अखिलेश यादव का चुनाव आयोग और BJP पर हमला, बोले- फर्जी फॉर्म-7 से कटवाए जा रहे सपा के वोट
रिपोर्ट- रोहित सिंह चौहान
इटावा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सैफई में पार्टी संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित तौर पर फर्जी फॉर्म-7 के जरिए समाजवादी पार्टी के समर्थकों के वोट कटवाने की कोशिश की गई। अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सूची की पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
जनसभा को संबोधित करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर राष्ट्रपति से मुलाकात कर अपनी चिंताएं और प्रमाण प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनावों के दौरान कुछ स्थानों पर प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल करके चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। हालांकि, ये आरोप अखिलेश यादव के बयान पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी जिम्मेदारी निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है। उनके मुताबिक, समाज के विभिन्न वर्गों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में पक्षपात की शिकायतें सामने आई हैं।
सपा अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि यदि चुनाव आयोग से संबंधित किसी मुद्दे पर विपक्ष सवाल करता है, तो भाजपा को उसका बचाव करने के लिए आगे क्यों आना पड़ता है? उन्होंने इस संदर्भ में भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब पारदर्शी जांच और तथ्यों के आधार पर दिया जाना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि कुछ उपचुनावों में पुलिस और प्रशासन की भूमिका को लेकर भी शिकायतें सामने आई थीं। अखिलेश यादव ने मीरापुर उपचुनाव का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वहां एक पुलिस अधिकारी ने रिवॉल्वर दिखाकर मतदाताओं को वोट डालने से रोकने की कोशिश की थी। उन्होंने चुनाव के दौरान पुलिस की भूमिका और प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।
फर्जी फॉर्म-7 के जरिए वोट काटने का लगाया आरोप
अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का जिक्र करते हुए दावा किया कि समाजवादी पार्टी के PDA प्रहरियों ने कथित रूप से फर्जी फॉर्म-7 भरने के मामलों को पकड़ा है। उनके अनुसार, फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने के लिए किया जाता है।
सपा प्रमुख ने सुल्तानपुर का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि नंदलाल निषाद के नाम से कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर करके कई समाजवादी पार्टी समर्थकों के वोट कटवाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि जब संबंधित व्यक्ति से हस्ताक्षर के बारे में पूछा गया, तो उसने कथित तौर पर बताया कि वह हस्ताक्षर करने के बजाय अंगूठा लगाता है।
इसी तरह, अखिलेश यादव ने लखनऊ की सरोजनी नगर विधानसभा सीट का उल्लेख करते हुए दावा किया कि दशरथ नाम के व्यक्ति के नाम से 100 से अधिक फॉर्म-7 भरवाए गए। उन्होंने बिधूना में समाजवादी पार्टी के नगर अध्यक्ष के कथित फर्जी हस्ताक्षर के जरिए वोट कटवाने का भी आरोप लगाया।
अखिलेश यादव के मुताबिक, पार्टी ने इन मामलों की जानकारी चुनाव आयोग को दी, लेकिन उन्हें अपेक्षित कार्रवाई होती नहीं दिखाई दी। उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटाया जाए।
हालांकि, इन घटनाओं और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है। फॉर्म-7 से संबंधित किसी भी शिकायत पर अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
बंगाल चुनाव का जिक्र कर भाजपा पर साधा निशाना
अपने संबोधन में अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल के चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर दावा किया कि उन्हें चुनाव में हराया नहीं गया, बल्कि हराया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां तीन लाख से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बीच चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई।
सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि आधुनिक तकनीक के दौर में मतदाता सूची को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उनके अनुसार, किसी भी नागरिक को राजनीतिक विचारधारा या पार्टी समर्थक होने के आधार पर मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया स्पष्ट नियमों के अनुसार होनी चाहिए। साथ ही, शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से जांच करके उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
भाजपा अध्यक्ष के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया
भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा INDIA गठबंधन को अराजक बताए जाने संबंधी सवाल पर अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब सवाल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे हैं, तो भाजपा को सामने आकर उसका बचाव करने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
अखिलेश यादव ने अपने बयान में भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता साबित करने की जिम्मेदारी संस्था की अपनी निष्पक्ष कार्यप्रणाली से पूरी होनी चाहिए। उनके मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया पर उठने वाले सवालों का समाधान राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यों और पारदर्शी कार्रवाई के माध्यम से किया जाना चाहिए।
2027 के विधानसभा चुनाव को बताया महत्वपूर्ण परीक्षा
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव प्रदेश के लोकतंत्र और संविधान के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने दावा किया कि यदि भाजपा उत्तर प्रदेश में फिर सत्ता में आती है, तो भविष्य में लोगों के मताधिकार और चुनाव व्यवस्था पर खतरा पैदा हो सकता है।
उन्होंने प्रदेश के किसानों, नौजवानों, व्यापारियों और PDA समाज के लोगों से संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट रहने की अपील की। उनके अनुसार, लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक का वोट समान रूप से महत्वपूर्ण है और चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कायम रहना चाहिए।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में सभी वर्गों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने जोर दिया कि संविधान की भावना के अनुरूप चुनाव कराना और प्रत्येक पात्र मतदाता को मतदान का अवसर देना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी शर्त है।

