क करके जानकारी की पुष्टि की जा सकती है।

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