तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में दसलक्षण महापर्व का भव्य शुभारंभ, उत्तम क्षमा धर्म की हुई आराधना
रिपोर्ट- मो अरशद
मुरादाबाद: तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) परिसर में दसलक्षण महापर्व-2026 का भव्य शुभारंभ विधि-विधान, श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण के बीच हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर मंगल ध्वनियों, “वंदितु सव्वसिद्धे” के मंगल उद्घोष और “जय जिनेंद्र” के जयघोष से गूंज उठा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, फैकल्टी सदस्यों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।
दसलक्षण महापर्व जैन धर्म में आत्मचिंतन, संयम और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इसी भावना के साथ टीएमयू परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विद्यार्थियों को धर्म के विभिन्न गुणों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया।
ध्वजारोहण के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन ने त्रैलोक्य मांगल्य विधायक ध्वजारोहण के साथ किया। ध्वजारोहण के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण देखने को मिला। इसके बाद दसलक्षण महापर्व से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत की गई।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में सौधर्म इंद्र के रूप में डीन मेडिकल एस.के. जैन ने श्रीजी को भक्तिभाव से अपने मस्तक पर धारण किया। इसके बाद श्रीजी को भव्य पालकी में विराजमान कराया गया। पालकी यात्रा को धार्मिक परंपराओं और विधि-विधान के साथ आगे बढ़ाया गया।
गाजे-बाजे के साथ निकली श्रीजी की पालकी
श्रीजी की पालकी जिनालय से परिसर स्थित रिद्धि-सिद्धि भवन तक ले जाई गई। इस दौरान गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और मंगल ध्वनियों से पूरा परिसर भक्तिमय नजर आया। पालकी यात्रा में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी श्रद्धापूर्वक हिस्सा लिया।
विद्यार्थियों की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष रूप से जीवंत बना दिया। धार्मिक आयोजन के दौरान विद्यार्थियों ने अनुशासन और श्रद्धा के साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। पालकी यात्रा के बाद श्रीजी को भव्य पांडुकशिला पर विधि-विधानपूर्वक विराजमान कराया गया।
इसके बाद धार्मिक अनुष्ठानों की प्रक्रिया आगे बढ़ी। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को जैन धर्म की परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया गया।
स्वर्ण कलश से भगवान का अभिषेक
दसलक्षण महापर्व के शुभारंभ अवसर पर छात्रों द्वारा स्वर्ण कलश से भगवान का अभिषेक किया गया। धार्मिक विधि के इस चरण में विद्यार्थियों ने श्रद्धा के साथ सहभागिता की।
वहीं, स्वर्ण झारी से शांतिधारा का पुण्य लाभ टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन, जीवीसी मनीष जैन और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन ने प्राप्त किया। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने भी रजत झारी से शांतिधारा कर धार्मिक अनुष्ठान में भागीदारी की।
शांतिधारा और अभिषेक के दौरान परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों ने धार्मिक अनुष्ठानों में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म की आराधना
दसलक्षण महापर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म की आराधना की गई। जैन धर्म में उत्तम क्षमा को आत्मसंयम और आत्मशुद्धि से जुड़े महत्वपूर्ण गुण के रूप में देखा जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों ने क्षमा, संयम और आत्मचिंतन के महत्व को समझने का प्रयास किया।
कार्यक्रम में टीएमयू के कुलपति प्रोफेसर वी.के. जैन सहित विभिन्न संकायों के फैकल्टी सदस्य और करीब 1000 छात्र-छात्राएं सामूहिक पूजा-अर्चना में शामिल हुए। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की मौजूदगी से आयोजन का स्वरूप व्यापक रहा।
सामूहिक पूजा के दौरान विद्यार्थियों ने धार्मिक विधियों में हिस्सा लिया और दसलक्षण महापर्व के प्रथम दिन की आराधना को श्रद्धापूर्वक संपन्न किया।
तत्त्वार्थ सूत्र के प्रथम अध्याय का वाचन
दसलक्षण महापर्व के शुभारंभ कार्यक्रम में जैन धर्म के सर्वमान्य ग्रंथ तत्त्वार्थ सूत्र, जिसे मोक्ष शास्त्र के नाम से भी जाना जाता है, के प्रथम अध्याय का वाचन किया गया।
तत्त्वार्थ सूत्र जैन दर्शन के प्रमुख ग्रंथों में शामिल है। इसके माध्यम से जैन दर्शन से जुड़े सिद्धांतों और आध्यात्मिक विचारों को समझने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम में ग्रंथ वाचन के जरिए विद्यार्थियों को जैन दर्शन की मूल अवधारणाओं से परिचित कराने का प्रयास किया गया।
इस दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ आध्यात्मिक चिंतन को भी आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। इससे कार्यक्रम केवल पूजा-अर्चना तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के लिए सीख और आत्मचिंतन का अवसर भी बना।
विद्यार्थियों को दिए गए धर्म के दस लक्षणों के संदेश
दसलक्षण महापर्व के माध्यम से श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों को उत्तम क्षमा सहित धर्म के दस लक्षणों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया गया। आयोजन के दौरान धर्म, संयम, आत्मचिंतन और सदाचार जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने पर जोर दिया गया।
आयोजकों के अनुसार, दसलक्षण महापर्व का उद्देश्य विद्यार्थियों में आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों को मजबूत करना है। इसके माध्यम से सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र की भावना को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय परिसर में इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ आत्मअनुशासन तथा सकारात्मक जीवन मूल्यों के प्रति जागरूक करने का माध्यम भी बन सकते हैं।
धर्म, शिक्षा और संस्कार का संगम
टीएमयू परिसर में आयोजित दसलक्षण महापर्व का कार्यक्रम धार्मिक आस्था और शैक्षणिक वातावरण के संगम के रूप में सामने आया। एक ओर जहां विद्यार्थियों ने पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया, वहीं दूसरी ओर उन्हें जैन दर्शन और उसके नैतिक मूल्यों को समझने का अवसर मिला।
दरअसल, दसलक्षण महापर्व के दौरान धर्म के दस लक्षणों पर केंद्रित आराधना की जाती है। इनमें उत्तम क्षमा के साथ विभिन्न आध्यात्मिक गुणों पर चिंतन किया जाता है। ऐसे में विश्वविद्यालय परिसर में इसका आयोजन विद्यार्थियों के लिए धार्मिक परंपरा को समझने का अवसर भी प्रदान करता है।
आयोजकों का कहना है कि महापर्व के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन में धर्म, संयम और आत्मकल्याण की भावना को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र की भावना को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
श्रद्धा और सहभागिता के साथ आगे बढ़ेगा महापर्व
दसलक्षण महापर्व-2026 के पहले दिन टीएमयू परिसर में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों ने भाग लिया। ध्वजारोहण से लेकर पालकी यात्रा, अभिषेक, शांतिधारा, सामूहिक पूजा और ग्रंथ वाचन तक विभिन्न धार्मिक गतिविधियां विधि-विधान के साथ संपन्न हुईं।
इस प्रकार, टीएमयू में दसलक्षण महापर्व का शुभारंभ धार्मिक श्रद्धा और आध्यात्मिक संदेश के साथ हुआ। पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म की आराधना के जरिए विद्यार्थियों को क्षमा, संयम और आत्मचिंतन के महत्व से परिचित कराया गया। आने वाले दिनों में भी महापर्व के तहत धर्म के विभिन्न लक्षणों पर केंद्रित धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

