नवी मुंबई में 20 दिसंबर को होगा ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस का विराट राष्ट्रीय अधिवेशन, 70 से अधिक देशों की भागीदारी प्रस्तावित

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रिपोर्ट – अंजनी मिश्रा 

अमेठी/मुंबई/पटना/लखनऊ: ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (GKC) की ओर से 20 दिसंबर 2026 को महाराष्ट्र के नवी मुंबई में विराट राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले कायस्थ समाज के प्रतिनिधियों की भागीदारी प्रस्तावित है। आयोजकों के अनुसार, 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधि प्रत्यक्ष और डिजिटल माध्यम से इस अधिवेशन से जुड़ सकते हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कायस्थ समाज को एक साझा मंच पर लाना, सामाजिक एकता को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर संवाद को मजबूत करना है।

जीकेसी मीडिया प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने अधिवेशन की जानकारी देते हुए बताया कि संगठन इस आयोजन के माध्यम से देश और दुनिया में बसे कायस्थ परिवारों के बीच संपर्क तथा सहभागिता को बढ़ावा देना चाहता है। इसके साथ ही, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक व्यापक मंच उपलब्ध कराने की योजना है।

कायस्थ समाज को वैश्विक मंच पर जोड़ने की पहल

ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस का प्रस्तावित राष्ट्रीय अधिवेशन समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है। आज के दौर में विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदायों के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध बनाए रखना महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह अधिवेशन कायस्थ समाज के लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने और अपने विचार साझा करने का अवसर प्रदान कर सकता है।

जीकेसी के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि संगठन देश के सभी राज्यों और विदेशों में निवास कर रहे कायस्थ परिवारों को एक मंच पर जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि अधिवेशन के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद, सहभागिता और संगठनात्मक समन्वय को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

उनके अनुसार, इस तरह के आयोजन समाज के लोगों को आपसी संपर्क बढ़ाने के साथ-साथ साझा उद्देश्यों पर विचार-विमर्श करने का अवसर देते हैं। इसके अलावा, विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले प्रतिनिधियों के अनुभवों से संगठन को नई दिशा देने में भी मदद मिल सकती है।

सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं पर रहेगा विशेष जोर

इस अधिवेशन की प्रमुख विशेषताओं में कायस्थ समाज की सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और ऐतिहासिक योगदान को महत्व देना शामिल है। आयोजकों के मुताबिक, करीब चार घंटे तक चलने वाले कार्यक्रम का लगभग 50 प्रतिशत समय इन्हीं विषयों को समर्पित रहेगा।

इस दौरान समाज की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े विषयों पर चर्चा किए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराना और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

संगठन की न्यासी रागिनी रंजन ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कायस्थ समाज को एक मंच पर लाने की दिशा में यह अधिवेशन महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने इस तरह के आयोजनों को समाज के बीच संपर्क और सहभागिता बढ़ाने का माध्यम बताया।

वहीं, संगठन की ओर से सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए समाज की परंपराओं को आगे बढ़ाने और विभिन्न पीढ़ियों के बीच संवाद स्थापित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

नई पीढ़ी तक पहुंचेगी सांस्कृतिक विरासत

जीकेसी के कला संस्कृति प्रकोष्ठ के ग्लोबल महासचिव पवन सक्सेना ने बताया कि अधिवेशन के माध्यम से कायस्थ समाज की संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक योगदान से जुड़ी होती है। इसलिए इन मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। इस दिशा में सामूहिक प्रयासों और सामाजिक सहभागिता की अहम भूमिका हो सकती है।

इसी क्रम में, अधिवेशन को केवल एक संगठनात्मक बैठक तक सीमित रखने के बजाय सामाजिक और सांस्कृतिक संवाद के अवसर के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। आयोजकों की योजना है कि विभिन्न देशों और राज्यों से जुड़ने वाले प्रतिनिधि अपने विचारों तथा अनुभवों को साझा कर सकें।

प्रत्यक्ष और डिजिटल माध्यम से जुड़ेंगे प्रतिनिधि

प्रस्तावित अधिवेशन में 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। विदेशों और देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले प्रतिनिधियों के लिए प्रत्यक्ष उपस्थिति के साथ डिजिटल माध्यम से जुड़ने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

इस व्यवस्था से उन लोगों को भी कार्यक्रम में सहभागिता का अवसर मिल सकता है, जो दूरी या अन्य कारणों से नवी मुंबई नहीं पहुंच पाएंगे। इसके अलावा, डिजिटल माध्यम वैश्विक स्तर पर समाज के सदस्यों के बीच संपर्क स्थापित करने में सहायक हो सकता है।

हालांकि, वास्तविक भागीदारी और डिजिटल सहभागिता का अंतिम आंकड़ा आयोजन के समय स्पष्ट होगा। फिलहाल आयोजकों की ओर से व्यापक स्तर पर प्रतिनिधियों को जोड़ने की योजना साझा की गई है।

20 दिसंबर के आयोजन पर टिकी नजरें

ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस का विराट राष्ट्रीय अधिवेशन 20 दिसंबर 2026 को नवी मुंबई में प्रस्तावित है। आयोजन के जरिए सामाजिक एकता, संगठनात्मक समन्वय और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे विषयों को प्रमुखता देने की तैयारी है।

कुल मिलाकर, यह अधिवेशन देश और विदेश में रहने वाले कायस्थ समाज के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने की पहल है। यदि प्रस्तावित भागीदारी व्यापक रूप लेती है, तो इससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद और संपर्क को बढ़ावा मिल सकता है। अब आयोजन की तैयारियों और प्रतिनिधियों की भागीदारी से जुड़ी आगे की जानकारी पर नजर रहेगी।

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