कानपुर सेंट्रल पर पर्यावरण संरक्षण की पहल, कुलियों को बांटी 200 स्टील बोतलें, यात्रियों के लिए स्ट्रेचर

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रिपोर्ट- विवेक कृष्ण दीक्षित

कानपुर। कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने की दिशा में सामाजिक संस्था जेसीआई जोन-2 ने सराहनीय पहल की। संस्था की ओर से प्लेटफार्म नंबर एक पर आयोजित कार्यक्रम में स्टेशन पर कार्यरत कुलियों को करीब 200 स्टील की पानी की बोतलें वितरित की गईं। इसके साथ ही यात्रियों की मेडिकल इमरजेंसी के दौरान तत्काल सहायता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्टेशन को एक स्ट्रेचर भी उपलब्ध कराया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल जरूरत की वस्तुएं उपलब्ध कराना ही नहीं था, बल्कि रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थान पर पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश भी लोगों तक पहुंचाना था। संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि प्लास्टिक की बोतलों के लगातार इस्तेमाल से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में स्टील की बोतलों का उपयोग बढ़ाकर प्लास्टिक पर निर्भरता को कम किया जा सकता है।

कुलियों को दी गईं करीब 200 स्टील की बोतलें

कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर यात्रियों के सामान को पहुंचाने में कुलियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्हें अक्सर लंबे समय तक स्टेशन परिसर में रहना पड़ता है। ऐसे में पानी पीने के लिए बार-बार प्लास्टिक की बोतल खरीदने की जरूरत न पड़े, इसी उद्देश्य से संस्था ने कुलियों को स्टील की बोतलें उपलब्ध कराईं।

कार्यक्रम के दौरान उप मुख्य यातायात प्रबंधक, कानपुर आकांशु गोविल ने कुलियों को स्टील की पानी की बोतलें वितरित कीं। इस अवसर पर संस्था के पदाधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

संस्था की ओर से बताया गया कि स्टील की बोतलों के इस्तेमाल से प्लास्टिक की डिस्पोजेबल बोतलों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, एक ही बोतल को लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। इस प्रकार यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ दैनिक जीवन में टिकाऊ विकल्प अपनाने का संदेश भी देती है।

प्लास्टिक के विकल्प को बढ़ावा देने की कोशिश

आज रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पानी की प्लास्टिक बोतलों का इस्तेमाल आम है। यात्रियों की सुविधा के लिए बोतलबंद पानी आसानी से उपलब्ध होता है, लेकिन इस्तेमाल के बाद बड़ी संख्या में प्लास्टिक की बोतलें कचरे का हिस्सा बन जाती हैं।

ऐसे में स्टील की बोतलों को बढ़ावा देना एक व्यावहारिक कदम माना जा सकता है। हालांकि, प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने के लिए केवल एक संस्था या एक कार्यक्रम की पहल पर्याप्त नहीं है। इसके लिए आम नागरिकों, संस्थाओं और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को भी मिलकर प्रयास करना जरूरी है।

इसी सोच के साथ जेसीआई जोन-2 ने कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर यह कार्यक्रम आयोजित किया। संस्था का संदेश था कि छोटे-छोटे बदलावों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी योगदान दिया जा सकता है।

मेडिकल इमरजेंसी के लिए स्टेशन को मिला स्ट्रेचर

कार्यक्रम की एक अन्य महत्वपूर्ण पहल स्टेशन को स्ट्रेचर उपलब्ध कराना रही। रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही होती है। ऐसे में कभी-कभी किसी यात्री को अचानक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है या तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।

इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए संस्था ने कानपुर सेंट्रल स्टेशन को एक स्ट्रेचर उपलब्ध कराया। इसका उद्देश्य मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में यात्रियों को तत्काल सहायता प्रदान करना है।

किसी यात्री की तबीयत अचानक खराब होने की स्थिति में उसे सुरक्षित तरीके से चिकित्सा सहायता के लिए ले जाने में स्ट्रेचर उपयोगी साबित हो सकता है। विशेष रूप से प्लेटफार्म पर भीड़ के बीच किसी व्यक्ति को पैदल ले जाना कठिन हो सकता है। ऐसे में स्टेशन पर स्ट्रेचर की उपलब्धता प्रारंभिक सहायता व्यवस्था को बेहतर बनाने में योगदान दे सकती है।

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

कार्यक्रम के दौरान केवल स्टील की बोतलों का वितरण और स्ट्रेचर उपलब्ध कराने तक ही गतिविधियां सीमित नहीं रहीं। इस अवसर पर स्टेशन परिसर में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश भी दिया गया।

संस्था के पदाधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें। इसके साथ ही प्लास्टिक के अनावश्यक इस्तेमाल से बचने और पुन: उपयोग किए जा सकने वाले विकल्पों को अपनाने पर जोर दिया गया।

दरअसल, पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं या बड़े अभियानों तक सीमित विषय नहीं है। दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के चयन से भी पर्यावरण पर असर पड़ता है। यदि लोग प्लास्टिक की डिस्पोजेबल वस्तुओं की जगह लंबे समय तक इस्तेमाल होने वाले विकल्पों को अपनाएं, तो कचरा कम करने में मदद मिल सकती है।

रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता जरूरी

कानपुर सेंट्रल स्टेशन शहर का एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं। ऐसे में यहां होने वाली जागरूकता गतिविधियों का संदेश यात्रियों और स्टेशन पर काम करने वाले लोगों तक आसानी से पहुंच सकता है।

यही कारण है कि सार्वजनिक स्थानों पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों का अपना महत्व है। एक ओर जहां ऐसे कार्यक्रम लोगों को जागरूक करते हैं, वहीं दूसरी ओर व्यवहार में बदलाव के लिए प्रेरित भी करते हैं।

कुलियों को स्टील की बोतलें वितरित किए जाने से यह संदेश भी सामने आया कि पर्यावरण संरक्षण की पहल में स्टेशन पर कार्यरत कर्मचारियों और श्रमिकों को भी सहभागी बनाया जा सकता है। इसके अलावा स्ट्रेचर उपलब्ध कराने से सामाजिक जिम्मेदारी और यात्री सुविधा के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण सामने आया।

सामाजिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण

पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में सामाजिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। सरकारी व्यवस्थाओं के साथ सामाजिक संगठनों की पहल जुड़ने से जागरूकता का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

जेसीआई जोन-2 की इस पहल में पर्यावरण संरक्षण और यात्री सहायता, दोनों पहलुओं को जोड़ा गया। एक तरफ करीब 200 कुलियों को स्टील की बोतलें देकर प्लास्टिक के विकल्प को बढ़ावा दिया गया, वहीं दूसरी ओर स्टेशन को स्ट्रेचर उपलब्ध कराकर मेडिकल इमरजेंसी के समय सहायता की व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया गया।

इस तरह कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि सामाजिक जिम्मेदारी के तहत किए गए छोटे प्रयास भी सार्वजनिक जीवन में उपयोगी बदलाव ला सकते हैं।

पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत

प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना आज एक बड़ी पर्यावरणीय चुनौती है। इसके लिए लोगों को अपनी आदतों में बदलाव लाने की आवश्यकता है। यदि संभव हो तो लोग घर से पानी की पुन: उपयोग योग्य बोतल लेकर निकलें, अनावश्यक प्लास्टिक वस्तुओं के इस्तेमाल से बचें और कचरे को निर्धारित स्थान पर ही डालें।

इसी प्रकार रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों पर यात्रियों को भी स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। रेलवे प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयास से स्टेशन परिसर को अधिक स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है।

कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर आयोजित यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा सकता है। करीब 200 स्टील की बोतलों का वितरण जहां प्लास्टिक के विकल्प को प्रोत्साहित करता है, वहीं स्ट्रेचर की उपलब्धता यात्रियों की जरूरत के समय उपयोगी साबित हो सकती है।

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