कानपुर: यूनाइटेड पब्लिक स्कूल में साइबर सुरक्षा कार्यशाला, छात्रों को UPI फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी से बचाव के बताए तरीके

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 रिपोर्ट- हनुमंत सिंह पिंटू

कानपुर। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक होना भी बेहद जरूरी हो गया है। खासकर विद्यार्थियों के लिए इंटरनेट, सोशल मीडिया और ऑनलाइन भुगतान का सुरक्षित इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से साइबर जागरूकता माह के अंतर्गत कानपुर के सिविल लाइंस स्थित यूनाइटेड पब्लिक स्कूल में मिशन निडर की ओर से साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान छात्रों को ऑनलाइन धोखाधड़ी की पहचान करने, निजी जानकारी सुरक्षित रखने और साइबर अपराध होने की स्थिति में उचित कदम उठाने की जानकारी दी गई।

कार्यशाला को संवादात्मक बनाया गया, ताकि विद्यार्थी केवल जानकारी सुनने तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी शंकाओं का समाधान भी कर सकें। इस दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सक्रिय रूप से सवाल पूछे और साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। आयोजकों का उद्देश्य बच्चों को डिजिटल दुनिया में जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार करना था।

UPI फ्रॉड और OTP घोटाले से बचाव की दी जानकारी

कार्यशाला में इंटरनेशनल साइबर एक्सपर्ट शिवम मालवीय ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने विशेष रूप से UPI फ्रॉड, OTP घोटाले, फिशिंग लिंक, हैकिंग और साइबर बुलिंग जैसे विषयों पर जानकारी दी। साथ ही, उन्होंने समझाया कि साइबर अपराधी किस तरह लोगों को झांसे में लेकर उनकी निजी जानकारी या आर्थिक विवरण हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, UPI PIN, पासवर्ड या बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा, किसी अनजान नंबर से आए संदेश या संदिग्ध लिंक पर बिना जांच किए क्लिक करने से बचना चाहिए। कई बार धोखाधड़ी करने वाले लोग खुद को बैंक कर्मचारी, किसी प्रतिष्ठित कंपनी का प्रतिनिधि या परिचित व्यक्ति बताकर विश्वास जीतने का प्रयास करते हैं। इसलिए किसी भी ऑनलाइन अनुरोध पर तुरंत भरोसा करने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करना आवश्यक है।

विशेषज्ञ ने यह भी बताया कि केवल जागरूकता और सावधानी के माध्यम से कई प्रकार के साइबर जोखिमों को कम किया जा सकता है। विद्यार्थियों को अपने मोबाइल फोन और सोशल मीडिया खातों की सुरक्षा के लिए मजबूत पासवर्ड रखने, उपलब्ध होने पर दो-स्तरीय सुरक्षा सुविधा का उपयोग करने और अपने खातों की गतिविधियों पर नजर रखने की सलाह दी गई।

सोशल मीडिया का सुरक्षित इस्तेमाल करने पर जोर

कार्यशाला के दौरान सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल पर भी विशेष चर्चा हुई। आज विद्यार्थी पढ़ाई, संवाद और मनोरंजन के लिए विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। हालांकि, इन प्लेटफॉर्म पर निजी जानकारी साझा करने में सावधानी बरतना जरूरी है।

शिवम मालवीय ने साइबर बुलिंग के बारे में जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को बताया कि ऑनलाइन किसी को परेशान करना, अपमानजनक संदेश भेजना या किसी की निजी जानकारी का अनुचित इस्तेमाल करना गंभीर समस्या बन सकता है। ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों को चुप रहने के बजाय किसी भरोसेमंद अभिभावक, शिक्षक या संबंधित अधिकारी से मदद लेनी चाहिए। साथ ही, आपत्तिजनक संदेशों और संबंधित गतिविधियों के स्क्रीनशॉट जैसे साक्ष्य सुरक्षित रखना तथा संबंधित प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज करना उपयोगी हो सकता है।

इसके अलावा, छात्रों को अपनी तस्वीरें, व्यक्तिगत विवरण और अन्य संवेदनशील जानकारी इंटरनेट पर साझा करने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी गई। किसी अनजान व्यक्ति से ऑनलाइन बातचीत करते समय भी सतर्क रहना चाहिए। इस तरह की छोटी-छोटी सावधानियां विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग करने में मदद कर सकती हैं।

साइबर ठगी होने पर हेल्पलाइन 1930 की जानकारी

कार्यशाला में साइबर अपराध की शिकायत करने के तरीकों के बारे में भी बताया गया। विशेषज्ञ ने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 की जानकारी देते हुए समझाया कि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर पीड़ित व्यक्ति को जल्द से जल्द शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय पर सूचना देने से संबंधित एजेंसियों को लेनदेन पर आवश्यक कार्रवाई करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, धनराशि वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।

विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि साइबर अपराध का शिकार होने पर घबराने के बजाय तत्काल उचित कदम उठाना चाहिए। यदि किसी खाते से संदिग्ध लेनदेन होता है, तो बैंक को सूचना देने और आधिकारिक साइबर अपराध शिकायत माध्यमों का उपयोग करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

इस प्रकार कार्यशाला में साइबर सुरक्षा को केवल तकनीकी विषय के रूप में नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकता के रूप में प्रस्तुत किया गया।

सम्राट वर्मा और निम्शा इमरान बने मिशन निडर वॉरियर

कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए सम्राट वर्मा और निम्शा इमरान को मिशन निडर वॉरियर के रूप में सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी बेहतरीन सहभागिता के लिए दिया गया। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में साइबर सुरक्षा के प्रति रुचि बढ़ाना और उन्हें अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करने के लिए प्रेरित करना था।

मिशन निडर की संस्थापक शिखा शुक्ला ने कहा कि संस्था का उद्देश्य बच्चों को साइबर खतरों के प्रति जागरूक बनाकर उन्हें डिजिटल वॉरियर के रूप में तैयार करना है। उन्होंने कहा कि जागरूक विद्यार्थी न केवल स्वयं को ऑनलाइन खतरों से सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि अपने परिवार, मित्रों और समाज के अन्य लोगों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक कर सकते हैं।

उन्होंने इस तरह के कार्यक्रमों को डिजिटल सुरक्षा की दिशा में उपयोगी पहल बताया। वर्तमान समय में जब शिक्षा और संवाद के अनेक माध्यम ऑनलाइन हो रहे हैं, तब बच्चों को इंटरनेट के जिम्मेदार इस्तेमाल की जानकारी देना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

विद्यालय प्रबंधन ने मिशन निडर के प्रयासों की सराहना की

कार्यशाला का समापन मिशन निडर की टीम की ओर से प्रतिमा गुप्ता ने किया। इस अवसर पर तुलिका मित्रा भी उपस्थित रहीं। वहीं, यूनाइटेड पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या ज्योति दास ने मिशन निडर के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के लिए इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं।

उन्होंने साइबर सुरक्षा के प्रति बच्चों को जागरूक करने की पहल को उपयोगी बताया। कार्यक्रम का सफल समन्वय विद्यालय की एक्टिविटी कोऑर्डिनेटर अमिता जोशी ने किया।