दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल चोटी से उठी युवा अधिवक्ताओं को ₹15 हजार मासिक प्रोत्साहन देने की मांग
रिपोर्ट- हनुमंत सिंह पिंटू
कानपुर नगर: युवा अधिवक्ताओं को आर्थिक मजबूती प्रदान करने और उनके पेशेवर भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए अधिवक्ता कल्याण संघर्ष समिति ने एक बार फिर केंद्र सरकार से युवा अधिवक्ता प्रोत्साहन योजना लागू करने की मांग उठाई है। इस बार यह मांग लद्दाख स्थित दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल चोटियों में शामिल उल्मिंग ला से उठाई गई है। कानपुर के युवा अधिवक्ता शुभम जोशी ने अपनी लद्दाख यात्रा के दौरान उल्मिंग ला पहुंचकर केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से नवागंतुक अधिवक्ताओं को पंजीकरण के पहले पांच वर्षों तक प्रतिमाह 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की मांग की।
अधिवक्ता कल्याण संघर्ष समिति की राष्ट्रीय स्तर पर युवा अधिवक्ताओं को अधिवक्ता वृत्ति में मजबूती प्रदान करने के संबंध में हुई बैठक में इस पहल पर चर्चा की गई। बैठक में समिति के संयोजक एवं लॉयर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष पं. रवीन्द्र शर्मा ने कहा कि समिति लंबे समय से नवागंतुक अधिवक्ताओं के लिए युवा अधिवक्ता प्रोत्साहन योजना लागू करने की मांग कर रही है। उनका कहना है कि इस योजना से नए अधिवक्ताओं को अपने पेशे में स्थापित होने और आर्थिक चुनौतियों का सामना करने में सहायता मिल सकती है।
उल्मिंग ला से केंद्रीय कानून मंत्री तक पहुंचाई मांग
समिति के सदस्यों के अनुसार, कानपुर के युवा अधिवक्ता शुभम जोशी ने लद्दाख यात्रा के दौरान वहां के अधिवक्ताओं से भी मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने अत्यधिक दुर्गम रास्तों से होते हुए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल चोटी उल्मिंग ला पहुंचकर युवा अधिवक्ताओं की आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
इस दौरान उन्होंने केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से आग्रह किया कि देशभर के नए अधिवक्ताओं के लिए ऐसी प्रोत्साहन योजना बनाई जाए, जिससे उन्हें शुरुआती वर्षों में आर्थिक सहारा मिल सके। उनकी मांग है कि अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण के पहले पांच वर्षों तक प्रत्येक पात्र युवा अधिवक्ता को प्रतिमाह 15 हजार रुपये दिए जाएं।
शुभम जोशी का कहना है कि अधिवक्ता समाज लंबे समय से देश के सामाजिक और न्यायिक ढांचे में महत्वपूर्ण योगदान देता आ रहा है। इसके बावजूद, नए अधिवक्ताओं को अपना पेशेवर जीवन शुरू करने के दौरान कई आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शुरुआती वर्षों के लिए आर्थिक सहायता मिलने से वे अपनी आजीविका और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच बेहतर संतुलन बना सकेंगे।
शुरुआती पांच वर्षों के लिए आर्थिक सहायता की मांग
अधिवक्ता कल्याण संघर्ष समिति का कहना है कि कानून की पढ़ाई पूरी करने और अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराने के बाद युवाओं के सामने व्यावहारिक चुनौतियां आती हैं। अदालतों में नियमित अभ्यास शुरू करने, कानूनी मामलों की जानकारी हासिल करने, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के मार्गदर्शन में काम करने और अपने पेशेवर संपर्क विकसित करने में समय लगता है।
इसके अलावा, शुरुआती दौर में कई युवा अधिवक्ताओं की आय सीमित रहती है। उन्हें आवागमन, पुस्तकों, कानूनी संसाधनों, कार्यालय संबंधी आवश्यकताओं और दैनिक खर्चों का प्रबंधन भी करना पड़ता है। परिणामस्वरूप, आर्थिक दबाव के कारण कुछ युवाओं के लिए इस पेशे में निरंतर बने रहना कठिन हो सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए समिति पंजीकरण के पहले पांच वर्षों तक 15 हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता देने की मांग कर रही है। समिति के अनुसार, यदि इस तरह की योजना लागू होती है तो नए अधिवक्ताओं को अपने कौशल का विकास करने, न्यायिक प्रक्रिया को समझने और स्वतंत्र रूप से पेशे में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक समय मिल सकेगा।
हालांकि, यह मांग फिलहाल समिति की ओर से उठाई गई पहल है। योजना को लेकर सरकार की औपचारिक स्वीकृति, पात्रता की शर्तों और क्रियान्वयन की व्यवस्था के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा इस समाचार के लिए उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
वरिष्ठ अधिवक्ता भानु प्रताप द्विवेदी ने पहल को बताया महत्वपूर्ण
समिति के वरिष्ठ अधिवक्ता भानु प्रताप द्विवेदी ने दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल चोटी से कानपुर के युवा अधिवक्ता द्वारा उठाई गई इस मांग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल से युवा अधिवक्ताओं की आर्थिक समस्याओं और उनके भविष्य से जुड़े सवालों को व्यापक स्तर पर सामने लाने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से इस मांग पर संज्ञान लेने का आग्रह किया। साथ ही विश्वास जताया कि युवा अधिवक्ता प्रोत्साहन योजना को लेकर चल रहा प्रयास भविष्य में नीति निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भानु प्रताप द्विवेदी के मुताबिक, नए अधिवक्ताओं को शुरुआती वर्षों में आर्थिक सहयोग मिलने से उन्हें अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाने का अवसर मिल सकता है। इसलिए इस विषय पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है।
अधिवक्ता कल्याण को लेकर लगातार प्रयास कर रही समिति
अधिवक्ता कल्याण संघर्ष समिति के संयोजक पं. रवीन्द्र शर्मा ने बताया कि समिति नवागंतुक अधिवक्ताओं के हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रही है। उनका कहना है कि युवा अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें अपने पेशे में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां मिलनी चाहिए।
समिति की मांग है कि केंद्र सरकार युवा अधिवक्ताओं के लिए एक व्यवस्थित प्रोत्साहन योजना तैयार करे। इसके तहत पात्रता, पंजीकरण की अवधि, आर्थिक सहायता की राशि और भुगतान की प्रक्रिया निर्धारित की जा सकती है। साथ ही, योजना को पारदर्शी तरीके से लागू करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी बनाए जा सकते हैं।
यदि सरकार इस मांग पर विचार करती है, तो इससे देशभर के उन युवा अधिवक्ताओं को लाभ पहुंचाने की संभावनाओं पर चर्चा आगे बढ़ सकती है, जिन्हें पेशे के शुरुआती वर्षों में आर्थिक सहायता की आवश्यकता होती है।
कानपुर लौटने पर शुभम जोशी का होगा स्वागत
समिति के सदस्यों ने बताया कि लद्दाख यात्रा के दौरान उल्मिंग ला से युवा अधिवक्ताओं के हित में आवाज उठाने वाले शुभम जोशी के कानपुर लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। समिति का मानना है कि इस पहल से युवा अधिवक्ताओं के कल्याण से जुड़े मुद्दे को सार्वजनिक चर्चा में लाने में सहायता मिलेगी।
बैठक में अनुराग श्रीवास्तव, बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री, राजेश चौधरी, इमरान आलम, हरिशंकर चतुर्वेदी, संजीव कपूर, रोहित सोनकर, शिवम गंगवार, मोहम्मद इफ्तिखार, इंद्रेश मिश्रा और वीर जोशी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
कुल मिलाकर, उल्मिंग ला से उठाई गई यह मांग युवा अधिवक्ताओं की आर्थिक सुरक्षा और पेशेवर स्थिरता से जुड़े एक महत्वपूर्ण विषय को सामने लाती है। अब इस मांग पर केंद्र सरकार की ओर से किसी संभावित पहल या आधिकारिक निर्णय का इंतजार रहेगा।

