यूपी में वोटर लिस्ट को लेकर सपा की तैयारी, ‘PDA प्रहरियों’ को फिर मिलेगी जिम्मेदारी; जानें क्या है रणनीति

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Digital UP News Desk

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने संगठन को चुनावी तैयारियों के साथ-साथ मतदाता सूची के विशेष वार्षिक पुनरीक्षण यानी Special Annual Revision (SAR) पर नजर रखने के लिए सक्रिय करने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर निगरानी मजबूत करने और जरूरत पड़ने पर ‘पीडीए प्रहरियों’ को फिर से जिम्मेदारी देने के संकेत दिए हैं।

समाजवादी पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को पूरी सतर्कता के साथ काम करना होगा। पार्टी नेतृत्व को आशंका है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, इन आशंकाओं और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

बंद कमरे में हुई बैठक में दिए गए निर्देश

समाजवादी पार्टी मुख्यालय में जिला और शहर अध्यक्षों, कार्यकारी समिति के सदस्यों तथा अन्य पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव समेत वरिष्ठ नेताओं ने संगठनात्मक तैयारियों पर चर्चा की।

बैठक का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण रहा। पार्टी नेतृत्व ने पदाधिकारियों से कहा कि यदि चुनाव आयोग की ओर से एसएआर की प्रक्रिया शुरू की जाती है, तो बूथ स्तर पर संगठन को पूरी तरह सक्रिय किया जाए।

इसके लिए पार्टी पहले की तरह ‘पीडीए प्रहरियों’ को जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही है। इन कार्यकर्ताओं का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में होने वाले संभावित बदलावों पर नजर रखना और किसी भी तरह की आपत्ति या विसंगति सामने आने पर उसकी जानकारी पार्टी संगठन तक पहुंचाना होगा।

क्या है सपा का PDA मॉडल?

समाजवादी पार्टी PDA शब्द का इस्तेमाल पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए करती है। पार्टी की चुनावी रणनीति में इन सामाजिक समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। सपा लंबे समय से इन वर्गों को अपने राजनीतिक आधार का अहम हिस्सा बताती रही है।

ऐसे में मतदाता सूची से जुड़े किसी भी बदलाव को लेकर पार्टी विशेष रूप से सतर्क रहना चाहती है। सपा नेतृत्व का मानना है कि चुनावी मुकाबले में मतदाता सूची की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए पार्टी बूथ स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करके प्रत्येक प्रक्रिया पर नजर रखने की रणनीति बना रही है।

SIR के दौरान भी सक्रिय थे ‘PDA प्रहरी’

समाजवादी पार्टी इससे पहले मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया के दौरान भी ‘पीडीए प्रहरियों’ को सक्रिय कर चुकी है। पार्टी रणनीतिकारों का दावा है कि उस दौरान इन कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची से जुड़े कई मामलों को सामने लाने में भूमिका निभाई थी।

सपा का कहना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जानकारी जुटाई और संबंधित मामलों में चुनाव आयोग के समक्ष शिकायतें भी दर्ज कराईं। पार्टी के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी व्यक्ति या समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची की प्रक्रिया पर संगठनात्मक स्तर पर निगरानी रखना था।

हालांकि, मतदाता सूची में कथित हेरफेर से जुड़े इन दावों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक जांच या चुनाव आयोग के निष्कर्षों के आधार पर ही की जा सकती है।

अखिलेश यादव ने क्या कहा?

बैठक में अखिलेश यादव ने पार्टी पदाधिकारियों से उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बदलाव के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा सकती है।

अखिलेश यादव ने कथित तौर पर कहा कि उत्तर प्रदेश में एक बड़ी साजिश चल रही है और सालाना पुनरीक्षण के नाम पर वोटों को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर निगरानी मजबूत करने को कहा।

सपा अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से लोगों को लाकर उत्तर प्रदेश में मतदाता के तौर पर पंजीकृत कराने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

फॉर्म 7 को लेकर सपा का आरोप

समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 7 को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कुछ स्थानों पर मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 के जरिए आपत्तियां दाखिल कराई जा रही हैं।

सपा का कहना है कि ऐसे मामलों की बूथ स्तर पर जांच की जानी चाहिए और यदि कोई गड़बड़ी सामने आती है तो उसका रिकॉर्ड तैयार करके चुनाव आयोग को शिकायत भेजी जानी चाहिए।

दरअसल, फॉर्म 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को हटाने या किसी नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। इसलिए चुनावी प्रक्रिया के दौरान इस फॉर्म के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक दलों की निगरानी स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।

सुल्तानपुर के जयसिंहपुर का मामला चर्चा में

समाजवादी पार्टी ने अपने आरोपों के समर्थन में सुल्तानपुर की जयसिंहपुर विधानसभा सीट से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख किया। पार्टी के मुताबिक, वहां मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 के तहत 26 आपत्तियां दर्ज की गई थीं।

सपा का दावा है कि इन फॉर्मों पर एक स्थानीय व्यक्ति के हस्ताक्षर किए गए थे, जबकि संबंधित व्यक्ति के बारे में पार्टी का कहना है कि वह पढ़ना-लिखना नहीं जानता और सामान्य तौर पर अंगूठे का निशान लगाता है।

इस मामले को लेकर सपा ने सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की आपत्ति या नाम हटाने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, इस मामले में वास्तविक स्थिति और किसी संभावित अनियमितता की पुष्टि सक्षम चुनावी अधिकारियों की जांच के आधार पर ही मानी जा सकती है।

चुनाव से पहले बढ़ेगी राजनीतिक सक्रियता

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ना तय माना जा रहा है। प्रत्येक पार्टी अपने समर्थक मतदाताओं के नाम सूची में सुरक्षित रखने और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने पर जोर देती है।

इसी क्रम में समाजवादी पार्टी ने भी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। ‘पीडीए प्रहरियों’ की संभावित तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

दूसरी ओर, मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत होता है। इसलिए किसी भी राजनीतिक दल की ओर से लगाए गए आरोपों या आशंकाओं का अंतिम आकलन आधिकारिक रिकॉर्ड और चुनाव आयोग की कार्रवाई के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

सपा की चुनावी रणनीति में मतदाता सूची अहम

समाजवादी पार्टी के लिए PDA सामाजिक समीकरण और बूथ स्तर का संगठन आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में पार्टी मतदाता सूची से जुड़े हर बदलाव को गंभीरता से लेने की तैयारी में है।

कुल मिलाकर, SAR को लेकर सपा की सक्रियता यह संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियां अभी से संगठनात्मक स्तर पर तेज हो रही हैं। ‘पीडीए प्रहरियों’ की संभावित तैनाती के जरिए पार्टी मतदाता सूची में होने वाले बदलावों की निगरानी करना चाहती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग की पुनरीक्षण प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है और राजनीतिक दल उस पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देते हैं।

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