कानपुर कांशीराम अस्पताल में ड्राइवर के मरीजों को दवा लिखने का दावा, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

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Digital UP News Desk

कानपुर: रामादेवी स्थित कांशीराम अस्पताल में मरीजों के इलाज और अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर एक मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक युवक डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर मरीजों से बातचीत करता और कथित तौर पर उन्हें दवा लिखता दिखाई दे रहा है। दावा किया जा रहा है कि वीडियो में नजर आ रहा युवक अस्पताल में ईएमओ पद पर तैनात डॉ. रामकेश का ड्राइवर देव है।

बताया जा रहा है कि जिस समय यह घटना हुई, उस दौरान डॉ. रामकेश कोर्ट में एविडेंस के लिए पेशी पर गए थे। इसी बीच कथित तौर पर उनका ड्राइवर ओपीडी कक्ष में मौजूद था। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लिया है। हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की भूमिका और मरीजों को दवा लिखे जाने की पूरी परिस्थितियां जांच के बाद ही स्पष्ट होंगी।

वायरल वीडियो के बाद अस्पताल प्रशासन सक्रिय

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक युवक ओपीडी कक्ष में डॉक्टर की कुर्सी पर बैठा दिखाई देता है। वीडियो में वह मरीजों से बातचीत करता नजर आ रहा है। साथ ही, दावा है कि युवक मरीजों के लिए दवा भी लिख रहा था।

वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला अस्पताल प्रशासन तक पहुंचा। इसके बाद कांशीराम अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक यानी सीएमएस डॉ. पीयूष मिश्रा ने मामले का संज्ञान लिया।

सीएमएस के अनुसार, सोमवार शाम वीडियो उनके संज्ञान में आया था। इसके बाद मंगलवार सुबह अस्पताल में चेकिंग कराई गई। जांच के दौरान कोई बाहरी व्यक्ति मौके पर नहीं मिला। इसके साथ ही संबंधित डॉक्टर से भी इस मामले में जानकारी ली गई।

डॉक्टर के कोर्ट जाने की बात सामने आई

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पूछताछ में डॉ. रामकेश ने बताया कि वह कोर्ट एविडेंस के लिए पेशी पर गए थे। इसी दौरान वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले युवक के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने उसे संभवतः अपना ड्राइवर बताया।

हालांकि, इस पूरे मामले में अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया था, उसमें दिखाई देने वाला व्यक्ति वास्तव में कौन है और उसने मरीजों को दवा लिखी थी या नहीं। इन बिंदुओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित डॉक्टर से स्पष्टीकरण मांगा है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय किए जाने की बात कही गई है।

मरीजों को दवा लिखने के दावे की होगी जांच

इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वायरल वीडियो में मरीजों को दवा लिखे जाने का दावा है। यदि कोई ऐसा व्यक्ति, जो चिकित्सक नहीं है, मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श या दवा लिखता है, तो इससे अस्पताल की उपचार व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ सकते हैं।

हालांकि, वर्तमान मामले में यह बात अभी जांच का विषय है कि वीडियो में दिखाई दे रहा युवक वास्तव में मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श दे रहा था या नहीं। इसके अलावा, यदि दवा लिखी गई थी तो किस परिस्थिति में और किसकी अनुमति से ऐसा किया गया, यह भी जांच के दौरान स्पष्ट किया जाना बाकी है।

अस्पताल प्रशासन ने इसी वजह से संबंधित डॉक्टर से स्पष्टीकरण मांगा है। जांच के बाद तथ्य सामने आने पर जिम्मेदारी तय किए जाने की संभावना है।

सीएमएस ने कार्रवाई की चेतावनी दी

कांशीराम अस्पताल के सीएमएस डॉ. पीयूष मिश्रा ने बताया कि मामले को लेकर संबंधित डॉक्टर से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा सामने आती है तो डॉक्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ एफआईआर कराने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।

इसके अलावा, मामले की रिपोर्ट शासन को भेजे जाने की बात भी कही गई है। इससे संकेत मिलता है कि अस्पताल प्रशासन इस प्रकरण को केवल आंतरिक स्तर तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी में है।

हालांकि, फिलहाल किसी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम कार्रवाई या दोष तय होने की स्थिति सामने नहीं आई है। इसलिए जांच पूरी होने तक वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों को अंतिम तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दा

सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज उपचार और परामर्श के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में ओपीडी व्यवस्था में चिकित्सकीय जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण महत्वपूर्ण होता है। डॉक्टर की अनुपस्थिति में मरीजों को कौन देखेगा, किस स्तर का स्वास्थ्यकर्मी परामर्श दे सकता है और दवा लिखने का अधिकार किसके पास है, इन सभी पहलुओं का पालन अस्पताल की व्यवस्था के अनुसार किया जाना जरूरी है।

कांशीराम अस्पताल के इस मामले ने इसी व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। वायरल वीडियो के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से चेकिंग और स्पष्टीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है।

मरीजों के लिए भी यह जरूरी है कि वे किसी भी चिकित्सकीय सलाह या दवा के संबंध में अस्पताल के अधिकृत डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों से ही जानकारी लें।

वायरल वीडियो की पुष्टि भी जांच का हिस्सा

सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो कई बार किसी घटना का केवल एक हिस्सा दिखाते हैं। ऐसे में वीडियो की तारीख, स्थान, उसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान और घटना की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि आवश्यक होती है।

कांशीराम अस्पताल के मामले में भी वायरल वीडियो के आधार पर कई सवाल उठे हैं। अब जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि वीडियो कब और किस ओपीडी कक्ष में बनाया गया, उसमें दिखाई देने वाला युवक कौन है और उस समय उसकी भूमिका क्या थी।

इसके अलावा, यदि मरीजों को दवा लिखे जाने का दावा सही पाया जाता है तो इसकी परिस्थितियों और जिम्मेदारी की भी जांच की जाएगी।

अस्पताल प्रशासन ने मांगा स्पष्टीकरण

सीएमएस डॉ. पीयूष मिश्रा के अनुसार, संबंधित डॉक्टर से स्पष्टीकरण मांगा गया है। अस्पताल प्रशासन की ओर से चेकिंग भी कराई गई। फिलहाल कोई बाहरी व्यक्ति मौके पर नहीं मिला।

अब डॉक्टर की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी। प्रशासन ने दोबारा ऐसी घटना सामने आने की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर

कांशीराम अस्पताल में वायरल वीडियो से सामने आए इस मामले में फिलहाल कई बातें दावे के स्तर पर हैं। वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान, उसकी भूमिका और मरीजों को दवा लिखे जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित डॉक्टर से स्पष्टीकरण मांगा है और जांच की प्रक्रिया शुरू की है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।

इस मामले ने सरकारी अस्पतालों में ओपीडी व्यवस्था, डॉक्टरों की उपलब्धता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को जरूर सामने ला दिया है। अब सभी की नजर जांच के निष्कर्ष और अस्पताल प्रशासन की अगली कार्रवाई पर रहेगी।

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