मेरठ पुलिस लाइन भर्ती केंद्र से कंप्यूटर और CCTV DVR चोरी, संवेदनशील डेटा को लेकर उठे सवाल

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Digital UP News Desk

मेरठ: उत्तर प्रदेश पुलिस की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मेरठ पुलिस लाइन स्थित DV/PST केंद्र से कंप्यूटर और सीसीटीवी सिस्टम से संबंधित उपकरण चोरी होने का मामला सामने आया है। दस्तावेज सत्यापन एवं शारीरिक मानक परीक्षण केंद्र से कंप्यूटर गायब होने के साथ सीसीटीवी कैमरों के तार काटे जाने और DVR की हार्ड डिस्क निकाले जाने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामला संवेदनशील इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह केंद्र पुलिस और होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पुलिस भर्ती का डेटा सुरक्षित है और उसकी एक कॉपी पुलिस लाइन के डबल लॉक में रखी गई थी। वहीं, होमगार्ड भर्ती से संबंधित डेटा के कंप्यूटर से जुड़े होने की बात सामने आने के बाद मामले की गंभीरता बढ़ गई है।

पुलिस ने कंप्यूटर और सीसीटीवी से जुड़े उपकरणों की बरामदगी के लिए विशेष टीमों को लगाया है। सर्विलांस और एसओजी की टीमें मामले की जांच कर रही हैं।

9 सितंबर को सामने आई चोरी की जानकारी

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 9 सितंबर को भर्ती केंद्र का ताला खोले जाने के बाद कंप्यूटर सिस्टम गायब मिला। इसके बाद अधिकारियों को घटना की जानकारी दी गई। पुलिस के अनुसार, केंद्र से कंप्यूटर के अलावा सीसीटीवी कैमरों से जुड़े DVR और उसकी दो हार्ड डिस्क भी गायब हैं।

घटना की खास बात यह है कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक केंद्र का ताला टूटा हुआ नहीं मिला। इसके अलावा, पुलिस लाइन के गेट नंबर तीन से लेकर भर्ती केंद्र तक लगाए गए सीसीटीवी कैमरों के तार भी काटे गए थे।

इस कारण जांच अधिकारियों के सामने यह सवाल है कि चोरी करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों ने परिसर में प्रवेश कैसे किया और बिना ताला तोड़े कंप्यूटर तथा अन्य उपकरण कैसे बाहर ले जाए गए। हालांकि, किसी कर्मचारी या अंदरूनी व्यक्ति की संलिप्तता की पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह पहलू भी जांच का हिस्सा बताया जा रहा है।

CCTV सिस्टम को निष्क्रिय करने का प्रयास

बताया गया है कि पुलिस लाइन के गेट नंबर तीन से भर्ती केंद्र तक कई सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों से जुड़े करीब 700 मीटर लंबे तार काटे जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा DVR की दो हार्ड डिस्क भी निकाल ली गईं।

सीसीटीवी सिस्टम के इस तरह प्रभावित होने से जांच में घटनास्थल से संबंधित वीडियो फुटेज हासिल करने में कठिनाई आ सकती है। यही वजह है कि पुलिस अब चोरी हुए उपकरणों के साथ-साथ आसपास के अन्य कैमरों और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से मामले की जांच कर रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग टीमों को लगाया गया है। जांच में सर्विलांस और एसओजी की मदद ली जा रही है।

भर्ती डेटा को लेकर क्या है स्थिति?

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल भर्ती प्रक्रिया से जुड़े डेटा की सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, पुलिस भर्ती का डेटा सुरक्षित है। अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद डेटा की एक कॉपी पुलिस लाइन के डबल लॉक में सुरक्षित रखी जाती है।

इस व्यवस्था के कारण पुलिस भर्ती से संबंधित डेटा के पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका नहीं है। हालांकि, जिस कंप्यूटर के चोरी होने की बात सामने आई है, उसमें होमगार्ड भर्ती से संबंधित डेटा होने की जानकारी दी गई है।

अधिकारियों के मुताबिक, होमगार्ड भर्ती का डेटा चोरी होने से कुछ व्यावहारिक परेशानियां पैदा हो सकती हैं। हालांकि, कार्यदायी संस्था के पास भी डेटा उपलब्ध होने के कारण भर्ती प्रक्रिया के पूरी तरह प्रभावित होने की संभावना कम बताई गई है।

इस संबंध में अंतिम स्थिति पुलिस की जांच और डेटा की तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

केंद्र के रखरखाव को लेकर भी जांच

बताया जा रहा है कि भर्ती केंद्र के रखरखाव की जिम्मेदारी लिपिक कमल सैनी के पास थी। स्क्रिप्ट में उनके संबंध में पूर्व भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा एक ऑडियो सामने आने और उस मामले में कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, इन पुराने आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं हुई है।

वर्तमान मामले में भी उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चोरी के मामले में उनकी ओर से दी गई तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि भर्ती केंद्र की सुरक्षा और कंप्यूटर सिस्टम की निगरानी की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी तथा चोरी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में किस तरह की चूक हुई।

पुलिस स्टोर से जुड़े कर्मचारी के घर भी जांच

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने जेपी स्टोर के संचालक हेड कांस्टेबल बेबी के कंकरखेड़ा स्थित घर पर भी छापेमारी की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने घर में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की और बच्चों के लैपटॉप तक खंगाले।

इस कार्रवाई के बाद कर्मचारी के बिना सूचना दिए घर छोड़कर चले जाने की बात सामने आई है। हालांकि, उनका इस चोरी से क्या संबंध है, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस की ओर से की जा रही इस तरह की जांच का उद्देश्य चोरी हुए कंप्यूटर और अन्य उपकरणों का सुराग हासिल करना तथा घटना में शामिल लोगों तक पहुंचना बताया जा रहा है।

एसपी क्राइम ने कहा- जल्द होगा खुलासा

पुलिस लाइन के नोडल अधिकारी और एसपी क्राइम अवनीश कुमार के अनुसार, भर्ती केंद्र से कंप्यूटर और सीसीटीवी कैमरे के DVR/हार्ड डिस्क चोरी होने का मामला दर्ज कर लिया गया है।

उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सर्विलांस और एसओजी समेत पुलिस की विशेष टीमों को लगाया गया है। टीमों का उद्देश्य चोरी हुए उपकरणों की बरामदगी और आरोपियों की पहचान करना है। पुलिस अधिकारी ने जल्द घटना का खुलासा किए जाने की बात कही है।

फिलहाल पुलिस आसपास के क्षेत्र में मौजूद सीसीटीवी कैमरों, तकनीकी साक्ष्यों और अन्य संभावित सुरागों की जांच कर रही है।

STF कार्यालय के पास घटना से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

मेरठ पुलिस लाइन में भर्ती केंद्र के आसपास सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद कंप्यूटर और सीसीटीवी सिस्टम से जुड़े उपकरण चोरी होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, भर्ती केंद्र के आसपास 25 से अधिक सीसीटीवी कैमरे और नजदीक ही एसटीएफ कार्यालय भी मौजूद है।

ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि घटना के समय सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी और सीसीटीवी सिस्टम को किस समय तथा किस तरीके से निष्क्रिय किया गया।

हालांकि, जांच पूरी होने से पहले सुरक्षा में किसी व्यक्ति विशेष की लापरवाही या मिलीभगत को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

डेटा सुरक्षा पर बढ़ी निगरानी की जरूरत

भर्ती जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में डिजिटल डेटा की सुरक्षा महत्वपूर्ण होती है। इस घटना के बाद पुलिस विभाग के सामने चोरी हुए कंप्यूटर और DVR की बरामदगी के साथ-साथ डेटा सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच भी अहम हो गई है।

पुलिस भर्ती का बैकअप सुरक्षित होने की जानकारी से भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल बड़े प्रभाव की आशंका कम होती है। वहीं, होमगार्ड भर्ती के डेटा से संबंधित स्थिति की तकनीकी जांच की जा रही है।

अब पुलिस की विशेष टीमें चोरी हुए कंप्यूटर, DVR और हार्ड डिस्क की तलाश में जुटी हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना को अंजाम देने वाले लोग कौन थे और उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह पार किया।

फिलहाल मामला जांच के अधीन है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने और उपकरण बरामद होने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।