नेपाल की बाढ़ के बाद यूपी में अलर्ट, वाराणसी-प्रयागराज में बढ़ा जलस्तर, उत्तराखंड में सड़कें बंद

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Digital UP News Desk

नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद उत्तर भारत के कई हिस्सों में मौसम और नदियों के बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंता बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश में प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। वाराणसी में भारी बारिश के बाद गंगा का जलस्तर बढ़ने लगा है, जबकि प्रयागराज में यमुना के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका असर नदी किनारे स्थित घाटों और आसपास के क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है।

वाराणसी में स्थिति ऐसी हो गई है कि मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के कुछ शवदाह स्थल पानी में डूब गए हैं। इसके चलते अंतिम संस्कार के लिए लोगों को वैकल्पिक स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है। कुछ जगहों पर गलियों और छतों पर अंतिम संस्कार किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन और स्थानीय लोगों के सामने चुनौती यह है कि लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच अंतिम संस्कार सहित अन्य जरूरी व्यवस्थाएं सामान्य रूप से संचालित की जा सकें।

प्रयागराज में भी यमुना के बढ़ते जलस्तर के कारण नदी और घाटों के आसपास सतर्कता बढ़ाई गई है। ऐसे में लोगों को नदी के किनारे जाने से बचने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।

उत्तराखंड में बारिश और भूस्खलन से यात्रा प्रभावित

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में भी देर रात से रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है। बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। चमोली जिले में लैंडस्लाइड के चलते निजमुला मार्ग बंद हो गया है। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ आवाजाही करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

वहीं, बद्रीनाथ हाईवे पर जोशीमठ-मरवाड़ी पुल से आगे हाथीपहाड़ के पास करीब 30 मीटर सड़क बह गई। सड़क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के कारण हाईवे पर आवागमन बाधित हो गया है। इसका सीधा असर बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा पर पड़ा है।

बारिश के दौरान पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। इसलिए यात्रियों को मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित मार्गों को सुरक्षित तरीके से बहाल करना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

मध्य प्रदेश के 17 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। गुरुवार को प्रदेश के पूर्वी और उत्तरी हिस्से के 17 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि की स्थिति बन सकती है।

लगातार बारिश के मद्देनजर स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है। खासतौर पर नदी, नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे रास्तों और पुल-पुलियों पर पानी आने की स्थिति में अनावश्यक आवागमन से बचना जरूरी है।

बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड समेत पांच राज्यों में अलर्ट

मानसून की सक्रियता का असर मध्य भारत के साथ-साथ पूर्वी भारत के कई राज्यों में भी दिखाई दे रहा है। बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड समेत पांच राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम में बदलाव के चलते कई क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ स्थानीय स्तर पर जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है।

ऐसे में लोगों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दी जा रही है। खासकर बारिश के दौरान खुले क्षेत्रों, नदी-नालों और कमजोर संरचनाओं से दूरी बनाए रखना जरूरी है।

राजस्थान में करंट की चपेट में आने से पिता-पुत्र की मौत

राजस्थान के पाली जिले में बारिश के बीच बिजली से जुड़ी एक दर्दनाक घटना सामने आई है। खिंवाड़ा थाना क्षेत्र में पानी लेने जा रहे एक परिवार पर खेत में खड़ा क्षतिग्रस्त बिजली का पोल अचानक गिर गया। पोल के गिरने के बाद करंट फैलने से पिता और पुत्र की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना में एक महिला भी करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गई। उसे उपचार के लिए पाली के बांगड़ हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। इस घटना ने बारिश के मौसम में क्षतिग्रस्त बिजली के खंभों और विद्युत लाइनों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।

बारिश के दौरान बिजली के पोल, तार और अन्य विद्युत उपकरण विशेष रूप से खतरनाक हो सकते हैं। इसलिए लोगों को ऐसे स्थानों से दूर रहने और किसी भी क्षतिग्रस्त विद्युत संरचना की जानकारी संबंधित विभाग को तत्काल देने की जरूरत है।

चित्रकूट में बढ़ा मंदाकिनी नदी का जलस्तर

सतना जिले के चित्रकूट में लगातार बारिश के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। राघव प्रयाग घाट पर पानी आरती स्थल तक पहुंच गया है। नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण घाटों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बढ़ाई गई है।

नगर परिषद की ओर से अनाउंसमेंट कर नाविकों को रस्सी, ट्यूब और लाइफ जैकेट तैयार रखने की सलाह दी जा रही है। इसके साथ ही लोगों से नदी और घाटों के आसपास सावधानी बरतने की अपील की गई है।

प्रशासन की ओर से लोगों को जलस्तर बढ़ने की स्थिति में नदी के नजदीक जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। वहीं, नाविकों को भी आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के साथ तैयार रहने को कहा गया है। लगातार बारिश की स्थिति में नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है, इसलिए सावधानी को प्राथमिकता दी जा रही है।

पूर्वी राजस्थान में बारिश, बाकानी में 114 मिमी पानी

गुरुवार सुबह समाप्त हुए पिछले 24 घंटों के दौरान पूर्वी राजस्थान के कुछ स्थानों पर मध्यम से स्थानीय स्तर पर तेज बारिश रिकॉर्ड की गई। झालावाड़ जिले के बाकानी में सबसे ज्यादा 114 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। बारिश के कारण कई इलाकों में मौसम का मिजाज बदला है।

हालांकि, राजस्थान में बारिश के साथ गर्मी का असर भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। राज्य में सबसे अधिक अधिकतम तापमान गंगानगर में 41.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य तापमान से 3.5 डिग्री अधिक रहा। इससे साफ है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज अलग-अलग बना हुआ है।

लोगों से सतर्क रहने की अपील

कुल मिलाकर नेपाल में आई बाढ़ के बाद उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम की सक्रियता बढ़ी है। उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर, उत्तराखंड में भूस्खलन और सड़क क्षति, मध्य प्रदेश तथा राजस्थान में भारी बारिश और चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन के सामने सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ा दी हैं।

ऐसे मौसम में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। नदी और घाटों के आसपास जाने से बचना, बिजली के क्षतिग्रस्त पोल और तारों से दूरी बनाए रखना तथा पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा से पहले सड़क की स्थिति की जानकारी लेना बेहद जरूरी है। साथ ही, प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों और स्थानीय मौसम अपडेट का पालन करना चाहिए।

फिलहाल, बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच संबंधित प्रशासनिक एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में मौसम की स्थिति के आधार पर प्रभावित इलाकों में सुरक्षा और राहत व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है।

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