JSSC CGL पेपर लीक मामले में CID की SIT का एक्शन, आयोग कार्यालय में दस्तावेजों की जांच तेज
Digital UP News Desk
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सीजीएल प्रतियोगिता परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितता से जुड़े मामले की जांच अब और तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही सीआईडी की विशेष जांच टीम (SIT) शुक्रवार को एक बार फिर नामकुम स्थित जेएसएससी कार्यालय पहुंची। टीम ने आयोग से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की और कई अहम बिंदुओं पर जानकारी जुटाई। पिछले दो दिनों से एसआईटी लगातार आयोग कार्यालय पहुंचकर मामले से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है।
जांच के दौरान आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता की मौजूदगी में भी दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। एसआईटी यह समझने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा आयोजित कराने की प्रक्रिया में किन-किन एजेंसियों और कंपनियों की भूमिका रही तथा उन्हें किस प्रक्रिया के तहत जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। इसके अलावा परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड, एजेंसियों की नियुक्ति और उनके द्वारा किए गए कार्यों की भी पड़ताल की जा रही है।
परीक्षा एजेंसियों की नियुक्ति पर भी जांच
सीआईडी की जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों की नियुक्ति से जुड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एसआईटी ने वेबेल, आईएनसी समेत अन्य कंपनियों की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज भी आयोग से लिए हैं। इन दस्तावेजों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संबंधित एजेंसियों की नियुक्ति कब हुई, किस प्रक्रिया के तहत हुई और उन्हें जेएसएससी की ओर से कौन-कौन सी जिम्मेदारियां दी गई थीं।
इसके साथ ही एसआईटी यह भी जांच रही है कि इन एजेंसियों ने पूर्व में जेएसएससी की कौन-कौन सी परीक्षाएं आयोजित कराई थीं। परीक्षा प्रक्रिया में उनकी भूमिका क्या थी और परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा डिजिटल रिकॉर्ड किस स्तर पर तैयार और सुरक्षित किए गए थे, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।
दरअसल, कथित पेपर लीक मामले की जांच में परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसलिए जांच एजेंसी केवल अभ्यर्थियों तक सीमित न रहकर परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
करीब 250 संदिग्धों और सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ
एसआईटी की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार को भी करीब 22 संदिग्ध अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया। जांच एजेंसी अब तक करीब 250 संदिग्धों और सफल अभ्यर्थियों के बयान दर्ज कर चुकी है। इसके बावजूद पूछताछ का सिलसिला जारी है।
जांच टीम उन अभ्यर्थियों से विशेष रूप से जानकारी जुटा रही है, जिनकी परीक्षा में सफलता को लेकर किसी तरह का संदेह सामने आया है। उनसे परीक्षा केंद्र, मोबाइल नंबर और परीक्षा के दौरान संपर्क में रहे लोगों के बारे में जानकारी ली जा रही है।
इसके अलावा परीक्षा के दौरान और परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों की मोबाइल गतिविधियों तथा संपर्कों से संबंधित जानकारी की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संदिग्ध अभ्यर्थियों की किन लोगों से बातचीत हुई थी और परीक्षा से पहले या बाद में उनके बीच किसी तरह का संपर्क हुआ था या नहीं।
हालांकि, किसी अभ्यर्थी के खिलाफ आरोप साबित होना जांच और कानूनी प्रक्रिया का विषय है। इसलिए एसआईटी द्वारा पूछताछ किए जा रहे सभी लोगों को आरोपी मानना उचित नहीं होगा। जांच के आधार पर ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
दस्तावेजों के साथ डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच
एसआईटी की जांच केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। इससे पहले की गई कार्रवाई के दौरान आयोग से कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए गए थे। अब इन साक्ष्यों का परीक्षण और संबंधित रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है।
डिजिटल साक्ष्यों के जरिए जांच एजेंसी परीक्षा से संबंधित संचार, रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी जानकारियों की पड़ताल कर सकती है। इसके साथ ही आयोग के दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के बीच किसी तरह की विसंगति है या नहीं, इसे भी देखा जा रहा है।
जांच एजेंसी के सामने सबसे अहम सवाल परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और कथित पेपर लीक से जुड़े घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति को सामने लाना है। इसी वजह से दस्तावेजों के सत्यापन के साथ-साथ अलग-अलग लोगों के बयानों का मिलान भी किया जा रहा है।
पहले भी JSSC कार्यालय में हो चुकी है कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब सीआईडी की टीम जेएसएससी कार्यालय पहुंची है। इससे पहले भी जांच एजेंसी आयोग के कार्यालय में छानबीन कर चुकी है। आयोग के सचिव सुधीर कुमार गुप्ता से पूर्व में भी लंबी पूछताछ की जा चुकी है।
इसके अलावा उनके आवास पर भी छापेमारी किए जाने की जानकारी सामने आई थी। जांच एजेंसी ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी से संबंधित कई दस्तावेजों और डिजिटल सामग्री को अपने कब्जे में लिया था। अब इन्हीं सामग्रियों की जांच और सत्यापन आगे बढ़ाया जा रहा है।
बताया गया है कि जेएसएससी की पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेंड टीचर कंपीटिटिव एग्जामिनेशन में कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आने के बाद 17 अगस्त को सीआईडी ने पहली बार जेएसएससी कार्यालय में कार्रवाई की थी। उस दौरान आयोग के सचिव से लंबी पूछताछ की गई थी। इसके बाद उन्हें लगातार दो दिनों तक सीआईडी कार्यालय बुलाकर बयान दर्ज किए गए थे।
जांच में सामने आने वाली जानकारी पर नजर
जांच के दौरान जैसे-जैसे नई जानकारियां सामने आ रही हैं, एसआईटी अपने स्तर पर उनके सत्यापन में जुटी है। किसी व्यक्ति के बयान को अन्य दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों से मिलाया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के तहत संदिग्ध अभ्यर्थियों से पूछताछ के साथ परीक्षा एजेंसियों और आयोग के अधिकारियों से संबंधित रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े किसी भी कथित पेपर लीक मामले में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की सुरक्षा, उसके वितरण की प्रक्रिया, परीक्षा केंद्रों तक पहुंच और डिजिटल सिस्टम की भूमिका जैसे पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में एसआईटी द्वारा आयोग और परीक्षा एजेंसियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच को मामले की आगे की कार्रवाई के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल सीआईडी की एसआईटी मामले की जांच में जुटी है और पूछताछ का सिलसिला जारी है। करीब 250 संदिग्धों और सफल अभ्यर्थियों के बयान दर्ज किए जाने के बाद भी जांच टीम नए लोगों को नोटिस जारी कर रही है। वहीं, आयोग कार्यालय से प्राप्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का सत्यापन भी किया जा रहा है।
आने वाले दिनों में जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर एसआईटी आगे की कार्रवाई कर सकती है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
कुल मिलाकर, JSSC CGL कथित पेपर लीक मामले में CID की SIT की सक्रियता बढ़ गई है। आयोग कार्यालय में लगातार दस्तावेजों की जांच, परीक्षा एजेंसियों की नियुक्ति से जुड़े रिकॉर्ड का सत्यापन और संदिग्ध अभ्यर्थियों से पूछताछ के जरिए जांच एजेंसी पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। अब नजर इस बात पर है कि जांच में आगे कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और उनके आधार पर एजेंसी क्या कदम उठाती है।

