बांदा की मुरवल सहकारी समिति में खाद वितरण की जांच, स्टॉक और रिकॉर्ड में अनियमितताओं पर कार्रवाई के संकेत

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रिपोर्ट – हर्ष वर्मा 

बांदा: जनपद की बी-पैक्स सहकारी समिति मुरवल में खाद वितरण व्यवस्था को लेकर प्राप्त शिकायतों के बाद जिला कृषि अधिकारी ने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्टॉक, बिक्री रजिस्टर और वितरण प्रक्रिया से जुड़े कई बिंदुओं की जांच की गई। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान कुछ अनियमितताएं प्रारंभिक रूप से सामने आई हैं, जिनकी विस्तृत जांच कराई जा रही है। संबंधित मामलों में आवश्यक विधिक कार्रवाई भी नियमानुसार की जाएगी।

इस कार्रवाई के बाद सहकारी समिति के संचालन और खाद वितरण व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं किसान संगठनों ने भी पूरे मामले में पारदर्शी जांच और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के बाद हुआ औचक निरीक्षण

जानकारी के अनुसार किसानों की ओर से खाद वितरण में कथित गड़बड़ियों की शिकायत मिलने के बाद जिला कृषि अधिकारी संजय कुमार ने शुक्रवार को बी-पैक्स सहकारी समिति मुरवल का अचानक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने उपलब्ध स्टॉक, बिक्री रजिस्टर, वितरण रिकॉर्ड तथा अन्य अभिलेखों का मिलान किया। इसके साथ ही कई किसानों से दूरभाष पर संपर्क कर वितरण संबंधी जानकारी भी प्राप्त की गई।

किसानों से बातचीत में सामने आए सवाल

जांच के दौरान अधिकारियों ने बिक्री रजिस्टर में दर्ज कुछ प्रविष्टियों का मिलान किसानों से फोन पर प्राप्त जानकारी से किया। अधिकारियों के अनुसार कुछ मामलों में रिकॉर्ड और किसानों द्वारा दी गई जानकारी में अंतर पाया गया।

इसी आधार पर जांच टीम ने संबंधित अभिलेखों और वितरण प्रक्रिया की गहन जांच शुरू कर दी। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

स्टॉक का भी किया गया सत्यापन

निरीक्षण के दौरान समिति में उपलब्ध उर्वरकों के भौतिक स्टॉक का भी सत्यापन किया गया। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार डीएपी उर्वरक के स्टॉक और अभिलेखों में अंतर मिलने की बात सामने आई है। इसके अलावा अन्य उर्वरकों के आवागमन और उपलब्धता से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

अधिकारियों ने कहा कि स्टॉक में किसी भी प्रकार की कमी या रिकॉर्ड में अंतर पाए जाने पर उसकी जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी।

उर्वरकों की आपूर्ति और रिकॉर्ड की जांच जारी

जांच के दौरान यह भी देखा गया कि कुछ उर्वरकों की आपूर्ति, ई-वे बिल और वास्तविक उपलब्धता के बीच सामंजस्य की जांच आवश्यक है। इसी उद्देश्य से संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित कर उनका परीक्षण किया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी त्रुटि या अनियमितता सिद्ध होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

उर्वरक के नमूने भी लिए गए

निरीक्षण के दौरान जिला कृषि अधिकारी ने डीएपी के साथ-साथ किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे कुछ अन्य उत्पादों के नमूने भी लिए। इन नमूनों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही संबंधित उत्पादों की गुणवत्ता और मानकों के अनुरूप होने की पुष्टि की जा सकेगी।

जिला कृषि अधिकारी ने दिए जांच के निर्देश

जिला कृषि अधिकारी संजय कुमार ने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्टॉक, वितरण और अभिलेखों में जो भी विसंगतियां सामने आई हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद यदि किसी की जिम्मेदारी तय होती है, तो उसके विरुद्ध संबंधित कानूनों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

किसान संगठन ने की कार्रवाई की मांग

भारतीय किसान यूनियन (अरा.) के जिलाध्यक्ष महेंद्र त्रिपाठी ने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि जांच में अनियमितताएं सिद्ध होती हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों का उद्देश्य किसानों को समय पर उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराना है। इसलिए पारदर्शिता बनाए रखना सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी है।

प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर नजर

निरीक्षण के बाद संबंधित समिति में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अधिकारी दस्तावेजों की जांच, स्टॉक सत्यापन और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण कर रहे हैं। इसके साथ ही संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों से भी आवश्यक जानकारी ली जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएंगे।

किसानों के हितों की सुरक्षा पर जोर

कृषि विभाग ने दोहराया है कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। यदि कहीं भी नियमों का उल्लंघन या अनियमितता पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने किसानों से भी अपील की है कि खाद खरीदते समय रसीद अवश्य लें और किसी भी प्रकार की शिकायत होने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

बांदा की बी-पैक्स सहकारी समिति मुरवल में खाद वितरण से जुड़े मामले की जांच फिलहाल जारी है। जिला कृषि अधिकारी द्वारा किए गए निरीक्षण में स्टॉक और अभिलेखों से जुड़े कुछ बिंदुओं पर विस्तृत जांच शुरू की गई है। वहीं किसान संगठनों ने भी निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई है।

अब पूरे मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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