रक्षाबंधन पर लालू परिवार की फैमिली फोटो में रोहिणी आचार्य गायब, तेजस्वी-तेज प्रताप समेत 8 भाई-बहन दिखे साथ
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार में इस बार रक्षाबंधन का त्योहार चर्चा का विषय बन गया। दिल्ली में हुए पारिवारिक रक्षाबंधन समारोह की तस्वीरों में लालू यादव और राबड़ी देवी के बच्चों में से आठ सदस्य एक साथ नजर आए। परिवार की बेटियों ने अपने भाइयों तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को राखी बांधी।
हालांकि, इस तस्वीर में लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य नजर नहीं आईं। इसके बाद सोशल मीडिया से लेकर बिहार के राजनीतिक गलियारों तक उनके समारोह में शामिल नहीं होने को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
रोहिणी आचार्य अपने परिवार के साथ सिंगापुर में रहती हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से बिहार की राजनीति तथा अपने परिवार से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करती रही हैं।
इस बार रक्षाबंधन के अवसर पर उन्होंने शुभकामना संदेश जरूर साझा किया, लेकिन पारिवारिक समारोह की कोई तस्वीर या अपने भाइयों के नाम का उल्लेख नहीं किया। इसी वजह से उनकी गैरमौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा।
दिल्ली में एक साथ दिखा लालू-राबड़ी परिवार
रक्षाबंधन के मौके पर नई दिल्ली में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के परिवार के आठ बच्चों के एक साथ आने की तस्वीरें सामने आईं। तस्वीरों में परिवार के सदस्य त्योहार मनाते नजर आए। बहनों ने अपने भाइयों को राखी बांधी और परिवार के साथ इस खास दिन को सेलिब्रेट किया।
लालू-राबड़ी परिवार बिहार की राजनीति में लंबे समय से प्रमुख राजनीतिक परिवारों में शामिल रहा है। इसलिए जब परिवार के सदस्य किसी खास अवसर पर एक साथ दिखाई देते हैं, तो उनकी तस्वीरें राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन जाती हैं।
इस बार भी ऐसा ही हुआ। तस्वीर सामने आते ही लोगों की नजर इस बात पर गई कि परिवार के बाकी सदस्यों के साथ रोहिणी आचार्य दिखाई नहीं दे रही हैं।
रोहिणी आचार्य की गैरमौजूदगी क्यों चर्चा में?
रोहिणी आचार्य वर्तमान में सिंगापुर में अपने परिवार के साथ रहती हैं। ऐसे में रक्षाबंधन के अवसर पर दिल्ली में आयोजित समारोह में उनकी मौजूदगी नहीं होने की एक वजह उनका विदेश में रहना भी हो सकती है। हालांकि, उनके सोशल मीडिया पोस्ट के तरीके ने चर्चा को और बढ़ा दिया।
रोहिणी ने रक्षाबंधन पर शुभकामना संदेश साझा किया, लेकिन उसमें उन्होंने किसी भाई का नाम नहीं लिखा और न ही परिवार के साथ त्योहार मनाने से जुड़ी तस्वीर पोस्ट की। यही वजह है कि उनके संदेश को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आईं।
हालांकि, केवल सोशल मीडिया पोस्ट या किसी पारिवारिक तस्वीर में मौजूद न होने के आधार पर परिवार के रिश्तों को लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। उनकी अनुपस्थिति के पीछे व्यक्तिगत या पारिवारिक कारण हो सकते हैं।
तेजस्वी यादव से कथित मतभेद की चर्चा
रोहिणी आचार्य और उनके भाई तेजस्वी यादव के बीच कथित मतभेद की चर्चा पहले भी सामने आती रही है। सोशल मीडिया पर दोनों से जुड़े कुछ बयानों और घटनाक्रमों को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह के कयास लगाए जाते रहे हैं।
कथित विवाद के बाद रोहिणी के पटना स्थित राबड़ी देवी के सरकारी आवास से अलग होने की खबरों ने भी इस चर्चा को हवा दी थी। इसके बाद से ही लालू परिवार के भीतर रिश्तों को लेकर राजनीतिक विश्लेषण और सोशल मीडिया पर बहस होती रही है।
हालांकि, परिवार के किसी सदस्य की ओर से इस मौके पर ऐसा कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, जिससे यह पुष्टि हो कि रक्षाबंधन समारोह में रोहिणी की गैरमौजूदगी का कारण पारिवारिक विवाद ही था।
पिता लालू यादव को किडनी डोनेट कर चुकी हैं रोहिणी
रोहिणी आचार्य का नाम लालू प्रसाद यादव से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण पारिवारिक प्रसंग के कारण भी चर्चा में रहा है। उन्होंने अपने पिता लालू यादव को किडनी डोनेट की थी। इसके बाद दोनों के रिश्ते को लेकर कई भावुक तस्वीरें और संदेश सार्वजनिक रूप से सामने आए थे।
लालू यादव के स्वास्थ्य से जुड़े फॉलोअप और चेकअप के लिए उनके सिंगापुर जाने की खबरें भी पहले सामने आती रही हैं। ऐसे में रोहिणी और लालू यादव के बीच पारिवारिक संबंधों को लेकर लोगों की दिलचस्पी स्वाभाविक है।
इसी पृष्ठभूमि में जब रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक त्योहार पर रोहिणी की मौजूदगी नहीं दिखी, तो इस पर चर्चा होना लाजिमी था।
तेज प्रताप और तेजस्वी भी कई बार मतभेद के बावजूद साथ आए
लालू परिवार में भाइयों तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव के बीच भी समय-समय पर मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। दोनों नेताओं के राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंधों को लेकर बिहार की राजनीति में काफी चर्चा होती रही है।
इसके बावजूद पारिवारिक अवसरों पर दोनों भाइयों का एक साथ दिखाई देना भी कई बार देखने को मिला है। यही वजह है कि इस बार परिवार की तस्वीर में तेजस्वी और तेज प्रताप दोनों के साथ होने को भी लोगों ने खास तौर पर देखा।
दूसरी ओर, रोहिणी की अनुपस्थिति ने परिवार से जुड़े पुराने विवादों की चर्चाओं को फिर से सामने ला दिया।
सोशल मीडिया पोस्ट से भी बढ़ी राजनीतिक चर्चा
रोहिणी आचार्य सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं। बिहार की राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर वह अपनी बेबाक राय रखती रही हैं। ऐसे में रक्षाबंधन जैसे अवसर पर उनके संदेश को भी लोगों ने गौर से देखा।
उन्होंने त्योहार की शुभकामनाएं दीं, लेकिन परिवार के सदस्यों के साथ तस्वीर साझा नहीं की। इसके अलावा उनके संदेश में भाइयों के नाम का स्पष्ट उल्लेख भी नहीं था। इसलिए सोशल मीडिया यूजर्स और राजनीतिक समर्थकों के बीच अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
हालांकि, सोशल मीडिया पर किसी पोस्ट की भाषा या उसमें किसी व्यक्ति का नाम नहीं होने को सीधे तौर पर पारिवारिक विवाद का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसके लिए संबंधित परिवार के सदस्यों का स्पष्ट बयान जरूरी होगा।
राजनीतिक परिवार होने के कारण बढ़ जाती है हर तस्वीर की अहमियत
लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का परिवार बिहार की राजनीति में बेहद चर्चित है। परिवार के कई सदस्य सक्रिय राजनीति में हैं। ऐसे में परिवार के किसी सदस्य की मौजूदगी या गैरमौजूदगी भी अक्सर राजनीतिक नजरिए से देखी जाती है।
रक्षाबंधन की तस्वीर में आठ भाई-बहनों का एक साथ दिखना जहां परिवार की एकजुटता का संदेश देता नजर आया, वहीं रोहिणी आचार्य का इसमें शामिल न होना अलग चर्चा का कारण बन गया।
फिलहाल, रोहिणी की गैरमौजूदगी को लेकर कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। इसलिए इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय उपलब्ध तथ्यों और संबंधित परिवार की ओर से आने वाले आधिकारिक बयानों का इंतजार करना ज्यादा उचित होगा।
क्या है पूरे मामले का सार?
कुल मिलाकर रक्षाबंधन पर लालू-राबड़ी परिवार की तस्वीर ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। एक तरफ परिवार के आठ बच्चे दिल्ली में एक साथ नजर आए, वहीं दूसरी तरफ रोहिणी आचार्य सिंगापुर में होने के कारण इस पारिवारिक तस्वीर का हिस्सा नहीं बनीं।
उन्होंने सोशल मीडिया पर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं जरूर दीं, लेकिन परिवार के साथ तस्वीर साझा नहीं की। इसी वजह से उनकी गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। तेजस्वी यादव के साथ कथित मतभेद की पुरानी चर्चाओं के कारण इस घटनाक्रम को राजनीतिक चश्मे से भी देखा जा रहा है।
हालांकि, अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि रोहिणी का समारोह से दूर रहना पारिवारिक विवाद का परिणाम था। इसलिए फिलहाल इसे एक पारिवारिक घटनाक्रम के रूप में देखना और अटकलों से बचना ही उचित होगा।

