कानपुर में शस्त्र लाइसेंस के लिए डीएम की अनोखी शर्त, पहले गुटखा छोड़ने को कहा और आगे पढ़ें

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रिपोर्ट – सर्वेश सोनू शर्मा 

कानपुर: कानपुर नगर के जिलाधिकारी आईएएस जितेंद्र सिंह अपनी अलग कार्यशैली और जनसुनवाई के दौरान लिए जाने वाले फैसलों को लेकर चर्चा में रहते हैं। जनता दर्शन के दौरान वह लोगों की समस्याएं सुनने के साथ-साथ उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक भी करते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया, जब शस्त्र लाइसेंस को वरासत के आधार पर अपने नाम कराने पहुंचे एक व्यक्ति को जिलाधिकारी ने पहले गुटखा और पान मसाला छोड़ने की सलाह दी।

मामला जनता दर्शन के दौरान का बताया जा रहा है। एक व्यक्ति अपने पिता के नाम पर पंजीकृत शस्त्र लाइसेंस को वरासत के आधार पर अपने नाम कराने के लिए जिलाधिकारी के समक्ष आवेदन लेकर पहुंचा था। बातचीत के दौरान जिलाधिकारी की नजर उसके पास मौजूद पान मसाले पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने नाराजगी जाहिर करने के बजाय सहज अंदाज में उसे पहले गुटखा और पान मसाला छोड़ने की बात कही।

डीएम ने स्वास्थ्य को लेकर दिया संदेश

जिलाधिकारी ने आवेदक से कहा कि शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन उससे पहले उसे गुटखा और पान मसाला छोड़ना चाहिए। डीएम की इस बात को केवल लाइसेंस से जोड़कर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और नशामुक्ति के संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

बताया गया कि जिलाधिकारी ने आवेदक से कहा कि वह गुटखा या पान मसाला छोड़ने का संकल्प ले। इसके लिए उससे परिवार और गांव के स्तर पर शपथ पत्र प्रस्तुत करने को कहा गया है। इस शपथ पत्र में यह उल्लेख किया जाना है कि वह भविष्य में गुटखा या पान मसाला का सेवन नहीं करेगा।

दादा, पिता और ग्राम प्रधान से शपथ पत्र की बात

जानकारी के मुताबिक, आवेदक को अपने दादा, पिता और नरवल गांव के ग्राम प्रधान की ओर से शपथ पत्र तैयार कराकर जमा करने के लिए कहा गया। शपथ पत्र के माध्यम से आवेदक द्वारा गुटखा और पान मसाला छोड़ने की प्रतिबद्धता दर्ज कराई जाएगी।

इस दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शस्त्र लाइसेंस को वरासत के आधार पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही आगे बढ़ेगी। यानी केवल शपथ पत्र के आधार पर लाइसेंस का हस्तांतरण स्वतः नहीं होगा। आवेदन से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज और अन्य निर्धारित औपचारिकताएं पूरी होना जरूरी होगा।

वरासत के आधार पर लाइसेंस ट्रांसफर का आवेदन

दरअसल, संबंधित व्यक्ति अपने पिता के नाम दर्ज शस्त्र लाइसेंस को वरासत के आधार पर अपने नाम कराने के लिए जनता दर्शन में पहुंचा था। ऐसे मामलों में आवेदन की जांच और आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित प्राधिकारी द्वारा निर्णय लिया जाता है।

इसी दौरान जिलाधिकारी ने आवेदक के स्वास्थ्य से जुड़ी आदत पर ध्यान दिया। उन्होंने मामले को अलग अंदाज में लेते हुए गुटखा और पान मसाला छोड़ने का संदेश दिया। इससे जनसुनवाई के दौरान मौजूद लोगों का ध्यान भी इस ओर गया।

डीएम की कार्यशैली फिर चर्चा में

कानपुर नगर के जिलाधिकारी की इस पहल की चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच सामाजिक संदेश देने का प्रयास किया। आमतौर पर जनता दर्शन में लोग प्रमाणपत्र, लाइसेंस, राजस्व, शिकायत और अन्य प्रशासनिक समस्याओं को लेकर अधिकारियों के पास पहुंचते हैं। हालांकि, इस मामले में डीएम ने प्रशासनिक विषय के साथ स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे को भी सामने रखा।

गुटखा और पान मसाला जैसे तंबाकू उत्पादों के सेवन को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से लोगों को जागरूक करते रहे हैं। ऐसे में जिलाधिकारी द्वारा आवेदक को इन आदतों से दूर रहने की सलाह देना नशामुक्ति और स्वस्थ जीवनशैली के संदेश से भी जुड़ा नजर आता है।

पहले संकल्प, फिर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आवेदक से गुटखा और पान मसाला छोड़ने का लिखित संकल्प देने को कहा गया है। इसके बाद शस्त्र लाइसेंस के वरासत संबंधी आवेदन में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, यह स्पष्ट है कि शस्त्र लाइसेंस का हस्तांतरण केवल किसी एक शर्त के आधार पर नहीं होता। इसके लिए संबंधित नियमों के अनुसार दस्तावेजों की जांच, पात्रता और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया जाना जरूरी है। इसलिए आवेदक को सभी जरूरी कागजात पूरे करने होंगे।

जनता दर्शन में प्रशासनिक काम के साथ सामाजिक संदेश

जनता दर्शन का उद्देश्य लोगों की समस्याओं को सीधे सुनना और उनके निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देना होता है। ऐसे में जिलाधिकारी द्वारा इस अवसर पर स्वास्थ्य संबंधी संदेश देना भी चर्चा का विषय बन गया।

आवेदक से कथित तौर पर परिवार के सदस्यों और ग्राम प्रधान की मौजूदगी में शपथ पत्र देने को कहा गया है। इसका उद्देश्य उसे अपनी आदत छोड़ने के लिए प्रेरित करना बताया जा रहा है। इस तरह प्रशासनिक प्रक्रिया के दौरान व्यक्तिगत स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता का पहलू भी सामने आया।

लोगों के बीच चर्चा का विषय बना मामला

कानपुर के नरवल क्षेत्र से जुड़े इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। जिलाधिकारी की ओर से आवेदक को सीधे गुटखा और पान मसाला छोड़ने की सलाह दिए जाने को उनके अलग अंदाज के रूप में देखा जा रहा है।

वहीं, शस्त्र लाइसेंस के संबंध में अंतिम निर्णय निर्धारित नियमों और आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद ही लिया जाएगा। यदि आवेदन से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी होती हैं, तभी वरासत के आधार पर लाइसेंस हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश

कुल मिलाकर, यह मामला प्रशासनिक जनसुनवाई के दौरान सामने आए एक अलग तरह के संवाद के कारण चर्चा में है। जिलाधिकारी ने शस्त्र लाइसेंस के आवेदन के साथ आवेदक की गुटखा और पान मसाला सेवन की आदत पर ध्यान दिया और उसे छोड़ने का संदेश दिया।

इस घटना से एक ओर जहां शस्त्र लाइसेंस की वरासत प्रक्रिया चर्चा में आई, वहीं दूसरी ओर तंबाकू और पान मसाला छोड़ने का सामाजिक संदेश भी सामने आया। अब आवेदक द्वारा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने और निर्धारित नियमों के अनुसार आवेदन की जांच के बाद ही लाइसेंस के संबंध में आगे का निर्णय लिया जाएगा।

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