बांदा में आशा बहुओं ने उठाई 20 हजार रुपये मानदेय की मांग, राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की अपील

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रिपोर्ट- पंकज त्रिपाठी

बांदा। जनपद बांदा में कार्यरत आशा बहुओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में आशा बहुओं ने मासिक मानदेय बढ़ाकर 20,000 रुपये करने, राज्य कर्मचारी का दर्जा देने तथा बीमा और सामाजिक सुरक्षा सहित अन्य शासकीय सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराने की मांग की है। आशा बहुओं का कहना है कि वे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला मानदेय उनकी जिम्मेदारियों और मौजूदा महंगाई के लिहाज से पर्याप्त नहीं है।

स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभाने का किया उल्लेख

ज्ञापन सौंपने पहुंचीं आशा बहुओं ने कहा कि वे शासन की स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को धरातल पर सफल बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना, प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचने में सहयोग करना, नवजात शिशुओं की देखभाल के प्रति जागरूक करना और बच्चों के नियमित टीकाकरण को प्रोत्साहित करना उनके प्रमुख कार्यों में शामिल है।

इसके अलावा, आशा बहुएं मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण सुरक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े अभियानों में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। वे गांवों और मोहल्लों में परिवारों से संपर्क कर उन्हें सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करती हैं। साथ ही, जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने और स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने में भी सहयोग करती हैं।

आशा बहुओं के अनुसार, इन जिम्मेदारियों को निभाने के लिए उन्हें नियमित रूप से लोगों के बीच जाना पड़ता है। कई बार उन्हें निर्धारित कार्यों के अतिरिक्त भी समय देना पड़ता है। ऐसे में उनकी मांग है कि सरकार उनके कार्यों और जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए मानदेय तथा सेवा संबंधी सुविधाओं पर सकारात्मक निर्णय ले।

2,000 रुपये के मानदेय को बताया अपर्याप्त

ज्ञापन में आशा बहुओं ने कहा कि उन्हें वर्तमान में मात्र 2,000 रुपये का मानदेय मिलने की बात कही जा रही है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में इतनी कम राशि से परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन हो जाता है। खाद्य सामग्री, बच्चों की शिक्षा, आवास, परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाले खर्च में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

आशा बहुओं का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए उनके मानदेय में उचित वृद्धि की जानी चाहिए, जिससे वे आर्थिक सुरक्षा के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।

हालांकि, ज्ञापन में उल्लिखित 2,000 रुपये की राशि को आशा बहुओं ने अपने मानदेय के संदर्भ में उठाया है। वास्तविक भुगतान केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न प्रोत्साहन राशि तथा संबंधित योजनाओं के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

20 हजार रुपये मासिक मानदेय की प्रमुख मांग

आशा बहुओं ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उनका मासिक मानदेय बढ़ाकर 20,000 रुपये किया जाए। उनका मानना है कि इससे उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी और परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यों में निरंतर सक्रिय रहने के बावजूद पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं मिलना चिंता का विषय है। इसलिए सरकार को उनके मानदेय की समीक्षा करते हुए ऐसा निर्णय लेना चाहिए, जिससे उनकी आजीविका और कार्य के प्रति प्रोत्साहन दोनों को मजबूती मिल सके।

इसके साथ ही आशा बहुओं ने मांग की कि उनकी सेवाओं को औपचारिक मान्यता देते हुए उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। उनके अनुसार, इससे सेवा संबंधी अधिकारों, सुविधाओं और भविष्य की सुरक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

बीमा और सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने की अपील

मानदेय बढ़ाने और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने के अलावा आशा बहुओं ने बीमा तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि काम के दौरान उन्हें लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहना पड़ता है। इसलिए उनके और उनके परिवारों के लिए आवश्यक सुरक्षा प्रावधान होने चाहिए।

उन्होंने शासन से आग्रह किया कि आशा बहुओं को पात्रता के अनुसार बीमा, सामाजिक सुरक्षा और अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं। इससे उन्हें कठिन परिस्थितियों में आर्थिक सहारा मिल सकेगा।

आशा बहुओं का मानना है कि बेहतर आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलने से वे अधिक आत्मविश्वास के साथ स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारियों को निभा सकेंगी। इसके अलावा, इससे स्वास्थ्य सेवाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को भी सहयोग मिल सकता है।

मुख्यमंत्री से सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद

ज्ञापन के माध्यम से आशा बहुओं ने शासन से उनकी मांगों पर शीघ्र विचार करने और सकारात्मक कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए मानदेय वृद्धि, सेवा संबंधी दर्जे और सामाजिक सुरक्षा के विषय में उचित निर्णय करेगी।

इस दौरान विनोद तिवारी और संध्या के बयान भी इस मामले के संबंध में लिए गए। वहीं, बांदा के सिटी मजिस्ट्रेट श्रीचंद्र का भी पक्ष दर्ज किया गया। हालांकि, इन बयानों का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं होने के कारण उनसे संबंधित किसी अतिरिक्त दावे को यहां शामिल नहीं किया गया है।

फिलहाल, आशा बहुओं की प्रमुख मांगें 20,000 रुपये मासिक मानदेय, राज्य कर्मचारी का दर्जा और बीमा सहित सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से जुड़ी हैं। अब इन मांगों पर शासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर संबंधित कर्मचारियों की निगाहें टिकी हैं।

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