जरूर पढ़ें नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने के नियम: जानें सही विधि, मंत्र और जरूरी सावधानियां
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नवरात्रि 2026: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दौरान कलश स्थापना के साथ अखंड ज्योति प्रज्वलित करने का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि अखंड ज्योति घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मकता का प्रतीक है। भक्त मां दुर्गा की आराधना करते हुए नौ दिनों तक इस ज्योति को निरंतर जलाए रखने का संकल्प लेते हैं।
हालांकि, अखंड ज्योति जलाना केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ कुछ जरूरी नियमों और सावधानियों का पालन करना भी महत्वपूर्ण है। इसलिए यदि आप इस नवरात्रि अपने घर में अखंड ज्योति जलाने की तैयारी कर रहे हैं, तो इसकी सही विधि, पूजा मंत्र, दीपक रखने की दिशा और सुरक्षा से जुड़ी बातों को जरूर जान लें।
अखंड ज्योति का धार्मिक महत्व क्या है?
हिंदू धर्म में दीपक को प्रकाश, ज्ञान और शुभता का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के समक्ष अखंड ज्योति जलाना श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्योति की निरंतर उपस्थिति से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और भक्तों को पूजा-पाठ में एकाग्रता प्राप्त होती है।
इसके अलावा, अखंड ज्योति जलाकर श्रद्धालु मां दुर्गा से परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि देवी की आराधना और दीपक की रोशनी से मन को शांति मिलती है। हालांकि, ये धार्मिक विश्वास हैं और इनका उद्देश्य आस्था तथा आध्यात्मिक साधना को बढ़ावा देना है।
अखंड ज्योति जलाने से पहले बोलें यह मंत्र
नवरात्रि में अखंड ज्योति प्रज्वलित करने से पहले दीपक के समक्ष श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करने की परंपरा है। इस अवसर पर दीपक का मंत्र पढ़ा जा सकता है।
दीपक मंत्र:
शुभं करोति कल्याणम्, आरोग्यं धनसंपदाम्।
शत्रुबुद्धि विनाशाय, दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
मंत्र का अर्थ: दीपक की ज्योति शुभता और कल्याण प्रदान करने वाली, आरोग्य तथा धन-संपदा की कामना से जुड़ी है। यह मंत्र प्रकाश के प्रति सम्मान और जीवन में शुभता की प्रार्थना को व्यक्त करता है।
मंत्र का उच्चारण करने के बाद मां दुर्गा का ध्यान करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा कल्याण की कामना करते हुए अखंड ज्योति प्रज्वलित करें।
1. अखंड ज्योति को सीधे जमीन पर न रखें
धार्मिक परंपरा के अनुसार, अखंड ज्योति को सीधे जमीन पर रखने के बजाय किसी स्वच्छ और स्थिर चौकी या पूजा के उपयुक्त आधार पर रखा जाता है। कुछ परंपराओं में इसके नीचे जौ, चावल या गेहूं जैसे अनाज की ढेरी बनाने का भी विधान बताया जाता है।
इसलिए दीपक रखने से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। साथ ही, ऐसा स्थान चुनें जहां दीपक के गिरने या किसी वस्तु के संपर्क में आने का खतरा न हो।
2. घी और तेल की ज्योति रखने की दिशा
नवरात्रि की पूजा में घी और तेल से दीपक जलाने की अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं। प्रचलित मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा के दाईं ओर घी का दीपक और बाईं ओर तेल का दीपक रखा जाता है।
हालांकि, दिशा से जुड़े नियमों में क्षेत्रीय परंपराओं और पूजा पद्धतियों के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए अपने परिवार की परंपरा या पुरोहित के मार्गदर्शन का पालन करना उचित है।
3. अखंड ज्योति के लिए कैसा दीपक चुनें?
अखंड ज्योति जलाने के लिए साफ, मजबूत और स्थिर दीपक का चयन करना चाहिए। पीतल के दीपक का इस्तेमाल कई घरों में किया जाता है। वहीं, मिट्टी का दीपक प्रयोग करते समय यह सुनिश्चित करें कि उसमें दरार न हो और वह सुरक्षित रूप से रखा जा सके।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अखंड ज्योति के लिए मौली या कलावे की बत्ती का भी इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, बत्ती की लंबाई और बनावट ऐसी होनी चाहिए कि दीपक में तेल या घी का प्रवाह बना रहे और लौ अनियंत्रित न हो। केवल बत्ती के प्रकार पर निर्भर रहने के बजाय दीपक की नियमित निगरानी करना जरूरी है।
4. अखंड ज्योति में घी या तेल का इस्तेमाल
अखंड ज्योति जलाने के लिए शुद्ध घी का प्रयोग कई श्रद्धालु शुभ मानते हैं। इसके अलावा, परंपरा के अनुसार तिल या सरसों के तेल का इस्तेमाल भी किया जाता है।
यदि आप नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने का संकल्प लेते हैं, तो पहले से पर्याप्त घी या तेल की व्यवस्था कर लें। समय-समय पर दीपक की स्थिति और ईंधन की मात्रा जांचते रहें। ध्यान रहे कि जलते हुए दीपक में घी या तेल डालना आग फैलने का कारण बन सकता है। इसलिए जरूरत पड़ने पर पहले लौ बुझाकर दीपक को सुरक्षित स्थिति में लाएं और फिर दोबारा प्रज्वलित करें। धार्मिक संकल्प से अधिक महत्वपूर्ण घर और परिवार की सुरक्षा है।
5. अखंड ज्योति को बुझने से बचाने के लिए क्या करें?
परंपरा के अनुसार, अखंड ज्योति को नौ दिनों तक लगातार जलाए रखने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए पूजा स्थल पर नियमित निगरानी की व्यवस्था करना जरूरी है।
हालांकि, दीपक को कांच के आवरण में रखने से पहले यह सुनिश्चित करें कि वह गर्मी सहने योग्य हो और पर्याप्त वायु संचार बना रहे। दीपक को पर्दों, कागज, कपड़ों, लकड़ी की सजावट और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।
इसके अतिरिक्त, घर को लंबे समय तक पूरी तरह खाली छोड़ने से बचें। यदि परिवार के सदस्य बाहर जा रहे हैं, तो जलते दीपक को बिना निगरानी छोड़ना उचित नहीं है। अखंड ज्योति के नाम पर आग से जुड़ा जोखिम नहीं लेना चाहिए।
6. पूजा स्थल की स्वच्छता का रखें विशेष ध्यान
अखंड ज्योति के आसपास साफ-सफाई बनाए रखना आवश्यक है। दीपक को ऐसे स्थान पर रखें जहां पानी गिरने, धूल जमा होने या अन्य वस्तुओं से टकराने की आशंका कम हो।
साथ ही, दीपक को छूने से पहले हाथ साफ रखें और पूजा सामग्री को व्यवस्थित ढंग से रखें। पूजा स्थल शौचालय या ऐसे स्थान के पास न बनाएं जहां स्वच्छता बनाए रखना कठिन हो। इससे पूजा का वातावरण साफ-सुथरा और व्यवस्थित बना रहेगा।
7. नौ दिनों के बाद अखंड ज्योति का क्या करें?
नवरात्रि के नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने के बाद कई परिवारों में विशेष पूजा, हवन, कन्या पूजन या अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। ज्योति के समापन को लेकर अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं।
कुछ लोग दीपक को स्वाभाविक रूप से बुझने देने की मान्यता का पालन करते हैं, जबकि अन्य परिवारों में विधिपूर्वक पूजा के बाद ज्योति का समापन किया जाता है। इसलिए इस विषय में अपने परिवार की परंपरा या पुरोहित के निर्देशों का पालन करें। सबसे जरूरी बात यह है कि दीपक को सुरक्षित तरीके से संभालें और उसे बिना निगरानी न छोड़ें।
नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान
- पूजा स्थल और दीपक को साफ रखें।
- दीपक को स्थिर तथा गर्मी सहने वाले आधार पर रखें।
- घी, तेल और बत्ती की व्यवस्था पहले से करें।
- दीपक को बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें।
- जलती ज्योति को पर्दों, कपड़ों और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।
- दीपक को बिना निगरानी न छोड़ें और घर से बाहर जाते समय विशेष सावधानी बरतें।
- धार्मिक विधि के साथ अग्नि सुरक्षा को भी प्राथमिकता दें।
नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाना मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। सही पूजा विधि, स्वच्छता और सावधानी के साथ इस परंपरा का पालन किया जा सकता है। साथ ही, दीपक की निरंतर निगरानी और अग्नि सुरक्षा के नियमों का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। मां दुर्गा से प्रार्थना करें कि सभी के जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहे।
जय माता दी! जय मां भगवती!

