कानपुर में अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों ने कैशलेस इलाज योजना का किया बहिष्कार, विनियमितीकरण की मांग
रिपोर्ट – हनुमंत सिंह
कानपुर: अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ ने शिक्षकों के विनियमितीकरण और सेवा संबंधी मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की है। संघ के पदाधिकारी अपनी मांगों को लेकर कानपुर के जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। इस दौरान शिक्षकों ने प्रदेश सरकार की कैशलेस चिकित्सा सुविधा का विरोध जताते हुए योजना के तहत मिले कार्ड वापस करने की बात कही।
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक स्ववित्तपोषित शिक्षकों को सम्मानजनक वेतन, सेवा सुरक्षा और नियमित सेवा से जुड़े अधिकार नहीं मिलते, तब तक केवल कैशलेस इलाज की सुविधा उनके लिए पर्याप्त नहीं है। इसी कारण संघ ने कैशलेस चिकित्सा योजना के बहिष्कार का निर्णय लिया है।
डीएम कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ के पदाधिकारी अपनी मांगों को लेकर डीएम कार्यालय पहुंचे। उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मुख्य रूप से स्ववित्तपोषित शिक्षकों के विनियमितीकरण की मांग उठाई गई।
संघ का कहना है कि प्रदेश के अनुदानित महाविद्यालयों में लंबे समय से स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं और इन पाठ्यक्रमों में बड़ी संख्या में शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं। संघ की ओर से प्रदेश में 331 अनुदानित महाविद्यालय होने की बात कही गई है। पूर्व में भी स्ववित्तपोषित शिक्षकों की संख्या और उनके विनियमितीकरण की मांग को लेकर शासन स्तर पर चर्चा होती रही है।
2006 के प्रावधान का दिया हवाला
शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने अपनी मांग के समर्थन में वर्ष 2006 में हुए प्रावधान का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि उस समय कुछ श्रेणी के शिक्षकों को विनियमित किए जाने की प्रक्रिया अपनाई गई थी। संघ का दावा है कि इसी तरह की व्यवस्था के आधार पर वर्तमान में कार्यरत स्ववित्तपोषित शिक्षकों के विनियमितीकरण पर भी विचार किया जाना चाहिए।
संघ की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2006 में प्रदेश के 24 अनुदानित महाविद्यालयों में स्ववित्तपोषित बीएड पाठ्यक्रम के शिक्षकों के विनियमितीकरण का उल्लेख किया गया है।
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि उस समय जिन शिक्षकों को नियमित सेवा का लाभ मिला, उसी प्रकार वर्तमान में वर्षों से कार्यरत शिक्षकों की मांग पर भी सरकार को विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में शिक्षक लंबे समय से स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
करीब तीन हजार शिक्षकों के विनियमितीकरण की मांग
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में करीब तीन हजार स्ववित्तपोषित शिक्षक अभी भी विनियमितीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हालांकि, अलग-अलग समय की रिपोर्टों में शिक्षकों की संख्या अलग बताई गई है। वर्ष 2022 की एक रिपोर्ट में 3920 शिक्षकों के विनियमितीकरण से जुड़ी प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था।
वहीं, 2023 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 331 अनुदानित महाविद्यालयों में संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत अनुमोदित शिक्षकों का विवरण जुटाने की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में संघ की ओर से करीब तीन हजार शिक्षकों के विनियमितीकरण की मांग भी बताई गई थी।
इसलिए वर्तमान ज्ञापन में संघ की ओर से बताई गई संख्या को उसकी मांग और दावे के रूप में देखा जा रहा है।
कैशलेस इलाज योजना के कार्ड लौटाने की बात
शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उनका कहना है कि शिक्षकों को दिए गए कैशलेस इलाज के कार्ड वापस किए जाएंगे। संघ का तर्क है कि चिकित्सा सुविधा उपयोगी है, लेकिन इसके साथ शिक्षकों के वेतन और सेवा सुरक्षा जैसे मूल मुद्दों का समाधान भी जरूरी है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षकों और शिक्षा कार्मिकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जुड़े फैसले किए हैं। जनवरी 2026 में मंत्रिपरिषद ने बेसिक शिक्षा से जुड़े विभिन्न शिक्षक एवं कार्मिक वर्गों तथा उनके आश्रितों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा को मंजूरी दी थी।
इसके बाद उच्च शिक्षा क्षेत्र के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, स्ववित्तपोषित कॉलेजों और राज्य विश्वविद्यालयों के शिक्षकों तथा उनके आश्रितों के लिए भी कैशलेस इलाज की सुविधा से संबंधित निर्देश जारी हुए।
हालांकि, अनुदानित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित शिक्षकों का कहना है कि उनकी प्राथमिक मांग सेवा शर्तों और विनियमितीकरण से जुड़ी है।
सम्मानजनक वेतन और सेवा सुरक्षा पर जोर
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षक लंबे समय से महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें सम्मानजनक वेतन और सेवा सुरक्षा मिलना जरूरी है। उनका कहना है कि यदि शिक्षकों की सेवा स्थिति स्पष्ट होती है तो वे अधिक स्थिरता और बेहतर तरीके से अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे।
इसी क्रम में संघ ने शासन से मांग की है कि स्ववित्तपोषित शिक्षकों की स्थिति पर गंभीरता से विचार किया जाए और विनियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
शिक्षक बोले- मांग पूरी होने तक जारी रहेगा प्रयास
डीएम कार्यालय में ज्ञापन देने पहुंचे संघ पदाधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य सरकार तक शिक्षकों की समस्याओं को पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मांग केवल एक सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वेतन, सेवा सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता जैसे विषय भी शामिल हैं।
इस दौरान असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अरुणेश अवस्थी ने शिक्षकों की मांगों को सामने रखा। संघ का कहना है कि वह संबंधित विभाग और शासन के समक्ष अपनी मांगों को लगातार उठाता रहेगा।
इस तरह, कानपुर में अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ का ज्ञापन कार्यक्रम एक बार फिर स्ववित्तपोषित शिक्षकों के विनियमितीकरण और सेवा शर्तों के मुद्दे को सामने लेकर आया है। अब शिक्षकों की नजर शासन स्तर पर होने वाली आगे की कार्रवाई पर है।

