कानपुर में प्रांतीय अधिवक्ता सम्मेलन शुरू, बार काउंसिल के फैसलों पर अधिवक्ताओं में नाराजगी

254

रिपोर्ट-हनुमंत सिंह पिन्टू

कानपुर। कानपुर बार एसोसिएशन और द लॉयर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय प्रांतीय अधिवक्ता सम्मेलन की शुरुआत हो गई है। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के 55 से अधिक जिलों से करीब 2,500 अधिवक्ताओं के शामिल होने की बात कही गई है। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिवक्ताओं से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आगे की रणनीति तैयार करना बताया गया है।

सम्मेलन के दौरान अधिवक्ताओं में बार काउंसिल के हालिया निर्णयों को लेकर नाराजगी देखने को मिली। अधिवक्ताओं का आरोप है कि बार काउंसिल की ओर से लिए जा रहे कुछ फैसले कानून और निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं हैं। इसके चलते अधिवक्ताओं के बीच व्यापक स्तर पर चर्चा हुई और इन मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया।

55 से अधिक जिलों के अधिवक्ताओं की भागीदारी

कानपुर में आयोजित इस प्रांतीय सम्मेलन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से अधिवक्ताओं के पहुंचने की जानकारी दी गई है। आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन में करीब 2,500 अधिवक्ता हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में यह आयोजन अधिवक्ताओं से जुड़े प्रदेशव्यापी मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आया है।

सम्मेलन में स्थानीय स्तर की समस्याओं के साथ-साथ उन मुद्दों पर भी चर्चा की जा रही है, जिनका प्रभाव प्रदेश के अधिवक्ता समुदाय पर व्यापक रूप से पड़ता है। वहीं, बार काउंसिल के निर्णयों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अधिवक्ताओं ने अपनी चिंताओं को प्रमुखता से सामने रखा।

एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग

सम्मेलन में सबसे प्रमुख मुद्दों में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने की मांग शामिल रही। अधिवक्ताओं का कहना है कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों से जुड़े विषयों पर स्पष्ट कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता है।

अधिवक्ताओं का कहना है कि वे लंबे समय से अधिवक्ता संरक्षण से जुड़े कानून की मांग करते रहे हैं। उनका मानना है कि अधिवक्ताओं को अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन सुरक्षित वातावरण में करने के लिए प्रभावी संरक्षण व्यवस्था जरूरी है।

इसी क्रम में सम्मेलन में इस मुद्दे को लेकर आगे की रणनीति पर भी विचार किया गया। अधिवक्ताओं ने कहा कि उनकी मांगों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने के लिए संगठित तरीके से आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

बार काउंसिल के फैसलों पर उठे सवाल

सम्मेलन में बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। अधिवक्ताओं के एक वर्ग ने आरोप लगाया कि हालिया निर्णयों से अधिवक्ता समुदाय में असंतोष पैदा हुआ है।

पूर्व उपाध्यक्ष, लॉयर्स एसोसिएशन कानपुर, ब्रज नारायण निषाद उर्फ छम्मी ने कहा कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम को लागू कराने सहित अधिवक्ताओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन के साथ-साथ बार काउंसिल से जुड़े संस्थानों के कुछ निर्णयों से अधिवक्ताओं के सम्मान और हित प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन के माध्यम से आंदोलन की आगे की दिशा और रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में संबंधित बार काउंसिल का पक्ष इस स्क्रिप्ट में उपलब्ध नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों पर भी मंथन

प्रांतीय अधिवक्ता सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। अधिवक्ताओं के अनुसार, न्यायिक व्यवस्था में अधिवक्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और इसलिए उनके पेशे से जुड़े नियमों और न्यायालयों के निर्देशों के बीच समन्वय आवश्यक है।

इसके अलावा हड़ताल पर रोक और अंडरटेकिंग से संबंधित नियम भी सम्मेलन के प्रमुख विषयों में शामिल रहे। अधिवक्ताओं ने इन मुद्दों पर अपने विचार रखे और व्यावहारिक कठिनाइयों पर चर्चा की।

दरअसल, न्यायिक कार्य से जुड़े नियमों और अधिवक्ताओं के संगठनात्मक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। ऐसे में कानपुर में आयोजित सम्मेलन को इसी व्यापक चर्चा के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय

बार काउंसिल के निर्णयों और अधिवक्ताओं की विभिन्न मांगों के विरोध के बीच सम्मेलन के दौरान न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय भी सामने आया। अधिवक्ताओं का कहना है कि अपनी मांगों और समस्याओं को प्रभावी तरीके से उठाने के लिए उन्हें सामूहिक रूप से आगे की रणनीति तय करनी होगी।

हालांकि, न्यायिक कार्य से विरत रहने के निर्णय की अवधि और इसके व्यापक प्रभाव से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आगे होने वाली बैठकों और अधिवक्ता संगठनों के निर्णयों पर नजर रहेगी।

आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा

ब्रज नारायण निषाद उर्फ छम्मी ने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से यह तय करने का प्रयास किया जा रहा है कि अधिवक्ता अपनी मांगों को लेकर आगे किस दिशा में आंदोलन करेंगे। उनके मुताबिक, अधिवक्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से उठाने और समाधान की दिशा में प्रभावी प्रयास करने की जरूरत है।

उन्होंने यह भी कहा कि सम्मेलन में मौजूद अधिवक्ताओं के बीच विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श के बाद आगे की रणनीति बनाई जाएगी। ऐसे में सम्मेलन के दूसरे दिन होने वाली चर्चाएं भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

अधिवक्ता हितों से जुड़े मुद्दों पर एकजुटता

कानपुर में आयोजित इस सम्मेलन से यह स्पष्ट है कि अधिवक्ता समुदाय अपने पेशे से जुड़े मुद्दों को लेकर सामूहिक चर्चा के मंच पर एकजुट होकर अपनी बात रखना चाहता है। एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट, बार काउंसिल के निर्णय, न्यायालयों के निर्देश, हड़ताल और अंडरटेकिंग जैसे विषयों पर चर्चा ने सम्मेलन को व्यापक महत्व दिया है।

इसके अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों से अधिवक्ताओं की भागीदारी ने इसे प्रदेशस्तरीय आयोजन का स्वरूप दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सम्मेलन के दौरान लिए गए निर्णयों को आगे किस तरह लागू किया जाता है और अधिवक्ता संगठनों की ओर से सरकार तथा संबंधित संस्थाओं के समक्ष कौन-कौन सी मांगें प्रमुखता से रखी जाती हैं।

You may have missed