कानपुर में हिंदू आध्यात्मिक सेवा मेला की तैयारियां हुईं शुरू, दो दिवसीय बैठक में बनी रणनीति, पढ़िए जरुर

1d7083a7-c0cd-4ad3-b802-f6ac8f158e9b

Digital UP News Desk 

कानपुर: नवंबर माह में आयोजित होने वाले हिंदू आध्यात्मिक सेवा मेला की तैयारियों को लेकर रविवार से दो दिवसीय संगठनात्मक बैठक का शुभारंभ हुआ। हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस बैठक में सेवा मेला की रूपरेखा, सेवा कार्यों के प्रदर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, मेला प्रबंधन, प्रचार-प्रसार और शिक्षा समूह की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का आयोजन पंडित दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय, नवाबगंज में किया गया, जिसमें विभिन्न समितियों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

बैठक का उद्देश्य आगामी सेवा मेला को सुव्यवस्थित, प्रभावी और जनसहभागिता पर आधारित बनाना है। आयोजकों ने बताया कि इस मेले के माध्यम से समाज सेवा से जुड़े विभिन्न संगठनों के कार्यों को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इन गतिविधियों से जुड़ सकें और सेवा कार्यों के प्रति जागरूकता बढ़े।

नवंबर में आयोजित होगा हिंदू आध्यात्मिक सेवा मेला

हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा फाउंडेशन प्रत्येक वर्ष सेवा, संस्कृति और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सेवा मेला आयोजित करता है। इस वर्ष भी नवंबर माह में प्रस्तावित मेला कई सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहेगा।

आयोजकों के अनुसार, मेले में विभिन्न सेवा संगठनों द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, गौ सेवा, महिला सशक्तिकरण, संस्कार निर्माण और समाज कल्याण से जुड़े कार्यों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके अतिरिक्त सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और जनजागरूकता कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा।

सेवा कार्यों को समाज के सामने लाने का प्रयास

बैठक में बताया गया कि सेवा मेला का प्रमुख उद्देश्य समाज में सकारात्मक कार्य कर रहे संगठनों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से आम नागरिकों को यह जानकारी मिलेगी कि विभिन्न संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में किस प्रकार कार्य कर रही हैं।

आयोजकों का मानना है कि जब सेवा कार्यों की जानकारी समाज तक पहुंचेगी, तब अधिक लोग इन अभियानों से जुड़ेंगे और जनभागीदारी भी बढ़ेगी।

सोमकांत शर्मा ने बताए आयोजन के उद्देश्य

बैठक को संबोधित करते हुए हिंदू आध्यात्मिक सेवा संस्थान के अखिल भारतीय पदाधिकारी सोमकांत शर्मा ने कहा कि सेवा मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम पारिवारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संस्थागत व्यक्तित्व निर्माण, चरित्र निर्माण और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर समाज को जागरूक करने की आवश्यकता है। सेवा मेला इन सभी विषयों को एक साथ जोड़कर समाज में सकारात्मक संदेश देने का कार्य करेगा।

मेला प्रबंधन और प्रचार-प्रसार पर हुई चर्चा

दो दिवसीय बैठक में मेला प्रबंधन, प्रचार-प्रसार और शिक्षा समूह की अलग-अलग समितियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान आयोजन की रूपरेखा, जिम्मेदारियों का निर्धारण, कार्यों के विभाजन और समयबद्ध तैयारी पर विशेष जोर दिया गया।

सोमकांत शर्मा ने संबंधित समितियों को आयोजन के सफल संचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक समिति अपने दायित्वों का समय पर निर्वहन करे, ताकि आयोजन सुव्यवस्थित और सफल हो सके।

शिक्षा समूह की भूमिका पर भी दिया गया जोर

बैठक में शिक्षा समूह की भूमिका पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। आयोजकों ने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाले विभिन्न संगठन सेवा मेला के दौरान अपने कार्यों की जानकारी देंगे। इसके अलावा विद्यार्थियों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक गतिविधियों का भी आयोजन किया जाएगा।

पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा और संस्कार समाज के विकास की आधारशिला हैं। इसलिए सेवा मेला के माध्यम से इन विषयों को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा विशेष स्थान

बैठक में पर्यावरण संरक्षण को भी आयोजन का महत्वपूर्ण विषय बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संतुलन बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। इसलिए सेवा मेला में वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

इसके साथ ही समाज के विभिन्न वर्गों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने की भी योजना बनाई गई।

बड़ी संख्या में शामिल हुए पदाधिकारी और कार्यकर्ता

दो दिवसीय बैठक में महानगर अध्यक्ष संजीव दीक्षित, महानगर संयोजक नवेन्दु शुक्ल, मेला संयोजक अरविंद दीक्षित, पूर्वी उत्तर प्रदेश संयोजक अमरनाथ, डॉ. शैलेन्द्र द्विवेदी, डॉ. राहुल मिश्रा, अजीत अग्रवाल, डॉ. उमेश पालीवाल, विपिन शुक्ला, पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक सतीश तिवारी, श्रीकृष्ण दीक्षित (बड़े जी), अनिकेत मिश्रा, सुष्मित मिश्रा, डॉ. मनोज अवस्थी, चंद्रदीप सिंह, श्याम सुंदर गुप्ता, डॉ. पंकज शुक्ला, रोहित कन्नौजिया, आदित्य पोद्दार, शैलजा रावत सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

सभी पदाधिकारियों ने अपने-अपने दायित्वों के अनुसार आगामी तैयारियों को समय पर पूरा करने का संकल्प लिया।

जनभागीदारी बढ़ाने पर रहेगा विशेष जोर

आयोजकों ने बताया कि इस वर्ष सेवा मेला को अधिक जनसहभागिता वाला आयोजन बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवकों, युवाओं और आम नागरिकों को भी इस अभियान से जोड़ने की योजना बनाई गई है।

उनका मानना है कि जब समाज के विभिन्न वर्ग एक साथ सेवा और संस्कार के उद्देश्य से जुड़ेंगे, तभी ऐसे आयोजनों का व्यापक प्रभाव दिखाई देगा।

कानपुर में नवंबर माह में प्रस्तावित हिंदू आध्यात्मिक सेवा मेला की तैयारियों को लेकर शुरू हुई दो दिवसीय बैठक में आयोजन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत रणनीति तैयार की गई। बैठक में सेवा कार्यों के प्रदर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, प्रचार-प्रसार और मेला प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया।

आयोजकों ने विश्वास जताया कि सभी समितियों के समन्वित प्रयास और समाज की सक्रिय भागीदारी से इस वर्ष का सेवा मेला सफल, सुव्यवस्थित और समाज के लिए प्रेरणादायक सिद्ध होगा।

You may have missed