कानपुर में नवरात्रि की तैयारियां पूरी, मां तपेश्वरी और बारादेवी मंदिर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
रिपोर्ट – मुकेश वर्मा
कानपुर: शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है। इसके साथ ही कानपुर के प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। बिरहाना रोड स्थित प्राचीन मां तपेश्वरी देवी मंदिर और जूही स्थित मां बारादेवी मंदिर में नवरात्रि की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मंदिर प्रबंधन और प्रशासन की ओर से दर्शन, सुरक्षा, साफ-सफाई तथा श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
दोनों मंदिरों में नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में पुलिस, नगर निगम और मंदिर प्रबंधन के सामने भीड़ को नियंत्रित करने के साथ श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन उपलब्ध कराने की चुनौती रहेगी। विशेष रूप से नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
मां तपेश्वरी और बारादेवी मंदिर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन मंदिर प्रबंधन के साथ बैठक कर चुका है। मंदिरों के आसपास बैरिकेडिंग और कतारों की व्यवस्था की जा रही है, ताकि भक्तों की आवाजाही सुचारु बनी रहे। इसके अलावा, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती की तैयारी की गई है।
मां तपेश्वरी देवी मंदिर के पुजारी शिव मंगल और सेवादारों के अनुसार, प्रशासन के सहयोग से दर्शन की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित किया गया है। यहां महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गई हैं। इससे दर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और भक्तों की सुविधा बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
वहीं, मां बारादेवी मंदिर में बुजुर्गों, बच्चों और जरूरतमंद श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कतारों के बीच आपातकालीन आवागमन की व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अतिरिक्त, सुबह जल्दी और देर रात तक आने वाले भक्तों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मां तपेश्वरी मंदिर में आरती का समय
बिरहाना रोड के पटकापुर क्षेत्र में स्थित मां तपेश्वरी देवी मंदिर कानपुर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। नवरात्रि के दौरान यहां प्रतिदिन विशेष पूजा, देवी का श्रृंगार और आरती की जाती है।
मंदिर से मिली जानकारी के अनुसार, श्रद्धालुओं के लिए आरती का निर्धारित समय इस प्रकार है:
- मंगला आरती: सुबह 4:30 बजे
- दोपहर की आरती: दोपहर 1:30 बजे
- शयन आरती: रात 11 बजे से 12 बजे के बीच
नवरात्रि में सुबह से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू होने की संभावना है। ऐसे में श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे मंदिर पहुंचने से पहले आरती और दर्शन के समय की स्थानीय स्तर पर पुष्टि कर लें।
मां बारादेवी मंदिर में आरती और दर्शन की व्यवस्था
दक्षिण कानपुर के जूही क्षेत्र में स्थित मां बारादेवी मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और बड़ी संख्या में भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर की निर्धारित समय-सारणी के अनुसार:
- मंगला आरती: सुबह 4 बजे
- संध्या आरती: रात 8:30 बजे
- शयन आरती: मध्यरात्रि 12 बजे
शयन आरती के बाद मंदिर के पट लगभग चार घंटे के लिए बंद किए जाने की जानकारी दी गई है। इसलिए दर्शन के लिए निकलने से पहले मंदिर प्रबंधन से समय की पुष्टि करना उपयोगी रहेगा।
रामायणकाल से जुड़ी है मां तपेश्वरी मंदिर की मान्यता
मां तपेश्वरी देवी मंदिर का धार्मिक महत्व रामायणकाल से जुड़ी मान्यताओं के कारण भी विशेष माना जाता है। स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार, भगवान श्रीराम द्वारा माता सीता का त्याग किए जाने के बाद उन्होंने बिठूर स्थित महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में निवास किया था।
मान्यता है कि माता सीता ने इसी क्षेत्र में पुत्र प्राप्ति के लिए तपस्या की थी। धार्मिक कथा के अनुसार, देवी के प्रकट होने से इस स्थान का नाम तपेश्वरी पड़ा। इसके साथ ही लोकमान्यता है कि माता सीता ने यहीं अपने पुत्रों लव और कुश का मुंडन संस्कार भी कराया था।
इसी परंपरा के चलते आज भी कानपुर और आसपास के जिलों से परिवार बच्चों का मुंडन संस्कार कराने मंदिर पहुंचते हैं। यहां श्रद्धालु माता के दर्शन करने के साथ अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करते हैं और मनोकामना पूरी होने पर घंटियां चढ़ाते हैं।
हालांकि, इन प्रसंगों को धार्मिक और स्थानीय लोकपरंपराओं के रूप में देखा जाता है। मंदिर की आस्था और सांस्कृतिक पहचान पीढ़ियों से श्रद्धालुओं के बीच बनी हुई है।
1500 से 1700 वर्ष पुराना माना जाता है मां बारादेवी मंदिर
मां बारादेवी मंदिर दक्षिण कानपुर के प्रमुख सिद्धपीठों में गिना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास लगभग 1500 से 1700 वर्ष पुराना माना जाता है। हालांकि, मंदिर की स्थापना के समय को लेकर स्पष्ट लिखित ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध होने की जानकारी नहीं है।
मंदिर से जुड़ी लोककथा के अनुसार, बारह बहनें अपने पिता से नाराज होकर घर से निकल गई थीं। उन्होंने देवी से प्रार्थना की कि वे पत्थर में परिवर्तित हो जाएं। लोकमान्यता के मुताबिक, उनकी प्रार्थना स्वीकार हुई और वे पत्थर के रूप में प्रकट हुईं। इसी कथा के आधार पर इस स्थान को बारादेवी कहा जाने लगा।
यहां माता की पूजा से जुड़ी परंपराएं लंबे समय से चली आ रही हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक गतिविधियां होती हैं। भक्त चुनरी चढ़ाकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। अष्टमी और नवमी के दिन यहां विशेष भीड़ जुटने की संभावना रहती है।
नगर निगम की तैयारियां, फिर भी कुछ समस्याओं पर नाराजगी
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर निगम की ओर से मंदिरों की ओर जाने वाली सड़कों के गड्ढे भरने, प्रकाश व्यवस्था सुधारने और सफाई कराने के प्रयास किए गए हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य नवरात्रि के दौरान भक्तों को आवागमन में सुविधा देना है।
हालांकि, मां बारादेवी मंदिर प्रबंधन ने कुछ व्यवस्थाओं को लेकर असंतोष भी जताया है। प्रबंधन के अनुसार, मंदिर के निकास द्वार के पास सड़क की खराब स्थिति, नालियों में पड़े पत्थरों और सीवर लाइन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए पहले भी आवेदन दिए गए हैं। इसके बावजूद कुछ समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
ऐसे में नवरात्रि के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए इन समस्याओं का समय रहते समाधान करना जरूरी माना जा रहा है। इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान बनाने और स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
नवरात्रि में दर्शन के लिए निकलने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
कानपुर के प्रमुख देवी मंदिरों में नवरात्रि के दौरान भीड़ बढ़ने की संभावना को देखते हुए श्रद्धालु कुछ सावधानियां बरत सकते हैं। मंदिर जाने से पहले आरती के समय की जानकारी लें, पुलिस और मंदिर प्रबंधन के निर्देशों का पालन करें तथा बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। इसके अलावा, निर्धारित कतारों में ही दर्शन करें और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने में सहयोग दें।
कुल मिलाकर, शारदीय नवरात्रि के आगमन के साथ मां तपेश्वरी देवी और मां बारादेवी मंदिरों में धार्मिक उत्साह बढ़ने की उम्मीद है। प्रशासन, नगर निगम और मंदिर प्रबंधन के सामने श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक दर्शन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है। अब भक्त माता रानी के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए नवरात्रि का इंतजार कर रहे हैं।

