प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची पर ग्रामीण ने उठाए सवाल, पुनः सर्वे की रखी मांग – तुरंत पढ़िए आखिर ऐसा क्यों?

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रिपोर्ट – शुभम साहू 

कानपुर: प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत हुए सर्वे और जारी पात्रता सूची को लेकर नर्वल तहसील क्षेत्र के एक ग्रामीण ने सवाल उठाए हैं। ग्राम पंचायत लाखनखेड़ा के गांव सर्वांगपुर निवासी ग्रामीण ने तहसील दिवस में पहुंचकर अधिकारियों को शिकायत पत्र सौंपा। इस दौरान उसने योजना की जारी सूची के साथ कुछ परिवारों के मकानों की तस्वीरें भी अधिकारियों के सामने रखीं और पात्रता की दोबारा जांच कराने की मांग की।

ग्रामीण का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण की सूची में कुछ ऐसे परिवारों के नाम शामिल हैं, जो उसके अनुसार योजना के पात्र नहीं हैं। वहीं, दूसरी ओर जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के नाम सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। ग्रामीण ने अधिकारियों से मांग की कि योजना के लाभार्थियों का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए, जिससे पात्र और अपात्र परिवारों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

तहसील दिवस में पहुंचकर दी शिकायत

ग्रामीण ने अपनी शिकायत के दौरान अधिकारियों को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण से संबंधित जारी सूची दिखाई। इसके अलावा, उसने उन परिवारों के मकानों की तस्वीरें भी प्रस्तुत कीं, जिन्हें वह योजना के लिए अपात्र मानता है। उसका कहना है कि केवल कागजी सर्वे के आधार पर पात्रता निर्धारित करने के बजाय मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की जानी चाहिए।

ग्रामीण के मुताबिक, यदि ग्राम पंचायत में दोबारा निष्पक्ष सर्वे कराया जाता है और सूची में शामिल लाभार्थियों के घरों का भौतिक सत्यापन किया जाता है, तो स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। इसलिए उसने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

सर्वे प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

शिकायतकर्ता ने प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वे और पात्रता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीण ने आरोप लगाया कि सर्वे के दौरान पात्रता के निर्धारित मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। उसने ग्राम प्रधान सहित संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मामले में प्रशासनिक जांच और मौके पर सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सूची तैयार करने में किसी तरह की अनियमितता हुई है या नहीं।

पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने की मांग

ग्रामीण का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को आवास उपलब्ध कराना है, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। ऐसे में यदि किसी अपात्र परिवार का नाम सूची में शामिल हो जाता है और जरूरतमंद परिवार योजना के लाभ से वंचित रह जाता है, तो इससे योजना के उद्देश्य पर असर पड़ सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम पंचायत लाखनखेड़ा के गांव सर्वांगपुर में योजना से जुड़े सर्वे की दोबारा जांच कराई जाए। साथ ही, सूची में शामिल सभी लाभार्थियों के आवास और उनकी आर्थिक स्थिति का मौके पर सत्यापन कराया जाए।

ग्रामीण ने यह भी कहा कि पात्रता की जांच पूरी तरह पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, ताकि किसी जरूरतमंद परिवार के साथ अन्याय न हो। उसका कहना है कि यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

प्रशासनिक जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

फिलहाल तहसील दिवस में की गई शिकायत के बाद मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित विभाग द्वारा योजना की सूची, सर्वे रिपोर्ट और मौके की स्थिति का मिलान किया जा सकता है।

इसके अलावा, यदि अधिकारियों की ओर से दोबारा सर्वे या भौतिक सत्यापन कराया जाता है तो इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि सूची में शामिल लाभार्थी निर्धारित मानकों के अनुसार पात्र हैं या नहीं। साथ ही, ऐसे परिवारों की भी पहचान हो सकती है, जो पात्र होने के बावजूद योजना के लाभ से बाहर रह गए हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत लाभार्थियों का चयन निर्धारित सरकारी मानकों के आधार पर किया जाता है। ऐसे में किसी भी शिकायत के सामने आने पर दस्तावेजों और जमीनी स्थिति का सत्यापन महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मामले में भी ग्रामीण की शिकायत के बाद प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

ग्रामीण ने अंत में अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराकर पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। अब यह देखना होगा कि शिकायत के आधार पर संबंधित अधिकारी किस स्तर पर जांच कराते हैं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

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