काशी में स्थापित होगा 130 फीट ऊंचा शिवलिंग, 100 करोड़ से बनेगा भव्य शिव थीम पार्क
Digital UP News Desk
वाराणसी: धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी काशी में पर्यटन और शहरी सुविधाओं को एक नया स्वरूप देने की दिशा में बड़ी परियोजना प्रस्तावित है। वाराणसी नगर निगम की योजना के तहत भेलूपुर स्थित जलकल विभाग की करीब 20 एकड़ भूमि पर विश्वस्तरीय अर्बन पार्क विकसित किया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य आकर्षण करीब 130 फीट ऊंचा शिवलिंग होगा। इसके साथ ही पूरे पार्क को शिव थीम पर विकसित करने की योजना है। परियोजना पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई है।
20 एकड़ क्षेत्र में विकसित होगा पार्क
प्रस्तावित शिव थीम पार्क के लिए भेलूपुर स्थित जलकल विभाग की लगभग 20 एकड़ भूमि को चिन्हित किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस क्षेत्र को आधुनिक शहरी पार्क के रूप में विकसित करने के साथ-साथ काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य स्थानीय लोगों के लिए बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराने के साथ वाराणसी आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को एक नया आकर्षण देना है।
परियोजना को लेकर शासन स्तर से मंजूरी मिलने और टेंडर जारी होने की जानकारी भी सामने आई है। अधिकारियों की ओर से इसे निर्धारित समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अलग-अलग रिपोर्टों में निर्माण अवधि करीब 8 से 10 महीने बताई गई है। हालांकि, अंतिम समयसीमा निर्माण की प्रगति और परियोजना से जुड़े आधिकारिक अपडेट पर निर्भर करेगी।
130 फीट ऊंचा शिवलिंग होगा प्रमुख आकर्षण
इस प्रस्तावित पार्क की सबसे खास विशेषता 130 फीट ऊंचा शिवलिंग बताया जा रहा है। योजना के मुताबिक, विशाल शिवलिंग को पार्क के प्रमुख आकर्षण के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके आसपास लोगों के भ्रमण के लिए पाथवे बनाया जाएगा, ताकि आगंतुक पूरे परिसर को व्यवस्थित तरीके से देख सकें।
काशी का भगवान शिव से गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध है। ऐसे में शिव थीम पर आधारित इस परियोजना को शहर की मौजूदा आध्यात्मिक पहचान के अनुरूप विकसित करने की योजना है। हालांकि, इसे लेकर ‘दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग’ होने का दावा परियोजना की अंतिम संरचना और आधिकारिक मान्यता के बाद ही निश्चित रूप से स्थापित माना जाना चाहिए।
लेजर शो और आधुनिक तकनीक का होगा इस्तेमाल
पार्क को केवल पारंपरिक धार्मिक स्थल के तौर पर विकसित करने के बजाय इसमें आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल प्रस्तावित है। विशाल शिवलिंग के आसपास लेजर शो की योजना बताई गई है। इससे शाम के समय परिसर में आने वाले लोगों के लिए एक अलग तरह का दृश्य अनुभव तैयार किया जा सकता है।
इसके अलावा, पार्क में ओपन आर्ट गैलरी और अन्य डिजिटल या आधुनिक सुविधाओं को शामिल करने की योजना है। इस तरह परियोजना में धार्मिक, सांस्कृतिक और मनोरंजन से जुड़े पहलुओं को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
बच्चों के लिए हाईटेक सुविधाएं
प्रस्तावित अर्बन पार्क में बच्चों के लिए आधुनिक झूले और मनोरंजन क्षेत्र विकसित करने की योजना है। इससे यह स्थान केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवारों के लिए भी उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
पार्क में फूड प्लाजा या फूड कोर्ट जैसी सुविधा भी प्रस्तावित है। इसके जरिए यहां आने वाले लोगों को खान-पान की सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इस तरह एक ही परिसर में घूमने, मनोरंजन, कला, खान-पान और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े कई विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
काशी की कला और संस्कृति को भी मिलेगा स्थान
परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा काशी की कला और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करना भी बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, यहां ओपन आर्ट गैलरी और संग्रहालय जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इनमें काशी से जुड़ी प्रमुख हस्तियों, कलाकारों और देश की विभूतियों की जानकारी प्रदर्शित की जा सकती है।
इससे पार्क का स्वरूप केवल एक बड़े धार्मिक प्रतीक तक सीमित न रहकर सांस्कृतिक परिसर जैसा हो सकता है। काशी की कला, संगीत, साहित्य और सामाजिक विरासत को आधुनिक प्रस्तुति के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की संभावनाएं भी इस परियोजना से जुड़ी हैं।
प्लेनेटोरियम की भी योजना
परियोजना से जुड़ी जानकारी में अत्याधुनिक प्लेनेटोरियम बनाने की योजना का भी उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं को खगोल विज्ञान तथा ब्रह्मांड से जुड़ी जानकारी मनोरंजक तरीके से उपलब्ध कराना हो सकता है।
यदि यह सुविधा योजना के अनुसार विकसित होती है, तो पार्क में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ विज्ञान आधारित अनुभव भी उपलब्ध होगा। इससे परिवारों और विद्यार्थियों के लिए परिसर की उपयोगिता बढ़ सकती है।
पर्यटन को मिल सकता है नया आकर्षण
वाराणसी देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में शामिल है। काशी विश्वनाथ धाम, गंगा घाट और शहर की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराएं पहले से ही बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करती हैं। ऐसे में शिव थीम पार्क जैसी परियोजना शहर के पर्यटन मानचित्र में एक नया स्थान जोड़ सकती है।
हालांकि, परियोजना के पर्यटन पर वास्तविक प्रभाव का आकलन इसके पूरा होने और संचालन शुरू होने के बाद ही किया जा सकेगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे धार्मिक, सांस्कृतिक और शहरी सुविधाओं को जोड़ने वाली परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।
स्थानीय लोगों के लिए सार्वजनिक स्थान विकसित करने की कोशिश
परियोजना का एक उद्देश्य स्थानीय नागरिकों के लिए बेहतर सार्वजनिक और हरित क्षेत्र उपलब्ध कराना भी बताया गया है। बड़े क्षेत्र में विकसित होने वाला यह पार्क लोगों के लिए घूमने और परिवार के साथ समय बिताने का स्थान बन सकता है।
इसके अलावा, पाथवे, ग्रीन एरिया, मनोरंजन सुविधाएं और फूड प्लाजा जैसी व्यवस्थाएं इसे सामान्य शहरी पार्क से अलग स्वरूप दे सकती हैं। वहीं, कला और सांस्कृतिक प्रदर्शनी से काशी की विरासत को भी नए तरीके से प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
निर्माण पूरा होने के बाद स्पष्ट होगी तस्वीर
फिलहाल यह परियोजना निर्माण और विकास की प्रक्रिया में है। इसलिए पार्क में प्रस्तावित सभी सुविधाओं का अंतिम स्वरूप परियोजना के निर्माण और आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार स्पष्ट होगा। इसी तरह 130 फीट ऊंचे शिवलिंग की डिजाइन, निर्माण सामग्री, परिसर की अंतिम सुविधाएं और संचालन व्यवस्था से जुड़ी विस्तृत जानकारी आने वाले समय में सामने आ सकती है।
कुल मिलाकर, काशी में प्रस्तावित शिव थीम पार्क धार्मिक आस्था, आधुनिक शहरी सुविधाओं, कला और पर्यटन को एक ही परिसर में जोड़ने की योजना है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत और लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित यह परियोजना पूरी होने के बाद वाराणसी आने वाले लोगों के लिए एक नया सार्वजनिक और सांस्कृतिक स्थल उपलब्ध करा सकती है।

