आगरा में मूंगफली की बोरियों के बीच छिपाकर लाई जा रही 6 करोड़ की चांदी पकड़ी गई, GST विभाग ने शुरू की जांच
Digital UP News Desk
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में जीएसटी विभाग की सचल दल टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 220 किलो चांदी बरामद की है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, चांदी को गुजरात के राजकोट से आगरा लाया जा रहा था। इसे सैंया टोल प्लाजा पर गुरुवार रात चेकिंग के दौरान पकड़ा गया। अधिकारियों के अनुसार, बरामद चांदी की बाजार कीमत करीब 6 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
चांदी को सामान्य तरीके से नहीं, बल्कि ऑटो पार्ट्स और मूंगफली की बोरियों के बीच छिपाकर बस के जरिए आगरा लाया जा रहा था। जीएसटी विभाग को चांदी के साथ कुछ बिल और ई-वे बिल भी मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि चांदी किसके नाम पर थी और इसे आगरा में किन कारोबारियों तक पहुंचाया जाना था।
सैंया टोल प्लाजा पर हुई चेकिंग
जीएसटी सचल दल तृतीय की प्रभारी आकांक्षा पांडे के नेतृत्व में टीम गुरुवार रात सैंया टोल प्लाजा पर वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान राधिका ट्रेवल्स की बस को चेकिंग के लिए रोका गया। जांच के दौरान टीम को बस में रखे सामान को लेकर संदेह हुआ।
इसके बाद सामान की बारीकी से जांच की गई तो ऑटो पार्ट्स और मूंगफली की बोरियों के बीच चांदी छिपाकर रखे जाने की जानकारी सामने आई। इतनी बड़ी मात्रा में चांदी मिलने के बाद टीम ने उससे संबंधित दस्तावेज मांगे। अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्तुत किए गए बिल प्रथम दृष्टया संदिग्ध नजर आए। इसके बाद विभाग ने चांदी को सुरक्षित रखने के लिए ट्रेजरी में जमा कराया।
करीब 220 किलो चांदी बरामद
एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 पंकज गांधी के अनुसार, जांच के दौरान करीब 220 किलो चांदी बरामद हुई है। इसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 6 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि, चांदी की वास्तविक कीमत और उससे जुड़े कर संबंधी दायित्वों का निर्धारण दस्तावेजों की जांच के बाद किया जाएगा।
फिलहाल जीएसटी विभाग चांदी के साथ मिले दस्तावेजों का सत्यापन कर रहा है। इनमें बिल, ई-वे बिल और माल की आवाजाही से संबंधित अन्य कागजात शामिल हैं। विभाग यह भी जांच कर रहा है कि इन दस्तावेजों में दर्ज जानकारी वास्तविक है या नहीं।
राजकोट से आगरा लाई जा रही थी चांदी
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि चांदी की यह खेप गुजरात के राजकोट से आगरा लाई जा रही थी। अधिकारियों को आशंका है कि इसे आगरा के सराफा कारोबार से जुड़े लोगों तक पहुंचाया जाना था। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि चांदी का अंतिम प्राप्तकर्ता कौन था।
इसी वजह से जीएसटी विभाग अब पूरे सप्लाई नेटवर्क की जानकारी जुटा रहा है। चांदी किस कारोबारी या फर्म से भेजी गई, परिवहन के लिए किस माध्यम का इस्तेमाल किया गया और आगरा में इसे किसे सौंपा जाना था, इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है।
फर्जी बिल की आशंका की भी जांच
जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों को लेकर भी जीएसटी विभाग गंभीरता से पड़ताल कर रहा है। प्रारंभिक तौर पर बिल संदिग्ध पाए जाने की बात कही गई है। ऐसे में विभाग यह सत्यापित करेगा कि बिल वास्तव में उसी माल से संबंधित हैं या नहीं।
साथ ही, ई-वे बिल में दर्ज विवरण और वास्तविक माल के बीच भी मिलान कराया जा रहा है। यदि दस्तावेजों में किसी तरह की अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, जांच पूरी होने से पहले यह कहना जल्दबाजी होगी कि पूरे मामले में किस स्तर पर कर चोरी हुई है या दस्तावेजों में किस प्रकार की गड़बड़ी की गई है। विभागीय जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
ट्रैवल बसों से माल ढुलाई पर उठे सवाल
करोड़ों रुपये की चांदी को ट्रैवल बस के जरिए आगरा लाए जाने से अब ट्रैवल बसों के इस्तेमाल से व्यावसायिक माल की ढुलाई को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आम तौर पर ट्रैवल बसों का इस्तेमाल यात्रियों के आवागमन के लिए किया जाता है। ऐसे में यात्रियों के सामान के बीच इतनी बड़ी मात्रा में कीमती धातु की आवाजाही ने विभाग का ध्यान इस ओर खींचा है।
जीएसटी विभाग अब यह भी जांच कर रहा है कि क्या इस तरह की गतिविधियां किसी संगठित नेटवर्क के माध्यम से संचालित हो रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ मामलों में व्यावसायिक माल को ट्रैवल बसों के जरिए दूसरे शहरों तक पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आती रही है।
ट्रैवल एजेंसियों के नेटवर्क पर भी नजर
एडिशनल कमिश्नर पंकज गांधी ने संकेत दिया है कि विभाग अब ट्रैवल एजेंसियों से जुड़े ऐसे नेटवर्क पर भी नजर रखेगा, जिनके माध्यम से व्यावसायिक सामान की ढुलाई किए जाने की आशंका है।
दरअसल, ट्रैवल बसों में यात्रियों के निजी सामान के साथ अन्य सामग्री भी रखी जाती है। ऐसे में यदि व्यावसायिक माल की उचित दस्तावेजों के बिना आवाजाही होती है तो उसकी पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यही वजह है कि जीएसटी विभाग इस मामले को केवल बरामद चांदी तक सीमित न रखते हुए इसके पीछे की पूरी व्यवस्था की पड़ताल कर रहा है।
कहां सप्लाई होनी थी, इसकी जांच
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि करीब 220 किलो चांदी आगरा में किसे दी जानी थी। विभाग इस संबंध में बस से मिले दस्तावेजों, बिल और ई-वे बिल की जांच कर रहा है। इसके साथ ही चांदी के स्रोत और संभावित खरीदारों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
यदि दस्तावेजों में दर्ज जानकारी और वास्तविक लेनदेन में अंतर मिलता है तो संबंधित पक्षों से पूछताछ की जा सकती है। इसके अलावा चांदी की खरीद, बिक्री और परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच संभव है।
आगे की जांच के बाद साफ होगी तस्वीर
सैंया टोल प्लाजा पर हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर कीमती धातुओं के परिवहन और जीएसटी नियमों के पालन को लेकर ध्यान आकर्षित किया है। विभाग के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि बरामद चांदी वैध दस्तावेजों के साथ भेजी जा रही थी या इसमें कर संबंधी नियमों का उल्लंघन किया गया।
फिलहाल चांदी को सुरक्षित स्थान पर रखवाकर उसके दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। राजकोट से आगरा तक चांदी की आवाजाही, बिल और ई-वे बिल की वैधता तथा संभावित प्राप्तकर्ताओं की जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इस कार्रवाई से यह भी संकेत मिलता है कि जीएसटी विभाग अब अंतरराज्यीय स्तर पर कीमती और व्यावसायिक सामान की आवाजाही पर निगरानी बढ़ा रहा है। खासतौर पर उन माध्यमों पर नजर रखी जा रही है, जिनका इस्तेमाल नियमित कारोबारी माल ढुलाई के बजाय यात्रियों के परिवहन के लि

