सामाजिक कार्यकर्ता विनोद साहनी की हत्या पर निषाद समाज में आक्रोश, महासभा ने की कठोर कार्रवाई-मुआवजे की मांग
Digital UP News Desk
कानपुर: गोंडा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमार साहनी की 9 सितंबर 2026 को हुई हत्या के बाद निषाद समाज में आक्रोश का माहौल है। घटना के विरोध में एकलव्य जन कल्याण महासभा ने उत्तर प्रदेश सरकार से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। संगठन की ओर से कानपुर नगर के जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर अपनी मांगों से अवगत कराया गया।
महासभा के अध्यक्ष सुखलाल निषाद के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में संगठन ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमार साहनी की हत्या की घटना से समाज के लोगों में गहरी चिंता और नाराजगी है। संगठन ने सरकार से मामले में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
ज्ञापन के जरिए सरकार के सामने रखीं प्रमुख मांगें
एकलव्य जन कल्याण महासभा ने अपने ज्ञापन में कई प्रमुख मांगें रखी हैं। संगठन का कहना है कि घटना में शामिल आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए और मामले की निष्पक्ष एवं प्रभावी जांच कर दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
महासभा ने अपनी मांगों में आरोपियों को फांसी की सजा दिए जाने की मांग भी शामिल की है। हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ अंतिम दंड न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के निर्णय के आधार पर ही निर्धारित होता है। संगठन ने सरकार से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
इसके अलावा महासभा ने मृतक की पत्नी को दो करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की है। संगठन के मुताबिक, परिवार के कमाऊ सदस्य की मौत के बाद परिजनों के सामने आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में सरकार की ओर से पर्याप्त आर्थिक सहायता परिवार को राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
परिवार को सुरक्षा और रोजगार देने की मांग
महासभा ने पीड़ित परिवार की सुरक्षा को भी अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया है। संगठन का कहना है कि घटना के बाद परिवार के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि वे किसी तरह के दबाव या भय के बिना अपनी जिंदगी आगे बढ़ा सकें।
इसके साथ ही संगठन ने पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। महासभा का कहना है कि सरकारी रोजगार मिलने से परिवार को भविष्य में आर्थिक स्थिरता प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
इस मांग के पीछे संगठन का तर्क है कि किसी परिवार के सदस्य की असामयिक मृत्यु के बाद केवल तत्काल आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं होती। ऐसे में रोजगार जैसी दीर्घकालिक सहायता परिवार को अपने पैरों पर खड़े होने में मदद कर सकती है।
आरोपियों के खिलाफ संपत्ति संबंधी कार्रवाई की मांग
ज्ञापन में महासभा ने आरोपियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि घटना में जो लोग दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
हालांकि, ऐसी किसी भी संपत्ति संबंधी कार्रवाई के लिए प्रशासन और कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है। इस संबंध में अंतिम कार्रवाई संबंधित जांच, कानूनी प्रावधानों और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर ही हो सकती है।
महासभा ने सरकार से यह भी अपेक्षा जताई है कि मामले में किसी प्रकार की लापरवाही न हो और जांच को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया जाए।
निषाद समाज में बढ़ रहा आक्रोश
विनोद कुमार साहनी की हत्या की घटना को लेकर निषाद समाज के विभिन्न वर्गों में नाराजगी की बात संगठन की ओर से कही गई है। महासभा का कहना है कि सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या से समाज के लोगों में असुरक्षा और चिंता की भावना पैदा हुई है।
संगठन ने सरकार से अपील की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं। साथ ही, दोषियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य पीड़ित परिवार के लिए न्याय और सहायता सुनिश्चित कराना है। उन्होंने सरकार से सभी मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार करने की अपील की।
विधानसभा घेराव की चेतावनी
महासभा ने सरकार को चेतावनी भी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो निषाद समाज व्यापक आंदोलन कर सकता है। संगठन के मुताबिक, मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में उत्तर प्रदेश का निषाद समाज सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगा।
महासभा ने आगे उत्तर प्रदेश विधानसभा के घेराव की चेतावनी दी है। संगठन का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर विस्तार दिया जाएगा।
हालांकि, किसी भी प्रदर्शन या आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन और आयोजकों दोनों की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में संगठन की आगामी रणनीति और सरकार की ओर से होने वाली कार्रवाई पर लोगों की नजर रहेगी।
सरकार से त्वरित निर्णय की अपेक्षा
इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण बिंदु पुलिस जांच और सरकार की ओर से पीड़ित परिवार के संबंध में उठाए जाने वाले कदम हैं। एक ओर जहां संगठन आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवार के लिए आर्थिक सहायता, सुरक्षा और रोजगार जैसी मांगें भी सरकार के सामने रखी गई हैं।
महासभा के पदाधिकारियों का कहना है कि न्याय की प्रक्रिया में तेजी लाई जानी चाहिए, ताकि परिवार को जल्द राहत मिल सके। साथ ही, घटना की जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जाए तथा जो भी व्यक्ति कानून के अनुसार दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।
पदाधिकारियों ने रखी अपनी बात
एकलव्य जन कल्याण महासभा के प्रदेश महामंत्री ब्रज नारायण निषाद, जो पूर्व में लॉयर्स एसोसिएशन कानपुर के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं, ने संगठन की मांगों को सरकार तक पहुंचाने की बात कही। उन्होंने कहा कि संगठन पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और सरकार से न्याय सुनिश्चित करने की अपेक्षा करता है।
महासभा ने कहा कि ज्ञापन के माध्यम से सरकार का ध्यान घटना और पीड़ित परिवार की स्थिति की ओर आकर्षित किया गया है। अब संगठन सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों का इंतजार करेगा।
फिलहाल, इस मामले में संगठन की ओर से आंदोलन की चेतावनी दिए जाने के बाद प्रशासन और शासन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि मांगों पर कोई निर्णय सामने आता है तो आगे की स्थिति उसी के अनुसार स्पष्ट होगी।

