IAS Divya Mittal Resignation: प्रशांत उमराव ने दिव्या मित्तल की कार्यशैली पर उठाए सवाल, राहुल गांधी से मिलने के बाद इस्तीफा, जानिए क्या कहा
Digital UP News Desk
लखनऊ: उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित आईएएस अधिकारी और देवरिया की पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफे के बाद अब उनकी कार्यशैली को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। भाजपा के मीडिया पैनलिस्ट और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत उमराव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दिव्या मित्तल के इस्तीफे को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में दिव्या मित्तल की प्रशासनिक कार्यशैली, जनप्रतिनिधियों के साथ कथित तालमेल और उनकी सार्वजनिक छवि को लेकर टिप्पणी की है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे की घोषणा तो की है, लेकिन इस्तीफा देने की कोई वजह सार्वजनिक रूप से नहीं बताई है। ऐसे में प्रशांत उमराव की ओर से सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोप और सवाल उनके व्यक्तिगत दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।
दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद प्रशांत उमराव की पोस्ट
2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने की जानकारी दी। उनके इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर उनके प्रशासनिक करियर और आगे की भूमिका को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
इसी बीच भाजपा मीडिया पैनलिस्ट प्रशांत उमराव ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए दिव्या मित्तल की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि दिव्या मित्तल ने इस्तीफा तो दिया, लेकिन उन्होंने इस्तीफे की वजह स्पष्ट नहीं की। प्रशांत उमराव ने अपनी पोस्ट में राहुल गांधी से मुलाकात का भी जिक्र किया और राजनीतिक टिप्पणी की।
हालांकि, राहुल गांधी से मुलाकात और इस्तीफे के बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस दावे को तथ्य के रूप में नहीं बल्कि प्रशांत उमराव की सोशल मीडिया टिप्पणी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
‘डीएम के बाद सीधे कमिश्नर बनना था’
प्रशांत उमराव ने दिव्या मित्तल की प्रशासनिक कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें हमेशा ‘राजा’ बने रहने की इच्छा थी। उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त सचिव का पद उन्हें पसंद नहीं आया और वह जिलाधिकारी के बाद सीधे कमिश्नर बनना चाहती थीं।
उन्होंने अपनी पोस्ट में यह भी सवाल उठाया कि जिन-जिन जिलों में दिव्या मित्तल ने जिम्मेदारी संभाली, वहां कथित तौर पर कई जनप्रतिनिधियों के साथ उनके संबंध सहज नहीं रहे। प्रशांत उमराव ने सवाल किया कि क्या हर जगह जनप्रतिनिधि ही गलत हो सकते हैं, खासकर जब उनमें से कई को जनता ने लगातार दो या तीन बार चुना हो।
यह आरोप भी प्रशांत उमराव की सोशल मीडिया पोस्ट का हिस्सा है। इस संबंध में दिव्या मित्तल की ओर से कोई प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है।
पीआर और प्रचार को लेकर भी उठाए सवाल
भाजपा नेता ने दिव्या मित्तल की सार्वजनिक छवि और कथित पीआर गतिविधियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की योजनाओं को स्थानीय स्तर पर अपने प्रयास के तौर पर प्रचारित किया गया।
प्रशांत उमराव ने अपनी पोस्ट में केंद्र की ‘हर घर’ योजना का उल्लेख करते हुए दावा किया कि योजना से जुड़े कार्यक्रमों में स्थानीय सांसद को नहीं बुलाया जाता था। हालांकि, उनके इस दावे के समर्थन में किसी विशिष्ट कार्यक्रम, आधिकारिक दस्तावेज या संबंधित विभाग की पुष्टि का उल्लेख पोस्ट में नहीं किया गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय को शासन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे में किसी अधिकारी की कार्यशैली को लेकर सार्वजनिक मंच पर उठाए गए सवाल स्वाभाविक रूप से राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन सकते हैं।
दिव्या मित्तल के पति को लेकर भी लगाए आरोप
प्रशांत उमराव ने अपनी पोस्ट में दिव्या मित्तल के पति की नौकरी और कथित कारोबारी गतिविधियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दिव्या मित्तल के पति पहले निजी क्षेत्र में नौकरी करते थे और बाद में कथित तौर पर ‘दलाली’ के काम से जुड़े तथा करोड़ों रुपये एकत्र किए गए।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस कथित धन का कुछ हिस्सा दिव्या मित्तल के पीआर करने वालों तक पहुंचता था। प्रशांत उमराव ने दावा किया कि इसी वजह से उत्तर प्रदेश के सैकड़ों आईएएस अधिकारियों में दिव्या मित्तल का नाम सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चाओं में ज्यादा सुनाई देता था।
हालांकि, इन आरोपों के संबंध में किसी तरह का स्वतंत्र प्रमाण, आधिकारिक जांच रिपोर्ट या संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन दावों को पुष्ट तथ्य के तौर पर प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
कौन हैं दिव्या मित्तल?
दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। अपने प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह मिर्जापुर और देवरिया समेत कई स्थानों पर प्रशासनिक जिम्मेदारियों के कारण चर्चा में रही हैं।
दिव्या मित्तल की कार्यशैली और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर समय-समय पर मीडिया में खबरें भी सामने आती रही हैं। खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और विकास योजनाओं को लेकर उनकी भूमिका की चर्चा हुई।
उनके इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उन्होंने आईएएस की सेवा छोड़ने का फैसला क्यों किया। हालांकि, अभी तक उनकी ओर से इस्तीफे की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई गई है।
सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बढ़ी राजनीतिक चर्चा
दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद प्रशांत उमराव की टिप्पणी ने मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है। प्रशांत उमराव भाजपा के मीडिया पैनलिस्ट हैं और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में भी कार्य करते हैं। वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सक्रिय रहते हैं और राजनीतिक एवं सार्वजनिक मुद्दों पर नियमित रूप से अपनी राय साझा करते हैं।
उनकी पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दिव्या मित्तल के प्रशासनिक कार्यकाल को लेकर बहस शुरू हो गई। हालांकि, किसी अधिकारी के प्रशासनिक निर्णयों और कार्यशैली का अंतिम आकलन आधिकारिक रिकॉर्ड, जांच या सक्षम संस्थाओं की रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाना अधिक उचित माना जाता है।
इस्तीफे की वजह अब भी स्पष्ट नहीं
दिव्या मित्तल ने रविवार को एक्स पर अपने इस्तीफे की जानकारी दी। लेकिन उन्होंने अपनी पोस्ट में इस्तीफे का कारण नहीं बताया। इसलिए उनके सेवा छोड़ने की वास्तविक वजह को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
ऐसे में प्रशांत उमराव की ओर से लगाए गए आरोपों और सवालों को उनके व्यक्तिगत राजनीतिक वक्तव्य के तौर पर देखना जरूरी है। जब तक दिव्या मित्तल स्वयं इन आरोपों पर प्रतिक्रिया नहीं देतीं या किसी सक्षम संस्था की ओर से संबंधित दावों की पुष्टि नहीं होती, तब तक इन्हें तथ्य के रूप में निष्कर्षित करना उचित नहीं होगा।
फिलहाल दिव्या मित्तल का इस्तीफा और उसके बाद सामने आई राजनीतिक टिप्पणियां उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में यदि दिव्या मित्तल अपने इस्तीफे की वजह या प्रशांत उमराव की टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया देती हैं, तो मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

